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Lakhimpur Kheri News: डीएम साहब, सुधार दीजिए हमारे स्कूल की भी सूरत
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लखीमपुर खीरी। परिषदीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पर सरकार करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन शहर के नौरंगाबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय की दुर्दशा किसी को दिखाई नहीं दे रही। गंदा परिसर, बैठने के लिए महज टाट पट्टी, यहां पर स्थायी शिक्षक तो हैं, लेकिन पढ़ाई का जिम्मा संस्था से नियुक्ति शिक्षकों पर है। ऐसे में यहां पर पंजीकृत करीब डेढ़ सौ छात्र-छात्राओं को भविष्य अंधकारमय होता दिखाई दे रहा है। यहां के बच्चों ने डीएम से स्कूल की सूरत सुधारने की मांग की है।
शहर में जहां राजापुर, सदर विद्यालय स्कूल को मॉर्डन और आकर्षित बनाया जा चुका है। वहीं नौरंगाबाद के प्राथमिक स्कूल की सूरत नहीं बदलती दिखाई दे रही है। स्कूल में तमाम प्रकार की अव्यवस्थाएं हावी हैं। परिसर में न तो चलने लायक जगह है और न है प्रयोग करने के लिए सही शौचालय। यहां पर बच्चों की संख्या तो 150 है, लेकिन उपस्थित न के बराबर रहती है। जरा सी बरसात में परिसर लबालब भर जाता है। वहीं बिल्डिंग भी काफी जर्जर हो चुकी है। छतों और छज्जों की सरिया तक दिखने लगी हैं।
कागजों में तो यहां पर दो अध्यापकों की तैनाती है, लेकिन पड़ताल के समय महज एक शिक्षिका मिलीं वो भी एक संस्था की ओर से नामित थीं। उन्होंने बताया कि अध्यापक कुतुबुद्दीन किसी काम से बीएसए कार्यालय गए हैं। इंचार्ज प्रधानाध्यापक फारुक के पास कई विद्यालयों का चार्ज है, लिहाजा वह कम ही आते हैं। स्कूल के बच्चों ने डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल स्कूल की दशा सुधारने और कुर्सी मेज दिलाने की मांग की है।
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बैठने के लिए नहीं हैं कुर्सी-मेज
विभाग स्कूलों में पर्याप्त इंतजाम होने का दावा करता है, लेकिन कार्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राथमिक विद्यालय नौरंगाबाद की हालत किसी से छुपी नहीं है। अधिकारी जानकर अनजान हैं। यहां पर बच्चों को बैठने के लिए महज टाट-पट्टी ही है। बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतें सर्दियां के महीने में होती है। इन दिनों बच्चे ठिठुरते रहते हैं।
हर साल मिलता है मेंटीनेंस का रुपया
शासन की ओर से छोटी टूट-फूट को सही कराने, जरूरत का सामान खरीदने के लिए हर साल ग्रांट दी जाती है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रति स्कूल के हिसाब से करीब दस हजार रुपये साल के मिलते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार मिलने वाली ग्रांट कहां और किस मद में खर्च हो रही है।
फैक्ट फाइल
1973 प्राथमिक स्कूल
406 उच्च प्राथमिक स्कूल
727 संविलियन स्कूल
तैनात शिक्षक
अध्यापक-8892
शिक्षामित्र- 3228
अनुदेशक 875
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शहर में जहां राजापुर, सदर विद्यालय स्कूल को मॉर्डन और आकर्षित बनाया जा चुका है। वहीं नौरंगाबाद के प्राथमिक स्कूल की सूरत नहीं बदलती दिखाई दे रही है। स्कूल में तमाम प्रकार की अव्यवस्थाएं हावी हैं। परिसर में न तो चलने लायक जगह है और न है प्रयोग करने के लिए सही शौचालय। यहां पर बच्चों की संख्या तो 150 है, लेकिन उपस्थित न के बराबर रहती है। जरा सी बरसात में परिसर लबालब भर जाता है। वहीं बिल्डिंग भी काफी जर्जर हो चुकी है। छतों और छज्जों की सरिया तक दिखने लगी हैं।
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कागजों में तो यहां पर दो अध्यापकों की तैनाती है, लेकिन पड़ताल के समय महज एक शिक्षिका मिलीं वो भी एक संस्था की ओर से नामित थीं। उन्होंने बताया कि अध्यापक कुतुबुद्दीन किसी काम से बीएसए कार्यालय गए हैं। इंचार्ज प्रधानाध्यापक फारुक के पास कई विद्यालयों का चार्ज है, लिहाजा वह कम ही आते हैं। स्कूल के बच्चों ने डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल स्कूल की दशा सुधारने और कुर्सी मेज दिलाने की मांग की है।
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बैठने के लिए नहीं हैं कुर्सी-मेज
विभाग स्कूलों में पर्याप्त इंतजाम होने का दावा करता है, लेकिन कार्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर दूरी पर स्थित प्राथमिक विद्यालय नौरंगाबाद की हालत किसी से छुपी नहीं है। अधिकारी जानकर अनजान हैं। यहां पर बच्चों को बैठने के लिए महज टाट-पट्टी ही है। बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतें सर्दियां के महीने में होती है। इन दिनों बच्चे ठिठुरते रहते हैं।
हर साल मिलता है मेंटीनेंस का रुपया
शासन की ओर से छोटी टूट-फूट को सही कराने, जरूरत का सामान खरीदने के लिए हर साल ग्रांट दी जाती है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्रति स्कूल के हिसाब से करीब दस हजार रुपये साल के मिलते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार मिलने वाली ग्रांट कहां और किस मद में खर्च हो रही है।
फैक्ट फाइल
1973 प्राथमिक स्कूल
406 उच्च प्राथमिक स्कूल
727 संविलियन स्कूल
तैनात शिक्षक
अध्यापक-8892
शिक्षामित्र- 3228
अनुदेशक 875