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दिवाली पर रोशनी से नहाया शहर
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Nov 2015 11:10 PM IST
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शहर में दीपोत्सव जगमग रोशनी और आतिशबाजी के शोर के बीच धूमधाम से मनाया गया। घरों और प्रतिष्ठानों पर विशेष पूजा अर्चना की गई। पूरा माहौल खुशी से भर उठा। रात में मां लक्ष्मी और आदिदेव गणपति की पूजा हुई। प्रसाद वितरण के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और सुख-समृद्धि की कामना की। लोगों ने जमकर आतिशबाजी छुड़ाई और एक-दूसरे को उपहार देकर दीपावली की बधाईयां दीं।
लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इसी दिन लंका पर विजय कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर लोगों ने घर-घर, द्वार-द्वार को दीपों से सजा दिया था। तभी से ही अंधेरे पर प्रकाश की जीत का यह पर्व मनाया जाता है। रविवार को शहर इस दिवाली पर रोशनी से जगमगा उठा। देर रात तक खूब आतिशबाजी भी हुई। फिजाओं में बिखरती रंगी बिरंगी फुहारों से आकाश झिलमिला उठा। घर, प्रतिष्ठान और बाजार दुल्हन की तरह सजाये गए। विशेष पूजा-अर्चना की गई। व्यापारियों ने नए बहीखाते बनाए और उनकी पूजा की। रोशनी एवं आतिशबाजी के बाद महिलाओं ने काजल बनाकर आंखों में लगाया। सूप बजाकर बला भगाने की परंपरा भी निभाई गई।
व्हाट्सएप से भेजे गए बधाई संदेश
मोबाइल युग में तीज-त्योहारों पर बधाइयां देना भी आसान हो गया है। दीपावली से दो दिन पहले से ही लोगों ने व्हाट्सएप से तरह-तरह के सचित्र बधाई संदेश लिखकर अपने चहेतों तक पहुंचाए। नेटवर्क ने इस बार लोगों का साथ दिया। मोबाइल से बधाई संदेश भेजने का सिलसिला अगले दिन तक बखूबी चलता रहा।
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खूब लगे जुआ के फड़
हमारे तीज-त्योहार अच्छाई के साथ बुराइयों को भी समेटे हुए हैं। दीपावली पर्व भी इससे अछूता नहीं है। त्योहार पर जहां एक ओर लोग पूजन और आतिशबाजी का लुत्फ उठाने में मशगूल थे, वहीं तमाम लोग परंपरा का निर्वाह जुआ खेलने में भी कर रहे थे। शौकिया लोग भी खानपान से निवृत्त होकर घरों में फड़ लगाकर जुआ खेलनेे बैठ गए। कुछ ने दोस्तों के साथ यह परंपरा निभाई तो अधिकांश जहां मौका मिला वहीं ताश की गड्डियां फेटते नजर आए।
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लोगों का मानना है कि भगवान श्रीराम इसी दिन लंका पर विजय कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर लोगों ने घर-घर, द्वार-द्वार को दीपों से सजा दिया था। तभी से ही अंधेरे पर प्रकाश की जीत का यह पर्व मनाया जाता है। रविवार को शहर इस दिवाली पर रोशनी से जगमगा उठा। देर रात तक खूब आतिशबाजी भी हुई। फिजाओं में बिखरती रंगी बिरंगी फुहारों से आकाश झिलमिला उठा। घर, प्रतिष्ठान और बाजार दुल्हन की तरह सजाये गए। विशेष पूजा-अर्चना की गई। व्यापारियों ने नए बहीखाते बनाए और उनकी पूजा की। रोशनी एवं आतिशबाजी के बाद महिलाओं ने काजल बनाकर आंखों में लगाया। सूप बजाकर बला भगाने की परंपरा भी निभाई गई।
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व्हाट्सएप से भेजे गए बधाई संदेश
मोबाइल युग में तीज-त्योहारों पर बधाइयां देना भी आसान हो गया है। दीपावली से दो दिन पहले से ही लोगों ने व्हाट्सएप से तरह-तरह के सचित्र बधाई संदेश लिखकर अपने चहेतों तक पहुंचाए। नेटवर्क ने इस बार लोगों का साथ दिया। मोबाइल से बधाई संदेश भेजने का सिलसिला अगले दिन तक बखूबी चलता रहा।
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खूब लगे जुआ के फड़
हमारे तीज-त्योहार अच्छाई के साथ बुराइयों को भी समेटे हुए हैं। दीपावली पर्व भी इससे अछूता नहीं है। त्योहार पर जहां एक ओर लोग पूजन और आतिशबाजी का लुत्फ उठाने में मशगूल थे, वहीं तमाम लोग परंपरा का निर्वाह जुआ खेलने में भी कर रहे थे। शौकिया लोग भी खानपान से निवृत्त होकर घरों में फड़ लगाकर जुआ खेलनेे बैठ गए। कुछ ने दोस्तों के साथ यह परंपरा निभाई तो अधिकांश जहां मौका मिला वहीं ताश की गड्डियां फेटते नजर आए।