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तमाम तथ्यों को महत्व क्यों नहीं दे रही सीबीआई?

Fri, 19 Feb 2016 06:26 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 19 Feb 2016 06:26 PM IST
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Why not consider all the facts CBI?
एनआरएचएम घोटाले की जांच के दायरे में आए पसगवां पीएचसी पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ लिपिक महेंद्र शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट लगाने की तैयारी की बात उनकी पत्नी मिथलेश शर्मा ने सुनीं तो वह हतप्रभ रह गईं। उन्होंने कहा कि उनकी तो समझ में ही नहीं आ रहा, क्या करूं और क्या न करूं। वह कहती हैं कि पति की मौत सामान्य आत्महत्या नहीं थी उनका कत्ल किया गया था।
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पसगवां पीएचसी पर तैनात महेंद्र शर्मा का शव 15 फरवरी 2012 को जिस मकान से बरामद हुआ था, वहां न पीने का पानी था और न ही खाने का कोई सामान। वह सात फरवरी से लापता थे और उसी दिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत 12 फरवरी को होना चाहिए था। इस मामले की जांच शुरुआती दौर में कत्ल मानकर की जा रही थी, लेकिन सीबीआई अब पुलिस की ओर से मौके की वीडियोग्राफी को प्रमुख तौर पर रख रही है। सीबीआई मौके पर मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आधार मानकर रिपोर्ट लगाने जा रही है। यह बात शहर के बहादुरनगर में रह रहीं महेन्द्र शर्मा की पत्नी मिथलेश शर्मा ने सुनीं तो वह आश्चर्यचकित हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्हें क्लोजर रिपोर्ट लगाने की बाबत कोई जानकारी नहीं है। फरवरी के शुरुआत में कुछ जानकारियां लेने के लिए सीबीआई के इंस्पेक्टर पीके श्रीवास्तव आने वाले थे। श्रीवास्तव ने उनसे फोन पर बात की थी, तबसे वह सीबीआई टीम के आने का इंतजार कर रहीं हैं। फिलहाल वह क्लोजर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं और वह अपने वकील से मामले में विचार विमर्श करेंगी।
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