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गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ रहे डायरिया-बुखार के मरीज
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बच्चे का परीक्षण करते चिकित्सक।
पिछले 15 दिन में 48 बच्चे आईसीयू वार्ड में हुए भर्ती
इलाज के दौरान दो बच्चों की हो चुकी है मौत
लखीमपुर खीरी। भीषण गर्मी से हर आयु वर्ग के लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा बच्चों की हालत खराब है।
आलम यह है कि गर्मी की वजह से बच्चे उल्टी, दस्त और बुखार की चपेट में आने लगे हैं। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की निरंतर संख्या बढ़ रही है। इसमें सबसे ज्यादा मरीज उल्टी, दस्त, बुखार एवं बदहजमी की समस्या से परेशान हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग से लेकर इमरजेंसी में रोजाना उल्टी दस्त और बुखार पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें गंभीर स्थिति वाले बच्चों को आईसीयू वार्ड में भर्ती कर लिया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि बढ़ती गर्मी के कारण बच्चे बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से बचाने की जरूरत है। दिन में घर से निकलने पर धूप से बचने के लिए छाते का उपयोग करें, जिससे गर्मी से बचाव हो सके। उल्टी-दस्त शुरू होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं या फिर नीबू, चीनी व नमक का घोल दें। तीन-चार बार से ज्यादा दस्त आने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाकर दिखाएं या फिर जिला अस्पताल लेकर आएं।
स्कूल जाने वाले बच्चों की इस तरह करें देखरेख
1. स्कूल जाने से पहले बच्चों को नाश्ता कराकर और पानी पिलाकर भेजें।
2. बच्चों को स्कूल में भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहने के लिए प्रेरित करें।
3. बच्चों को नहलाएं जरूर, उन्हें घर के सबसे ठंडे हिस्से में रखें।
4. बच्चों को अनावश्यक धूप में जाने दें।
5. घर पर बना हल्का एवं पौष्टिक भोजन कराएं, बाजार की चीजों से दूर रखें।
डायरिया के लक्षण
1. बुखार के साथ बदहजमी की शिकायत होना
2. भूख न लगना, मिचली आना
3. कभी कभार उल्टी-दस्त की एक साथ समस्या होना
बचाव के उपाय
1- ओआरएस का घोल एवं नीबू की शिकंजी बनाकर पिलाएं
2- उल्टी दस्त के साथ बुखार होने पर पानी की भीगी पट्टी माथे पर रखें
3- तली-भुनी चीजों से पूरी तरह परहेज करें। बासी खाना या नाश्ते का प्रयोग न करें
जिन दो बच्चों की मौत हुई है उन्हें बेहद गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। घरवाले पहले आसपास के गांव आदि में इलाज कराते हैं और हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लेकर आते हैं। बेहतर इलाज कर जिंदगी बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन पहले से ही हालत गंभीर होने के कारण सुधार नहीं हो सका।
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- डॉ. संतोष कुमार मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी, जिला अस्पताल
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इलाज के दौरान दो बच्चों की हो चुकी है मौत
लखीमपुर खीरी। भीषण गर्मी से हर आयु वर्ग के लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा बच्चों की हालत खराब है।
आलम यह है कि गर्मी की वजह से बच्चे उल्टी, दस्त और बुखार की चपेट में आने लगे हैं। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की निरंतर संख्या बढ़ रही है। इसमें सबसे ज्यादा मरीज उल्टी, दस्त, बुखार एवं बदहजमी की समस्या से परेशान हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग से लेकर इमरजेंसी में रोजाना उल्टी दस्त और बुखार पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें गंभीर स्थिति वाले बच्चों को आईसीयू वार्ड में भर्ती कर लिया जा रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि बढ़ती गर्मी के कारण बच्चे बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों को गर्मी से बचाने की जरूरत है। दिन में घर से निकलने पर धूप से बचने के लिए छाते का उपयोग करें, जिससे गर्मी से बचाव हो सके। उल्टी-दस्त शुरू होने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं या फिर नीबू, चीनी व नमक का घोल दें। तीन-चार बार से ज्यादा दस्त आने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाकर दिखाएं या फिर जिला अस्पताल लेकर आएं।
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स्कूल जाने वाले बच्चों की इस तरह करें देखरेख
1. स्कूल जाने से पहले बच्चों को नाश्ता कराकर और पानी पिलाकर भेजें।
2. बच्चों को स्कूल में भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहने के लिए प्रेरित करें।
3. बच्चों को नहलाएं जरूर, उन्हें घर के सबसे ठंडे हिस्से में रखें।
4. बच्चों को अनावश्यक धूप में जाने दें।
5. घर पर बना हल्का एवं पौष्टिक भोजन कराएं, बाजार की चीजों से दूर रखें।
डायरिया के लक्षण
1. बुखार के साथ बदहजमी की शिकायत होना
2. भूख न लगना, मिचली आना
3. कभी कभार उल्टी-दस्त की एक साथ समस्या होना
बचाव के उपाय
1- ओआरएस का घोल एवं नीबू की शिकंजी बनाकर पिलाएं
2- उल्टी दस्त के साथ बुखार होने पर पानी की भीगी पट्टी माथे पर रखें
3- तली-भुनी चीजों से पूरी तरह परहेज करें। बासी खाना या नाश्ते का प्रयोग न करें
जिन दो बच्चों की मौत हुई है उन्हें बेहद गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। घरवाले पहले आसपास के गांव आदि में इलाज कराते हैं और हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लेकर आते हैं। बेहतर इलाज कर जिंदगी बचाने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन पहले से ही हालत गंभीर होने के कारण सुधार नहीं हो सका।
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- डॉ. संतोष कुमार मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी, जिला अस्पताल