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श्रद्धा से मनाई गई देवोत्थानी एकादशी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 11 Nov 2016 10:22 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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कई स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
जिले भर में देवोत्थानी एकादशी श्रद्धा से मनाई गई। महिलाओं ने घर में रंगोली और वेदी बनाकर गन्ने की छांव में फल फूल, रोली, चंदन, सिंघाड़ों, फल, पकवान और गन्ना आदि अर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने उपवास रखकर देवोत्थानी एकादशी पर तुलसी पूजा भी की।
देवोत्थानी एकादशी की पूजा में गन्ने का इस्तेमाल होने के कारण शहर में जगह-जगह पर गन्ने बिके। त्योहार के कारण गन्ने की मांग ज्यादा होने के कारण एक गन्ना पांच से 10 रुपये तक बिका। महिलाओं ने तुलसी पूजा कर अपने परिवार के सुख समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की। देवोत्थानी एकादशी के चलते शहर भक्ति से सराबोर दिखा।
बांकेगंज। देवोत्थानी एकादशी श्रद्धा और धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर महिलाओं ने घर में वेदी बनाकर गन्ने की छांव में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि कामना की। महिलाओं ने तुलसी पूजा भी की।
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गोला गोकर्णनाथ। देवोत्थान एकादशी पर भक्तों ने भगवान विष्णु जी का पूजन किया एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के उठने से शादी आदि मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाती है। महिलाओं ने तुलसी जी का भगवान सालिग्राम से साथ विवाह कराया। एकादशी के दिन से लगातार पांच दिनों तक भीष्म पितामह ने पांडवों को राजनीति का उपदेश दिया था।
ग्रामीण अंचलों में श्रद्धालुओं ने चौक पर गन्ने रखकर दीपक जलाकर भगवान का पूजन अर्चन कर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की है। महिलाओं ने घरों में तुलसी जी का विवाह श्री सालिग्राम भगवान से कराते हुए विवाह गीत गाए- मगन भई तुलसी राम गुन गाइके, मगन भई तुलसी राम गुन गाइके, भक्त चले पइया पइया, चींटी को बचाए के, मगन भई तुलसी राम गुन गाइके।। महिलाओं ने माता तुलसी जी का श्रृंगार भी किया। पूजन के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
पलियाकलां। एकादशी पर घरों में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की गई। महिलाओं ने व्रत रखने के साथ ही गन्ना आदि की पूजा करने के साथ ही फलहार व्रत रखा।
नारदपुराण के अनुसार एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को बेहद प्रिय होता है। जिस तरह चतुर्थी को गणेश जी, त्रयोदशी को शिवजी, पंचमी को लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है उसी प्रकार एकादशी तिथि को भगवान श्री हरि विष्णु जी की पूजा की जाती है। एकादशी व्रत के लिए दशमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की आराधना कर पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात को भगवान विष्णु की श्रद्धाभाव से आराधना करनी चाहिए। इसी को लेकर शहर सहित पूरे क्षेत्र में महिलाओं ने एकादशी की पूजा की। घरों में गन्ना आदि लाकर विधिविधान से पूजन अर्चन किया।
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जिले भर में देवोत्थानी एकादशी श्रद्धा से मनाई गई। महिलाओं ने घर में रंगोली और वेदी बनाकर गन्ने की छांव में फल फूल, रोली, चंदन, सिंघाड़ों, फल, पकवान और गन्ना आदि अर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने उपवास रखकर देवोत्थानी एकादशी पर तुलसी पूजा भी की।
देवोत्थानी एकादशी की पूजा में गन्ने का इस्तेमाल होने के कारण शहर में जगह-जगह पर गन्ने बिके। त्योहार के कारण गन्ने की मांग ज्यादा होने के कारण एक गन्ना पांच से 10 रुपये तक बिका। महिलाओं ने तुलसी पूजा कर अपने परिवार के सुख समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की। देवोत्थानी एकादशी के चलते शहर भक्ति से सराबोर दिखा।
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बांकेगंज। देवोत्थानी एकादशी श्रद्धा और धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर महिलाओं ने घर में वेदी बनाकर गन्ने की छांव में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि कामना की। महिलाओं ने तुलसी पूजा भी की।
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गोला गोकर्णनाथ। देवोत्थान एकादशी पर भक्तों ने भगवान विष्णु जी का पूजन किया एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के उठने से शादी आदि मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाती है। महिलाओं ने तुलसी जी का भगवान सालिग्राम से साथ विवाह कराया। एकादशी के दिन से लगातार पांच दिनों तक भीष्म पितामह ने पांडवों को राजनीति का उपदेश दिया था।
ग्रामीण अंचलों में श्रद्धालुओं ने चौक पर गन्ने रखकर दीपक जलाकर भगवान का पूजन अर्चन कर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की है। महिलाओं ने घरों में तुलसी जी का विवाह श्री सालिग्राम भगवान से कराते हुए विवाह गीत गाए- मगन भई तुलसी राम गुन गाइके, मगन भई तुलसी राम गुन गाइके, भक्त चले पइया पइया, चींटी को बचाए के, मगन भई तुलसी राम गुन गाइके।। महिलाओं ने माता तुलसी जी का श्रृंगार भी किया। पूजन के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
पलियाकलां। एकादशी पर घरों में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की गई। महिलाओं ने व्रत रखने के साथ ही गन्ना आदि की पूजा करने के साथ ही फलहार व्रत रखा।
नारदपुराण के अनुसार एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को बेहद प्रिय होता है। जिस तरह चतुर्थी को गणेश जी, त्रयोदशी को शिवजी, पंचमी को लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है उसी प्रकार एकादशी तिथि को भगवान श्री हरि विष्णु जी की पूजा की जाती है। एकादशी व्रत के लिए दशमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की आराधना कर पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात को भगवान विष्णु की श्रद्धाभाव से आराधना करनी चाहिए। इसी को लेकर शहर सहित पूरे क्षेत्र में महिलाओं ने एकादशी की पूजा की। घरों में गन्ना आदि लाकर विधिविधान से पूजन अर्चन किया।