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संक्रामक रोगों का कहर भी: 15 दिन में बुखार से पीड़ित 38 बच्चे भर्ती, पांच की मौत

Wed, 16 Sep 2020 12:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 12:30 AM IST
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death,spread of infectious diseases
चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमणकाल में संक्रामक बीमारियों ने भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। इससे जिला और निजी अस्पतालों में पीड़ितों की भीड़ उमड़ रही है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बुखार पीड़ितों की हैं। पिछले 15 दिनों में जिला अस्पताल में ही बुखार से पीड़ित 38 बच्चे भर्ती हुए, जिसमें पांच की इलाज के दौरान मौत हो गई। भर्ती होने वाले बच्चों में 13 एईएस और दो बच्चे जेई संक्रमित मिले।
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संक्रामक बीमारियों का मुख्य कारण गंदगी और जलभराव है। शहर हो या फिर गांव, साफ सफाई और पानी जमा होने की समस्या हर जगह एक ही जैसी है। न तो इस ओर नगर पालिका के जिम्मेदार ध्यान देते हैं और न ही गांव के प्रधान। इसी का परिणाम है कि कोरोनाकाल में संक्रामक बीमारियों ने भी अपने पांव तेजी से पसारने शुरू कर दिए हैं। जलभराव होने से मच्छर पनपते हैं, जो बीमारियों का कारण बनते हैं। इसी का नतीजा है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते एक से 15 सितंबर तक बुखार से पीड़ित भर्ती होने वाले 38 बच्चों में से पांच बच्चे असमय मौत के मुंह में समा गए।
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बुखार पीड़ित दो बच्चे भर्ती
बुखार आने पर चिल्ड्रन वार्ड में हरगावं निवासी खगेश्वर तीन माह की बेटी बेबी और बरखेरवा निवासी रामगोपाल 12 साल की पुत्री अंशिका को लेकर जिला अस्पताल आए। हालत गंभीर होने पर दोनो को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया।
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जिला अस्पताल
15 दिन में चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती हुए बच्चे-38
बुखार पीड़ित बच्चों की हुई मौत- पांच
आईसीयू वार्ड भर्ती हुए बच्चे-17
जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस )- दो
एईएस ( एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम)-13
स्क्रब टायफस- एक
बच्ची की मौत के बावजूद नहीं चेते अधिकारी..गांव में गंदगी का अंबार
गुलरिया। पड़रिया तुला में बुखार पीड़ित किशोरी की मौत होने के बावजूद न तो स्थानीय जिम्मेदार चेते और न ही जिला प्रशासन। जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह है कि गांव के गलियारों में पानी भरा है और जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे हैं। ये हालात तब है जब जिले में पिछले माह संक्रामक रोग नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जा चुका है और कोरोनाकाल भी चल रहा है। गांव निवासी 12 साल की नंदिनी को बुुखार आने पर घरवालों ने कस्बे से लेकर जिला मुख्यालय तक पर दिखाया, लेकिन फायदा न होने पर मेडिकल कॉलेज लखनऊ लेकर गए। मगर, कुछ दिन इलाज चलने के बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने दिमागी बुखार बताया था।
जिम्मेदार कर रहे सूचना मिलने का इंतजार
सीएचसी बिजुआ प्रभारी डॉ. अमित सिंह का कहना है कि यदि नंदिनी की मौत दिमागी बुखार से हुई होती तो मेडिकल कॉलेज से सूचना मिलती। मगर, अब तक तो सूचना मिली नहीं। कई बार मिलते जुलते लक्षणों से भी मौत हो जाती है। जानकारी मिली है जल्द ही गांव टीम भेजकर क्लोरीन गोली का वितरण कराने के साथ ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा, जिससे संक्रामक रोग का फैलाव रोका जा सके।
आता नहीं सफाई कर्मी तो कैसे हो सफाई
प्रधान पति विजय सिंह का कहना है कि सफाई कर्मचारी प्रमोद कुमार बेहजम का रहने वाला है और कभी कभार ही आता है। खुद सफाई न करके कुछ लोगों से सफाई करवाता है। आज तक उसे किसी ने सफाई करते नहीं देखा। जबकि इसके बारे में अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। फिलहाल फॉगिंग मशीन खरीदी है, जिससे छिड़काव कराया जाता है। जल्द ही पड़रिया तुला में भी फॉगिंग होगी।

संक्रामक बीमारियों का मुख्य कारण गंदगी और जलभराव है। इसलिए सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए, खासकर बच्चों के मामलों में। घर और इसके आस पास पानी न जमा होने दें। बुखार आने पर गांव में इधर उधर इलाज न कराकर सरकारी अस्पताल आकर दिखाएं।
-डॉ. आईबी त्रिपाठी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल
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