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ट्रक ने पुलिस जीप में मारी टक्कर, दरोगा की मौत, सिपाही घायल

Mon, 08 Jun 2015 10:23 PM IST
पलियाकलां
पलियाकलां Updated Mon, 08 Jun 2015 10:23 PM IST
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Truck collision killed in the police jeep , inspector killed , soldier wounded
पलिया-भीरा मार्ग पर ग्राम अतरिया के पास रविवार देर रात सड़क हादसे में हेड कांस्टेबल (प्रोन्नत) राकेश मिश्रा की मौत हो गई और एक सिपाही घायल हो गया। राकेश पुलिस जीप से गश्त कर रहे थे तभी पीछे से किसी ट्रक ने जीप में टक्कर मार दी। जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। सूचना पर रात में ही कई एसओ, सीओ और एसपी अरविंद सेन भी मौके पर पहुंच गए थे।
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पलिया थाने में वर्ष 2011 से तैनात एचसीपी राकेश मिश्रा जिला रायबरेली के थाना भदोरबट के तहत गांव पीतांबरपुर के रहने वाले थे। एसपी अरविंद सेन के अनुसार रविवार की रात करीब एक बजे थाने की जीप खुद चलाते हुए सिपाही अखिलेश के साथ गश्त पर थे। पलिया-भीरा मार्ग पर ग्राम अतरिया से कुछ आगे उनके वाहन में ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे जीप सड़क पर ही पलट गई और राकेश स्टेयरिंग के बीच फंस गए। उनके सिर में भी गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घायल सिपाही अखिलेश ने बताया कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह सिर्फ यह देख पाया कि ट्रक ने टक्कर मारी है। टक्कर मारने के बाद चालक ट्रक लेकर तेजी से भीरा की ओर भाग निकला। सूचना पर एसओ केपी सिंह मय दलबल के मौके पर पहुंच गए और दोनो को बाहर निकलवाया। सिपाही को रात में ही जिला अस्पताल रेफर किया गया। शव पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया है।
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पापा के साथ जाना था दुधवा घूमने ः  पलियाकलां। पलिया-भीरा मार्ग पर हुए हादसे में मौत का शिकार हुए दरोगा का 17 वर्षीय बेटा अखंड मिश्रा अपने पिता की अचानक हुई मौत से सदमे में आ गया है और उसकी आंखों से आंसुओं का सैलाब रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वह अभी पापा के अंतिम दिनों में उनके साथ बिताए गए पलों को भूल भी नहीं पा रहा है।
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जैसे-जैसे उसे इन पलों की याद आती है उसकी आंखें आंसुओं भर कर बहने लगती हैं। भूले भी कैसे अभी शनिवार को ही वह अपने पापा के पास आया था। पापा भी बेटे को देख कर काफी खुश हुए थे लेकिन क्या पता था कि वह अपने इस प्यारे बेटे को छोड़ कर ऐसे चले जाएंगे। उन्होंने बेटे अखंड मिश्रा से वायदा किया था कि वह सोमवार को उसे धनगढ़ी और दुधवा घुमाने ले जाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था जो पिता ने अपने बेटे को देख लिया और बेटे ने अपने पिता को। शनिवार से रविवार तक पिता के साथ बिताए पल अब अखंड को झकझोर रहे हैं और उसकी आंखों से आंसुओं की बारिश जारी है। अखंड मृतक दरोगा का बड़ा बेटा है और उसकी उम्र 17 साल है। उसकी दो बहने  प्रियंका और आंचल का भी घर पर रो रोकर बुरा हाल हुआ है। मां ऊषा मिश्रा भी अपने जीवन साथी के इस तरह अचानक दुनियां से चले जाने पर सदमे में आ गईं हैं। पूरे कुनबे में कोहराम मचा हुआ है।
...हादसा या फिर कुछ था और, सभी ने साध रखी अभी चुप्पी ः पलियाकलां। पलिया-भीरा मार्ग पर पुलिस जीप पलटने का मामला हादसा था या फिर जानबूझ कर अंजाम दी गई वारदात। यह सवाल आम लोगों की जुबान पर तैर रहा है और इसका जवाब देने के लिए कोई अभी तैयार नहीं है। रविवार की रात करीब एक बजे हुए इस हादसे पर बारीकी से नजर डाली जाए तो यह हादसा नजर नहीं आता। जिस तरह से ट्रक ने टक्कर मारी है उससे तो यही जाहिर होता है कि यह जानबूझ कर अंजाम दी गई वारदात है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह किसी अपराध को अंजाम देने वाले वाहन को रोकने की कोशिश में तो नहीं थे ? तस्कर, पशु तस्कर सभी अपने वाहनो से इसी मार्ग से होकर गुजरते हैें और यह काले धंधे करने वाले लोग खास कर रात में ही यहां से गुजरना पसंद करते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दरोगा की नजर ऐसे ही कार्य में लिप्त किसी वाहन पर पड़ी हो और उन्होंने उसका पीछा किया हो। पीछे करने के बाद उन्होंने जीप से वाहन को ओवरटेक कर रोकना चाहा हो लेकिन ट्रक चालक ने उनके वाहन को ही जोरदार टक्कर मार भागने कोशिश कर डाली हो। या फिर आगे चल रही पुलिस जीप से वह पकड़े जाने का खतरा मान रहा हो तो उसने तेज टक्कर मार दी हो और फरार हो गया हो। फिलहाल जो भी हो लेकिन मामलें में जांच के कई सवाल खड़े हो गए हैं।
पलिया थाने में ही हुई प्रोन्नति ः मृतक दरोगा राकेश मिश्रा की पलिया थाने में तैनाती वर्ष 2011 में हेडमोहर्रिर पद पर हुई थी। इसके बाद वह वर्ष 2014 में प्रोन्नति पाकर दरोगा बने थे। लगातार कई वर्षों तक वह यहीं तैनात रहे। उनकी भर्ती 5 दिसंबर 1987 को हुई थी और उन्होंने करीब 28 साल पुलिस सेवा में दिए।

क्या कर रही थी शारदा पुल की पिकेट ः घटनास्थल से शारदा पुल पर बनाई चौकी कुछ ही दूर है और जिस तरह से टक्कर मारी गई उससे जाहिर है कि टक्कर मारकर भागने वाला अपने वाहन को धीमी गति से तो नहीं ले गया होगा उसकी गति काफी होगी। ऐसे भागने वाले वाहन को पुलिस पिकेट ने क्यों नहीं देखा और रोका? कहीं ऐसा तो नहीं कि सिपाही यहां थे ही नहीं?

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