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पापा की कमी का न हो अहसास...
अमर उजाला ब्यूरो-बिजुआ/भीरा।
Updated Mon, 11 Jul 2016 11:55 PM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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- बड़े भाइयों ने अरमानों से किया था अंकुर का ब्याह
- पांच भाइयों में अंकुर था चौथे नंबर का
- पढ़ाई पूरी कर करने लगा था कामधंधा
पांच भाइयों में अंकुर ही था, जो अपनों से दूर परदेस में रहता था, बाकी चारों भाई भीरा में ही रहते थे। बीफार्मा करने के बाद अंकुर ने पहले प्राइवेट जॉब की, बाद में खुद का ही मेडिकल स्टोर गुड़गांव में कर लिया था। पापा की 16 साल पहले मौत के बाद मुखिया मां थी, लेकिन बड़े भाई नीरज और दीपक परिवार में पिता का फर्ज निभाते थे। भाइयों ने इस बात का खास ध्यान रखा कि अंकुर को यह न लगे कि पापा होते तो इससे बेहतर होता? पापा की कमी तो नहीं पूरी हो सकती थी, लेकिन भाइयों ने बड़े अरमानों अंकुर के सिर पर सेहरा बांधा था।
भीरा के सबसे अच्छे रिजार्ट में शादी का इंतजाम था, पत्नी पूजा के परिवार वाले शादी से एक दिन पहले आ गए थे। पूजा की बड़ी बहन एवं दीपक की पत्नी दोनों ओर से इंतजाम देख रहीं थीं। नौ जुलाई शनिवार को रिश्तेदार एवं पूजा के परिवार के लोग चले गए। अंकुर के भाई दीपक ने रविवार रात को अंकुर और पूजा के गुड़गांव निकलने से पहले कई बार रोका, कहा बात मान जा, कल चले जाना। तीन दिन से तू सोया नही है यार। दीपक की बात सुनकर अंकुर ने तसल्ली दी, कहा कि भैया अगर कहीं नींद आएगी तो ढाबे पर रोककर रेस्ट कर लेंगे। अब जाने दो, पांच दिन से काम बंद है। मां, भाभी और भाइयों से दुआएं लेकर निकले इस जोड़े को नही पता था कि उनकी जिंदगी का सफर इसके साथ ही खत्म हो जाएगा। रात के तीसरे पहर दीपक का फोन बज उठा। हादसे की खबर अंकुर के बहनोई ने दी। घर में जिसने सुना सुन्न रह गया। बच्चों से पूरी बात छिपाई गई, भाई किसी तरह फैसला ही नहीं कर पा रहे थे कि यह खबर मां को कैसे बताएं।
दुल्हन के हाथों की मेंहदी से भी गाढ़ा हो गया खून
पूजा के हाथों पर अभी दो दिन पहले ही तो अंकुर के नाम की मेंहदी लगी थी, शादी के रोज दोनों ने सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया था। हादसे में पूजा के हाथों पर लगी मेंहदी खून से और लाल हो गई।
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- पांच भाइयों में अंकुर था चौथे नंबर का
- पढ़ाई पूरी कर करने लगा था कामधंधा
पांच भाइयों में अंकुर ही था, जो अपनों से दूर परदेस में रहता था, बाकी चारों भाई भीरा में ही रहते थे। बीफार्मा करने के बाद अंकुर ने पहले प्राइवेट जॉब की, बाद में खुद का ही मेडिकल स्टोर गुड़गांव में कर लिया था। पापा की 16 साल पहले मौत के बाद मुखिया मां थी, लेकिन बड़े भाई नीरज और दीपक परिवार में पिता का फर्ज निभाते थे। भाइयों ने इस बात का खास ध्यान रखा कि अंकुर को यह न लगे कि पापा होते तो इससे बेहतर होता? पापा की कमी तो नहीं पूरी हो सकती थी, लेकिन भाइयों ने बड़े अरमानों अंकुर के सिर पर सेहरा बांधा था।
भीरा के सबसे अच्छे रिजार्ट में शादी का इंतजाम था, पत्नी पूजा के परिवार वाले शादी से एक दिन पहले आ गए थे। पूजा की बड़ी बहन एवं दीपक की पत्नी दोनों ओर से इंतजाम देख रहीं थीं। नौ जुलाई शनिवार को रिश्तेदार एवं पूजा के परिवार के लोग चले गए। अंकुर के भाई दीपक ने रविवार रात को अंकुर और पूजा के गुड़गांव निकलने से पहले कई बार रोका, कहा बात मान जा, कल चले जाना। तीन दिन से तू सोया नही है यार। दीपक की बात सुनकर अंकुर ने तसल्ली दी, कहा कि भैया अगर कहीं नींद आएगी तो ढाबे पर रोककर रेस्ट कर लेंगे। अब जाने दो, पांच दिन से काम बंद है। मां, भाभी और भाइयों से दुआएं लेकर निकले इस जोड़े को नही पता था कि उनकी जिंदगी का सफर इसके साथ ही खत्म हो जाएगा। रात के तीसरे पहर दीपक का फोन बज उठा। हादसे की खबर अंकुर के बहनोई ने दी। घर में जिसने सुना सुन्न रह गया। बच्चों से पूरी बात छिपाई गई, भाई किसी तरह फैसला ही नहीं कर पा रहे थे कि यह खबर मां को कैसे बताएं।
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दुल्हन के हाथों की मेंहदी से भी गाढ़ा हो गया खून
पूजा के हाथों पर अभी दो दिन पहले ही तो अंकुर के नाम की मेंहदी लगी थी, शादी के रोज दोनों ने सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया था। हादसे में पूजा के हाथों पर लगी मेंहदी खून से और लाल हो गई।
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