फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   cultural

मनौती पूरी होने पर चढ़ता है झाड़ू और नमक का चढ़ावा

Fri, 22 Jul 2022 02:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jul 2022 02:42 AM IST
विज्ञापन
cultural
मोहम्मदी। जिले में महाभारत काल के कई ऐतिहासिक और पौराणिक शिव मंदिर है। ऐसे ही मंदिरों में एक है पालननाथ शिव मंदिर। ऐतिहासिक गांव बढ़खर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित इस प्राचीन मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान कराया था। मंदिर की विशेषता यह है कि यहां मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु झाड़ू, नमक और बैंगन का चढ़ावा चढ़ाते हैं।
विज्ञापन

मंदिर का निर्माण छाटी लखौरी ईटों से कराया गया है। मंदिर का जीर्णोद्घार वर्ष 2000 में श्रद्धालुओं ने आपसी सहयोग से मिलकर कराया था। पाल गांव में मंदिर होने के कारण इसका नाम पालननाथ शिव मंदिर पड़ा है। यहां से करीब पांच किमी दूर बड़खर गांव है। कहा जाता है कि बड़खर कभी महाभारत काल के राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था। पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद यहीं पर एक वर्ष का अज्ञातवास बिताया था। बड़खर गांव और उसके आसपास आज भी ऐसे प्रमाण मिलते हैं, जिससे इसके राजा विराट की नगरी होने की पुष्टि होती है। महाभारत काल के बने मंदिर, तालाब, पोखर और दूर दूर तक फैले खंडहर और टीले यहां आज भी यहां मौजूद है। कहते हैं कि कभी विराटनगर रहे इस नगर का नाम बिगड़कर बड़खर हो गया।
विज्ञापन

मोहम्मदी बरवर मार्ग पर चार किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन मंदिर मनौतियां पूरी होने के लिए जाना जाता है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां शिवलिंग स्थापित किया और राजा विराट ने भव्य मंदिर का निर्माण कराया। काल के थपेड़ों से मंदिर के जर्जर हो जाने के बाद स्थानीय लोगों ने पालननाथ मंदिर का पुनर्निमाण कराया। यहां एक प्राचीन कुआं आज ही मौजूद है। हालांकि अतिक्रमण के कारण उसका वजूद खत्म हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंदिर के पुजारी प्रमोद गिरी बताते हैं कि पहले उनके पिता यहां पूजा अर्चना करते थे। उनके निधन के बाद वह मंदिर की देखरेख और पूजा अर्चना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह कहते हैं मंदिर के गर्भगृह का जीर्णोद्धार वर्ष 2000 में मोहम्मदी के ओमकार पुरी ने कराया था। मान्यता है कि किसी के पशु के बीमार होने पर लोग मंदिर के ताक पर नमक रख जाते हैं। अगले दिन यही नमक बीमार पशु को खिलाने से पशु ठीक हो जाता है। मान्यता है कि यहां मनौती मानने से मस्से भी ठीक हो जाते हैं। मनौती पूरी होने पर यहां नमक, झाड़ू और बैंगन का चढ़ावा चढ़ाने की प्रथा है।

यहां साल की सभी अमावस्या पर भक्तों की भीड़ जुटती है लेकिन सावन के महीने के हर सोमवार को तो मेले जैसा माहौल रहता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्घालु यहां आकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed