Lakhimpur Kheri News: जोखिम में जान... साइकिल कंधे पर रखकर टूटे पुल से निकलते हैं लोग
लखीमपुर खीरी जिले में अधूरे और टूटे पुल व पुलिया हादसे का सबब बन सकते हैं। इन पर न अवरोधक है और न ही संकेतक लगे हैं। जिम्मेदार भी इससे अनजान हैं।
विस्तार
लखीमपुर खीरी जिले में एक पुल ऐसा भी है, जहां से लोग जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। यह वर्षों से टूटा पड़ा है। सैकड़ों छात्र-छात्राएं और ग्रामीण साइकिल कंधे पर रखकर टूटे पुल के बचे हुए हिस्से से निकलते हैं। चार दिन पहले ही बदायूं में अधूरे पुल के चलते हुए हादसे के बाद भी जिम्मेदारों का गंभीर न होना चिंता का विषय है।
ब्लॉक फूलबेहड़ इलाके के बड़ागांव बसहा के पास स्थित पुल काफी समय से जर्जर है। दो दर्जन गांव के सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन इधर से होता है। ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। अगर इस रास्ते को ग्रामीण नहीं चुनते हैं तो दूसरे रास्तों से कई घंटों का सफर तय करना पड़ता है।
बीते पांच वर्षों से जर्जर है पुलिया
मझगईं क्षेत्र के छेदुई गांव से सिसवारा मार्ग पर स्थित टूटी पुलिया पर ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर खुद ही रास्ता बनाया है। ग्रामीणों को छेदुई गांव से सिसवारा मार्ग पर आने-जाने में परेशानी हो रही है। मुन्नापुरवा से दौलतपुरा जाने वाले मार्ग पर रपटा पुलिया बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई है, इसका हाल भी नहीं लिया गया।
यहां कई बार ग्रामीणों के साथ दुर्घटना हो चुकी है। इस रास्ते से मोतीपुरवा, मुन्नापुरवा, सेमरिया, भानपुरवा, हक्क्लपुर, बोटनपुरवा, छेदुई, कोरियाना, सुरजी पुरवा आदि गांवों के लोग निकलते हैं। ग्रामीण अवधेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2019 में ग्राम प्रधान निधि से पुलिया निर्माण कराया गया था। ग्रामीण महावीर गौतम का कहना है कि काफी अर्से से यह रपटा पुल जर्जर है।
बड़ागांव बसहा के ग्रामीण राजेश वर्मा, अजय पटेल, कल्लू, रानी देवी, मुन्नन खान, चेतराम पासी, रमेश, राम खिलावन आदि लोगों ने बताया कि 1986 में यह पुल बना था। बाढ़ की वजह से टूट गया। इन लोगों ने बताया कि अभिभावक अपने बच्चों को सुबह इस पुल से साइकिल टांग कर निकाल देते हैं। छुट्टी के वक्त फिर यहां आ जाते हैं बच्चों को सुरक्षित घर ले जाते हैं।
27 वर्षों से अधूरा 25 गांवों को जोड़ने वाला सुजईकुंडा सेतु
धौरहरा और सुजईकुंडा के बीच बना पुल 27 वर्षों से अधूरा है। ग्रामीणों ने कारसेवा कर पुल के किनारे पाटकर रास्ता बनाया, लेकिन यह रास्ता भी बाढ़ में बह गया। अधूरे पुल के पास नाले से सुजईकुंडा, पंडित पुरवा, बिंजहा, भटपुरवा सहित करीब 25 गांवों के हजारों लोग गुजरते हैं। पुल न बनने से इस जगह पर कई हादसे हो चुके हैं। सुजईकुंड़ा गांव निवासी शशांक शुक्ला, सभ्रांत शुक्ला, राजेश कुमार, अमन, गुड्डू, इस्माइल, जाबिर अली आदि बताते हैं कि नेता हर चुनाव में वादे करते हैं, लेकिन बाद में मुकर जाते हैं। विधायक धौरहरा विनोद शंकर अवस्थी ने बताया कि जो पुल अधूरा पड़ा है, वह निष्प्रयोज्य है नया पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर नवनिर्माण होगा।
कस्ता-सीतापुर रोड से पचदेवरा जाने वाले लिंक मार्ग पर लखीमपुर-सीतापुर रजबहा की एक साल से टूटी पड़ी पुलिया किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। इसी पुलिया से होकर क्षेत्र के ओड़हरा, धनपुर, पचदेवरा, दतेली आदि कई गांव के किसान ट्राॅली भर गन्ना लेकर निकलते थे, लेकिन पुलिया टूटी होने की वजह से दो से तीन किमी का फेर करना पड़ रहा है। कई बार किसानों ने नहर विभाग, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पुलिया बनवाने की मांग की, लेकिन हुआ कुछ नहीं। संवाद
सीडीओ अभिषेक कुमार ने बताया कि फूलबेहड़ क्षेत्र के अधूरे पड़े पुल को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। मिट्टी आदि डलवाकर पुल से निकलने का रास्ता बनाया जाएगा। इसके लिए काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा पूरे जिले के जर्जर पुल, पुलिया, रपटा पुलों को दिखवाकर जल्द दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे।