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कोराना काल: रावण के पुतले का छोटा रहेगा कद
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रावण दहन (फाइल फोटो)
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। कोरोना के कारण इस बार न तो सार्वजनिक रूप से रामलीला का मंचन हो रहा है और न ही रावण का लंबा चौड़ा पुतला बनाकर ही जलाया जाएगा। दशहरा पर सोमवार को रामलीला मंचन की तरह सिर्फ रावण का पुतला भी मथुरा भवन में ही जलेगा। धार्मिक आयोजन को लेकर शासन ने जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उसको लेकर जिले के तमाम आयोजकों ने रामलीला कराने से हाथ खड़े कर दिए। मगर, परंपरा निभाने के लिए शहर की रामलीला चारदीवारी तक ही सीमित होकर रह गई।
शासन ने रामलीला को लेकर जो गाइड लाइन जारी की थी, उसके अनुसार धार्मिक आयोजन में सिर्फ 100 लोगों के शामिल होने की अनुमति थी। इसलिए जिले के तमाम आयोजकों ने मेला कराने से ही हाथ जोड़ लिए। आयोजकों का कहना था कि सार्वजनिक रूप से मेला कराकर दर्शकों की संख्या निर्धारित सीमा में रख पाना संभव नहीं है। यही कारण है कि इस बार आयोजकों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए रामलीला मथुरा भवन ही में कराना मुनासिब समझा। हालांकि आयोजन समिति मेला का लाइव प्रसारण फेसबुक पर करा रही है। आयोजन समिति के लोगों का कहना है कि रामलीला की तरह ही राम रावण युद्ध भी मथुरा भवन में होगा और पुतला भी वहीं जलेगा, लेकिन इस बार रावण का पुतला मात्र आठ से दस फुट का ही होगा।
- रामलीला मेले का पूरे साल इंतजार रहता था, लेकिन कोरोना के कारण इस बार देखने तक को नहीं मिला।
- अभिषेक दीक्षित
रामलीला मेला शहर की एतिहासिक धरोहर है। इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे, लेकिन इस बार लोगों की ख्वाहिश अधूर रह गई।
- दिनेश मिश्रा
मेले को लेकर बच्चे उत्साहित रहते थे। मगर, इस बार बच्चों के साथ मेला भी मथुरा भवन तक ही सीमित रहा।
- ऋतुराज बाजपेई
गाइड लाइन का पालन कर मेला मैदान में रामलीला कराना संभव नहीं था। इसलिए मथुरा भवन में मेला कराकर फेसबुक द्वारा दिखाया जा रहा है। इस बार सिर्फ रावण का प्रतीकात्मक पुतला बनाकर मथुरा भवन में जलाया जाएगा।
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- विपुल सेठ
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धौरहरा और ईसानगर में दशहरा पर पुतला दहन नहीं होगा
धौरहरा। ईसानगर में राजा राजेंद्र प्रताप सिंह सिर्फ दशहरा परंपरा को मनाते हुए शस्त्र पूजन कर सांकेतिक दशहरा बनाएंगे। वहीं कस्बे में लगने वाला दशहरा मेला नहीं लगेगा। आयोजक रमाशंकर शुक्ला ने बताया कि इस बार कोरोना की वजह से रामचरित मानस पाठ होगा। साथ ही असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव शस्त्र पूजन के साथ मनाया जाएगा। रावण का पुतला दहन नहीं होगा। संवाद
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शासन ने रामलीला को लेकर जो गाइड लाइन जारी की थी, उसके अनुसार धार्मिक आयोजन में सिर्फ 100 लोगों के शामिल होने की अनुमति थी। इसलिए जिले के तमाम आयोजकों ने मेला कराने से ही हाथ जोड़ लिए। आयोजकों का कहना था कि सार्वजनिक रूप से मेला कराकर दर्शकों की संख्या निर्धारित सीमा में रख पाना संभव नहीं है। यही कारण है कि इस बार आयोजकों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए रामलीला मथुरा भवन ही में कराना मुनासिब समझा। हालांकि आयोजन समिति मेला का लाइव प्रसारण फेसबुक पर करा रही है। आयोजन समिति के लोगों का कहना है कि रामलीला की तरह ही राम रावण युद्ध भी मथुरा भवन में होगा और पुतला भी वहीं जलेगा, लेकिन इस बार रावण का पुतला मात्र आठ से दस फुट का ही होगा।
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- रामलीला मेले का पूरे साल इंतजार रहता था, लेकिन कोरोना के कारण इस बार देखने तक को नहीं मिला।
- अभिषेक दीक्षित
रामलीला मेला शहर की एतिहासिक धरोहर है। इसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे, लेकिन इस बार लोगों की ख्वाहिश अधूर रह गई।
- दिनेश मिश्रा
मेले को लेकर बच्चे उत्साहित रहते थे। मगर, इस बार बच्चों के साथ मेला भी मथुरा भवन तक ही सीमित रहा।
- ऋतुराज बाजपेई
गाइड लाइन का पालन कर मेला मैदान में रामलीला कराना संभव नहीं था। इसलिए मथुरा भवन में मेला कराकर फेसबुक द्वारा दिखाया जा रहा है। इस बार सिर्फ रावण का प्रतीकात्मक पुतला बनाकर मथुरा भवन में जलाया जाएगा।
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- विपुल सेठ
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धौरहरा और ईसानगर में दशहरा पर पुतला दहन नहीं होगा
धौरहरा। ईसानगर में राजा राजेंद्र प्रताप सिंह सिर्फ दशहरा परंपरा को मनाते हुए शस्त्र पूजन कर सांकेतिक दशहरा बनाएंगे। वहीं कस्बे में लगने वाला दशहरा मेला नहीं लगेगा। आयोजक रमाशंकर शुक्ला ने बताया कि इस बार कोरोना की वजह से रामचरित मानस पाठ होगा। साथ ही असत्य पर सत्य की विजय का उत्सव शस्त्र पूजन के साथ मनाया जाएगा। रावण का पुतला दहन नहीं होगा। संवाद