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तेजस्वी जीवन जीने की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति
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नसीरुद्दीन मौजी मैदान पर हुई गोष्ठी, हुआ व्याख्यान
लखीमपुर खीरी। मकर संक्रांति को लेकर मंगलवार को नसीरुद्दीन मौजी मैदान पर इतिहास संकलन समिति की गोष्ठी हुई। विभाग प्रमुख राजेश दीक्षित ने मकर संक्रांति को तेजस्वी जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला बताया। कहा कि इस दिन से रात्रि का विस्तार रुकता है और दिन की समय सीमा, तापमान में वृद्धि होती है। सूर्य देवता कर्क से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इससे समाज की शीत निष्क्रियता खत्म होती है। सूर्य की समय सीमा, ऊर्जा, ऊष्मा का विस्तार होता है। राजेश दीक्षित ने कहा कि यह पर्व हमारी वैचारिक प्रखरता, आध्यात्मिक, समाजिक-समरसता का सूचक है। यह चेतना का जागृति पर्व है। इसमें तिल, गुड़ एवं तेल से बने लड्डुओं और कतलियों का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि तिल ऊष्मा, गुड़ मिठास एवं तेल तरलता का प्रतीक है। यह हमें अपने स्वभाव में मिठास, केवल ज्ञान से उत्पन्न दंभ और अहंकार की शुष्कता को त्यागकर भावनाओं, संवेदनाओं में सरसता लाने का संदेश देता है। मकर संक्रांति पर उड़ने वाली रंग बिरंगी पतंगे हमें देश की सांस्कृतिक विविधता में एकात्मकता तलाश करने का संदेश देती हैं। पतंगें हमें संदेश देती हैं कि हम भले ही ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं। मगर, जमीन से हमारा रिश्ता नहीं टूटना चाहिए अर्थात हम अपनी पहचान और सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती से जुड़े रहें। गोष्ठी में समिति के कई लोग मौजूद रहे।
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लखीमपुर खीरी। मकर संक्रांति को लेकर मंगलवार को नसीरुद्दीन मौजी मैदान पर इतिहास संकलन समिति की गोष्ठी हुई। विभाग प्रमुख राजेश दीक्षित ने मकर संक्रांति को तेजस्वी जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला बताया। कहा कि इस दिन से रात्रि का विस्तार रुकता है और दिन की समय सीमा, तापमान में वृद्धि होती है। सूर्य देवता कर्क से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इससे समाज की शीत निष्क्रियता खत्म होती है। सूर्य की समय सीमा, ऊर्जा, ऊष्मा का विस्तार होता है। राजेश दीक्षित ने कहा कि यह पर्व हमारी वैचारिक प्रखरता, आध्यात्मिक, समाजिक-समरसता का सूचक है। यह चेतना का जागृति पर्व है। इसमें तिल, गुड़ एवं तेल से बने लड्डुओं और कतलियों का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि तिल ऊष्मा, गुड़ मिठास एवं तेल तरलता का प्रतीक है। यह हमें अपने स्वभाव में मिठास, केवल ज्ञान से उत्पन्न दंभ और अहंकार की शुष्कता को त्यागकर भावनाओं, संवेदनाओं में सरसता लाने का संदेश देता है। मकर संक्रांति पर उड़ने वाली रंग बिरंगी पतंगे हमें देश की सांस्कृतिक विविधता में एकात्मकता तलाश करने का संदेश देती हैं। पतंगें हमें संदेश देती हैं कि हम भले ही ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं। मगर, जमीन से हमारा रिश्ता नहीं टूटना चाहिए अर्थात हम अपनी पहचान और सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती से जुड़े रहें। गोष्ठी में समिति के कई लोग मौजूद रहे।