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जिला अस्पताल में डायरिया पीड़ित युवक की मौत, हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:41 PM IST
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हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार वालों ने लगाया, लापरवाही का आरोप
मौत के बाद भी लगा दी ड्रिप
गुरुवार को जिला अस्पताल में भर्ती हुए डायरिया पीड़ित खीरी कस्बे के हनिया टोला निवासी युवक की मौत हो गई। घरवालों ने डॉक्टर और वार्ड के स्टाफ पर लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची यूपी 100 पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया और दूसरे दिन घरवालों के सुपुर्द कर दिया। मामले को देखते हुए सीएमएस ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। शहर के मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी जितेंद्र कश्यप ने बताया कि उसके मामा रामजगत (30) पुत्र रामबरन कई दिन से डायरिया से पीड़ित थे, हालत बिगड़ने पर उन्हें गुरुवार को जिला अस्पताल लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में इलाज शुरू करने के बाद मामा को आईसोलोशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। जितेंद्र के बताया कि ड्रिप लगाने के नाम पर पहले इमरजेंसी में सौ रुपये और फिर वार्ड में 120 रुपये लिए गए। उसने बताया कि अचानक ग्लूकोज चढ़ना बंद हो गया और जब वार्ड ब्वाय से देखने को कहा तो वह गुस्से मेें वीको निकालकर ही चले गए, लेकिन सूचना देने पर भी स्टाफ नर्स ने मरीज को देखना तक जरूरी नहीं समझा। जितेंद्र का कहना है कि वार्ड आए डॉक्टर ने रामजगत के ड्रिप लगा दी और यह तक नहीं देखा कि वह जिंदा हैं या मृत, जबकि डॉक्टर के आने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। लापरवाही बरते जाने से नाराज घरवालों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की सूचना पर पहुंची यूपी 100 ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया, लेकिन घरवालों के पीएम कराने से इनकार करने पर पुलिस ने शव घरवालों को दे दिया। घरवालों की लिखित शिकायत पर सीएमएस ने जांच कमेटी गठित की है।
म़ृतक के घरवालों ने अस्पताल स्टाफ पर जो आरोप लगाए हैं उसकी जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है, रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
डॉ.मनोज कुमार, सीएमएस
डॉक्टर व सीएमएस ने की आर्थिक मदद
आर्थिक स्थित ठीक ना होने की बात बताकर घरवालों ने जब शव ले जाने में असमर्थता जताई तो सीएमएस डॉ.मनोज कुमार और डॉ. संतोष मिश्रा ने उन्हें शव वाहन मुहैया कराते हुए करीब आठ सौ रुपये की मदद भी की।
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इमरजेंसी से लेकर वार्डों में दलालों का बोलबाला
जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक में एंबुलेंस, मेडिकल स्टोर सहित शव वाहन के दलाल मौजूद रहते हैं और डॉक्टर द्वारा रेेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस, मृतकों के घरवालों को शव वाहन के साथ साथ उनके द्वारा बाहर से लिखी जाने वाली दवाएं भी खरीदवाकर लाते हैं।
धड़ल्ले से लिखी जा रहीं बाहर की दवाएं
शासन ने भले ही बाहर से दवाएं लिखने पर रोक लगा रखी हो, लेकिन जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर मरीजों को बाहर की ही दवाएं लिख रहे। डॉक्टरों द्वारा हर मरीज को हजार से लेकर दो हजार रुपये तक की बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
मौत के बाद जागा अस्पताल प्रशासन, बनाया उड़नदस्ता
डायरिया पीड़ित युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर सतर्क हो गया है। सीएमएस ने इन पर अंकुश लगाने के लिए तीन सदस्यीय उड़न दस्ता गठित किया है, जिसमें मेट्रन रजनी मसीह, फार्मेसिस्ट डॉ. विमल सिंह सहित एक स्टाफ नर्स शामिल है। सीएमएस के अनुसार दस्ता किसी भी समय वार्ड का निरीक्षण करेगा, यदि उस दौरान वार्ड में कोई बाहरी व्यक्ति मिलता है तो उसे पुलिस के हवाले करने के साथ स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए लिखा जाएगा।
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मौत के बाद भी लगा दी ड्रिप
गुरुवार को जिला अस्पताल में भर्ती हुए डायरिया पीड़ित खीरी कस्बे के हनिया टोला निवासी युवक की मौत हो गई। घरवालों ने डॉक्टर और वार्ड के स्टाफ पर लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची यूपी 100 पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया और दूसरे दिन घरवालों के सुपुर्द कर दिया। मामले को देखते हुए सीएमएस ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। शहर के मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी जितेंद्र कश्यप ने बताया कि उसके मामा रामजगत (30) पुत्र रामबरन कई दिन से डायरिया से पीड़ित थे, हालत बिगड़ने पर उन्हें गुरुवार को जिला अस्पताल लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में इलाज शुरू करने के बाद मामा को आईसोलोशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। जितेंद्र के बताया कि ड्रिप लगाने के नाम पर पहले इमरजेंसी में सौ रुपये और फिर वार्ड में 120 रुपये लिए गए। उसने बताया कि अचानक ग्लूकोज चढ़ना बंद हो गया और जब वार्ड ब्वाय से देखने को कहा तो वह गुस्से मेें वीको निकालकर ही चले गए, लेकिन सूचना देने पर भी स्टाफ नर्स ने मरीज को देखना तक जरूरी नहीं समझा। जितेंद्र का कहना है कि वार्ड आए डॉक्टर ने रामजगत के ड्रिप लगा दी और यह तक नहीं देखा कि वह जिंदा हैं या मृत, जबकि डॉक्टर के आने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। लापरवाही बरते जाने से नाराज घरवालों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की सूचना पर पहुंची यूपी 100 ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया, लेकिन घरवालों के पीएम कराने से इनकार करने पर पुलिस ने शव घरवालों को दे दिया। घरवालों की लिखित शिकायत पर सीएमएस ने जांच कमेटी गठित की है।
म़ृतक के घरवालों ने अस्पताल स्टाफ पर जो आरोप लगाए हैं उसकी जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है, रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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डॉ.मनोज कुमार, सीएमएस
डॉक्टर व सीएमएस ने की आर्थिक मदद
आर्थिक स्थित ठीक ना होने की बात बताकर घरवालों ने जब शव ले जाने में असमर्थता जताई तो सीएमएस डॉ.मनोज कुमार और डॉ. संतोष मिश्रा ने उन्हें शव वाहन मुहैया कराते हुए करीब आठ सौ रुपये की मदद भी की।
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इमरजेंसी से लेकर वार्डों में दलालों का बोलबाला
जिला अस्पताल में इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक में एंबुलेंस, मेडिकल स्टोर सहित शव वाहन के दलाल मौजूद रहते हैं और डॉक्टर द्वारा रेेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस, मृतकों के घरवालों को शव वाहन के साथ साथ उनके द्वारा बाहर से लिखी जाने वाली दवाएं भी खरीदवाकर लाते हैं।
धड़ल्ले से लिखी जा रहीं बाहर की दवाएं
शासन ने भले ही बाहर से दवाएं लिखने पर रोक लगा रखी हो, लेकिन जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर मरीजों को बाहर की ही दवाएं लिख रहे। डॉक्टरों द्वारा हर मरीज को हजार से लेकर दो हजार रुपये तक की बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं।
मौत के बाद जागा अस्पताल प्रशासन, बनाया उड़नदस्ता
डायरिया पीड़ित युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर सतर्क हो गया है। सीएमएस ने इन पर अंकुश लगाने के लिए तीन सदस्यीय उड़न दस्ता गठित किया है, जिसमें मेट्रन रजनी मसीह, फार्मेसिस्ट डॉ. विमल सिंह सहित एक स्टाफ नर्स शामिल है। सीएमएस के अनुसार दस्ता किसी भी समय वार्ड का निरीक्षण करेगा, यदि उस दौरान वार्ड में कोई बाहरी व्यक्ति मिलता है तो उसे पुलिस के हवाले करने के साथ स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए लिखा जाएगा।