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Lakhimpur Kheri News: प्राकृतवास में सुरक्षित पहुंचींं डॉल्फिन
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डॉल्फिन की निगरानी करती डब्ल्यूआईआई की टीम।
बांकेगंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग की शारदा नगर रेंज के चौका साइफन में पानी बंद होने से खतरे में पड़ा डॉल्फिन का कुनबा अब सुरक्षित हैं। वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं की टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं।
डीएफओ संजय बिश्वाल के मुताबिक, चौका साइफन से निकलकर शारदा बैराज में पहुंचे दो समूहों में शामिल करीब 12 डॉल्फिन में से पांच डॉल्फिन बैराज के पास मौजूद हैं। जबकि दूसरे समूह की करीब सात गहरे पानी में पहुंचकर खतरे से बाहर हैं। उन्हें वहां मछलियों के रूप में पर्याप्त भोजन और ठंडा पानी मिल रहा है।
अपने प्राकृतवास में पहुंचीं डॉल्फिन पूरी तरह सुरक्षित हो गई हैं। मादा डॉल्फिन का कुनबा नदी में काफी दूर निकल चुका है। डीएफओ ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयं सेवी सस्थाएं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के विपुल मौर्य, टर्टल सर्वाइवल एलियांस (टीएसए) के शैलेंद्र सिंह के अलावा वन विभाग की टीमें 24 घंटे लगातार बारी-बारी से निगरानी कर रही हैं। साथ ही नदी के पानी के अंदर आधुनिक उपकरणों के जरिये उनके मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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डॉल्फिन की खासियत
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक विपुल मौर्य ने बताया कि स्तनधारी डॉल्फिन पानी के अंदर कंपन सरीखी आवाज निकालती है, यह आवाज भारी चीज से टकराकर वापस डॉल्फिन के पास आ जाती है। इससे उन्हें पता चल जाता है कि शिकार का आकार कितना बड़ा और कितने करीब है। यह आवाज और सीटियों के जरिये एक दूसरे से बात करती हैं। डॉल्फिन पानी के अंदर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तैरती है।
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डीएफओ संजय बिश्वाल के मुताबिक, चौका साइफन से निकलकर शारदा बैराज में पहुंचे दो समूहों में शामिल करीब 12 डॉल्फिन में से पांच डॉल्फिन बैराज के पास मौजूद हैं। जबकि दूसरे समूह की करीब सात गहरे पानी में पहुंचकर खतरे से बाहर हैं। उन्हें वहां मछलियों के रूप में पर्याप्त भोजन और ठंडा पानी मिल रहा है।
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अपने प्राकृतवास में पहुंचीं डॉल्फिन पूरी तरह सुरक्षित हो गई हैं। मादा डॉल्फिन का कुनबा नदी में काफी दूर निकल चुका है। डीएफओ ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली स्वयं सेवी सस्थाएं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के विपुल मौर्य, टर्टल सर्वाइवल एलियांस (टीएसए) के शैलेंद्र सिंह के अलावा वन विभाग की टीमें 24 घंटे लगातार बारी-बारी से निगरानी कर रही हैं। साथ ही नदी के पानी के अंदर आधुनिक उपकरणों के जरिये उनके मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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डॉल्फिन की खासियत
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक विपुल मौर्य ने बताया कि स्तनधारी डॉल्फिन पानी के अंदर कंपन सरीखी आवाज निकालती है, यह आवाज भारी चीज से टकराकर वापस डॉल्फिन के पास आ जाती है। इससे उन्हें पता चल जाता है कि शिकार का आकार कितना बड़ा और कितने करीब है। यह आवाज और सीटियों के जरिये एक दूसरे से बात करती हैं। डॉल्फिन पानी के अंदर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तैरती है।