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कोरोनाकाल: बुखार के साथ डायरिया ने भी पसारे पांव
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चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। कोरोना महामारी के बीच बुखार के साथ डायरिया ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। इससे पीड़ित बच्चे रोजाना जिला अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। सितंबर के शुरुआती 18 दिनों में नवजात सहित कुल 13 बच्चे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती हुए। डॉक्टरों के अनुसार, डायरिया होने का प्रमुख कारण दूषित खान पान और पानी है। बाजार में बिकने वाली खाने पीने की खुली चीजें, पैक्ड फूड और कटे फल आदि के सेवन से दूरी रखकर डायरिया से बचा जा सकता है।
बारिश के मौसम में डायरिया के मामले बढ़ जाते हैं। इसका कारण दूषित पानी और खाने का प्रयोग करना है। गांव के लोग अक्सर रात का बचा भोजन सुबह और सुबह का बचा भोजन दोपहर एवं शाम को बच्चों को खिला देते हैं। ऐसे में डायरिया होने का खतरा रहता है। पिछले 18 दिन में डायरिया पीड़ित 13 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हुए। इसमें पांच माह की प्रिया, छह साल की गीता, डेढ साल की कायनात, 13 वर्षीय रवि, छह वर्षीय शीतल, तीन वर्षीय अनिल, 13 वर्षीय तान्या, तीन माह की शिवा, चार वर्षीय अबुशाद, आठ माह का अब्दुल समद, चार वर्षीय आदित्य, पांच वर्षीय अंशिका, और डेढ वर्षीय अंशी शामिल हैं। जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि मौसम कोई भी हो बच्चों को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है। खासकर बारिश के मौसम में विशेष सावधानी रखें, क्योंकि ऐसे में संक्रामक बीमारियां होने की आशंका ज्यादा रहती है। इनसे बचने के लिए घर के साथ शारीरिक साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डायरिया का कारण
खान पान की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या फिर खराब होना। नवजात में डायरिया होने का कारण स्तनपान के दौरान साफ सफाई न होना। बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैक्ड फूड का प्रयोग। खुले में बिक रहे कटे फल आदि का सेवन करना। एसी, कूलर वाले कमरे से सीधा धूप में निकलना। रोटा वायरस का संक्रमण होना। बच्चों को मिलावटी दूध पिलाने से। पाचन शक्ति का कमजोर होने या फिर शरीर में पानी की कमी होना।
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ऐसे करें बचाव
घर की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाने से पहले और शौच के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धुलें। डायरिया हो जाने पर पानी उबालकर पियें। बाहर का खाना, फास्ट और पैक्ड फूड खाने से बचें। फास्ट फूड और बाजार के कटे फल खाने से परहेज करें। पेट में दर्द होने पर बिना लापरवाही किए सरकारी अस्पताल में दिखाएं। डायरिया पीड़ित को ओआरएस घोल पिलाएं। इसके न होने पर नीबू, शक्कर और नमक का घोल बनाकर पीने को दें।
दूषित खाना, पानी बढ़ा रहा आंत्रशोध (गेस्ट्राएंटेराइटिस) की बीमारी
खुले में बिकने वाली खान पान की वस्तुएं और पानी गेस्ट्रोएंटराइटिस की बीमारी बढ़ा रहा है। इससे मरीज के पेट में दर्द, मरोड़ के साथ लूज मोशन होने लगते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। प्यास तेज लगती है, लेकिन पानी पीने पर उल्टी होने लगती है।
दो तरह का होता है डायरिया
डायरिया दो तरह का होता है। एक एक्यूट और दूसरा क्रानिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु, विषाणु या पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब बीमारी सप्ताह भर से ज्यादा बनी रहती है तो क्रानिक बन जाती है। क्रानिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इससे पाचन तंत्र की गंभीर गड़बड़ी हो जाती है। ठीक होने में समय भी ज्यादा लगता है।
बरसात के मौसम में बच्चों को लेकर विशेष रूप से सावधान रहें। घर की साफ सफाई और उनके खान पान को लेकर अत्यधिक गंभीरता बरतें। बच्चों को ताजा भोजन खिलाएं। नवजात को बोतल की जगह कटोरी चम्मच से दूध पिलाएं।
-डॉ. आरपी वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
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बारिश के मौसम में डायरिया के मामले बढ़ जाते हैं। इसका कारण दूषित पानी और खाने का प्रयोग करना है। गांव के लोग अक्सर रात का बचा भोजन सुबह और सुबह का बचा भोजन दोपहर एवं शाम को बच्चों को खिला देते हैं। ऐसे में डायरिया होने का खतरा रहता है। पिछले 18 दिन में डायरिया पीड़ित 13 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती हुए। इसमें पांच माह की प्रिया, छह साल की गीता, डेढ साल की कायनात, 13 वर्षीय रवि, छह वर्षीय शीतल, तीन वर्षीय अनिल, 13 वर्षीय तान्या, तीन माह की शिवा, चार वर्षीय अबुशाद, आठ माह का अब्दुल समद, चार वर्षीय आदित्य, पांच वर्षीय अंशिका, और डेढ वर्षीय अंशी शामिल हैं। जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा बताते हैं कि मौसम कोई भी हो बच्चों को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत होती है। खासकर बारिश के मौसम में विशेष सावधानी रखें, क्योंकि ऐसे में संक्रामक बीमारियां होने की आशंका ज्यादा रहती है। इनसे बचने के लिए घर के साथ शारीरिक साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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डायरिया का कारण
खान पान की चीजों में प्रदूषण, उनका बासी या फिर खराब होना। नवजात में डायरिया होने का कारण स्तनपान के दौरान साफ सफाई न होना। बाहर का खाना, फास्ट फूड और पैक्ड फूड का प्रयोग। खुले में बिक रहे कटे फल आदि का सेवन करना। एसी, कूलर वाले कमरे से सीधा धूप में निकलना। रोटा वायरस का संक्रमण होना। बच्चों को मिलावटी दूध पिलाने से। पाचन शक्ति का कमजोर होने या फिर शरीर में पानी की कमी होना।
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ऐसे करें बचाव
घर की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाने से पहले और शौच के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धुलें। डायरिया हो जाने पर पानी उबालकर पियें। बाहर का खाना, फास्ट और पैक्ड फूड खाने से बचें। फास्ट फूड और बाजार के कटे फल खाने से परहेज करें। पेट में दर्द होने पर बिना लापरवाही किए सरकारी अस्पताल में दिखाएं। डायरिया पीड़ित को ओआरएस घोल पिलाएं। इसके न होने पर नीबू, शक्कर और नमक का घोल बनाकर पीने को दें।
दूषित खाना, पानी बढ़ा रहा आंत्रशोध (गेस्ट्राएंटेराइटिस) की बीमारी
खुले में बिकने वाली खान पान की वस्तुएं और पानी गेस्ट्रोएंटराइटिस की बीमारी बढ़ा रहा है। इससे मरीज के पेट में दर्द, मरोड़ के साथ लूज मोशन होने लगते हैं। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। प्यास तेज लगती है, लेकिन पानी पीने पर उल्टी होने लगती है।
दो तरह का होता है डायरिया
डायरिया दो तरह का होता है। एक एक्यूट और दूसरा क्रानिक। एक्यूट डायरिया जीवाणु, विषाणु या पैरासाइट के कारण होता है। यह सामान्यत: हफ्ते भर में ठीक हो जाता है, लेकिन जब बीमारी सप्ताह भर से ज्यादा बनी रहती है तो क्रानिक बन जाती है। क्रानिक डायरिया आंत की विभिन्न बीमारियों के कारण हो सकता है। इससे पाचन तंत्र की गंभीर गड़बड़ी हो जाती है। ठीक होने में समय भी ज्यादा लगता है।
बरसात के मौसम में बच्चों को लेकर विशेष रूप से सावधान रहें। घर की साफ सफाई और उनके खान पान को लेकर अत्यधिक गंभीरता बरतें। बच्चों को ताजा भोजन खिलाएं। नवजात को बोतल की जगह कटोरी चम्मच से दूध पिलाएं।
-डॉ. आरपी वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ