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सुंदरकांड की पांडुलिपि धौरहरा ले जाने का ग्रामीणों ने किया विरोध
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निघासन। गांव दुलही में रखी तुलसीदास हस्तलिखित सुंदरकांड की पांडुलिपि को धौरहरा के रामवटी ले जाने का ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था पांडुलिपि को चार सौ साल से संजोकर दुलही में रखा गया है। ग्रामीण सांसद अजय मिश्र टेनी से मिले और पांडुलिपि को धौरहरा ले जाने के बजाए दुलही में ही रखे रहने का आग्रह किया। सांसद ने तहसीलदार धौरहरा से दुलही में ही पांडुलिपि रखने को कहा। तहसीलदार ने भी इस पर हामी भर दी।
दुलही निवासी वीरेंद्र शुक्ला, संतोष आदि ने बताया कि करीब चार सौ साल पहले गोस्वामी तुलसीदास के हाथों की लिखी सुंदरकांड की पांडुलिपि गांव के ही जागेश्वर दयाल के यहां संजोकर रखी हुई है। गांव के अलावा पूरे क्षेत्र के लोग उसकी पूजा पाठ करते हैं। धौरहरा तहसीलदार ने जागेश्वर दयाल को एक नोटिस दी कि वह पांडुलिपि लेकर तहसील आ जाएं। उसे धौरहरा स्थित रामवटी के स्थान पर बालकांड की पांडुलिपियों के साथ रखा जाएगा। ग्रामीणों ने नोटिस मिलने का विरोध करते हुए सांसद अजय मिश्र टेनी से मुलाकात की। टेनी ने पूर्वजों के समय से रखी गई पांडुलिपि को गांव में ही रखे रहने के लिए तहसीलदार से कहा। इस पर तहसीलदार ने उसे दुलही में ही रखे रहने का आश्वासन दिया।
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दुलही निवासी वीरेंद्र शुक्ला, संतोष आदि ने बताया कि करीब चार सौ साल पहले गोस्वामी तुलसीदास के हाथों की लिखी सुंदरकांड की पांडुलिपि गांव के ही जागेश्वर दयाल के यहां संजोकर रखी हुई है। गांव के अलावा पूरे क्षेत्र के लोग उसकी पूजा पाठ करते हैं। धौरहरा तहसीलदार ने जागेश्वर दयाल को एक नोटिस दी कि वह पांडुलिपि लेकर तहसील आ जाएं। उसे धौरहरा स्थित रामवटी के स्थान पर बालकांड की पांडुलिपियों के साथ रखा जाएगा। ग्रामीणों ने नोटिस मिलने का विरोध करते हुए सांसद अजय मिश्र टेनी से मुलाकात की। टेनी ने पूर्वजों के समय से रखी गई पांडुलिपि को गांव में ही रखे रहने के लिए तहसीलदार से कहा। इस पर तहसीलदार ने उसे दुलही में ही रखे रहने का आश्वासन दिया।
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