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दुधवा में अब चालक-गाइड कार्य बहिष्कार पर
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)।
Updated Thu, 28 Jan 2016 10:31 PM IST
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फिटनेस सही न होने और कागज न दिखा पाने के कारण एआरटीओ द्वारा सीज की गईं दुधवा नेशनल पार्क की तीन जिप्सियों को मामला तूल पकड़ गया है। जिप्सी चालकों और नेचर गाइड ने यह कार्रवाई डीएम के इशारे पर होने का आरोप लगाते हुए गुरुवार शाम से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया, जिससे दुधवा नेशनल पार्क का पर्यटन फिर खतरे में नजर आ रहा है। दुधवा के जिप्सी चालकों, नेचर गाइडों ने मुख्यालय में प्रदर्शन और नारेबाजी भी की और मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।
मालूम हो कि नवंबर महीने में फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन ने डीएम किंजल सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए पहले उन्हें हटाने और कार्रवाई की मांग का ज्ञापन शासन से लेकर उच्चाधिकारियों को भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर आंदोलन करते हुए 29 नवंबर से पर्यटन बंद कर दिया था, जो उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप पर दो दिसंबर को खुल सका था।
इधर बुधवार को एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने दुधवा नेशनल पार्क में छापा मारकर तीन जिप्सियों को फिटनेस में कमी और कागज न मिलने पर सीज कर उन्हें उठवाकर थाना पलिया पहुंचा दिया था। इससे गुस्साए जिप्सी चालकों ने आरोप लगाया गया था कि डीएम किशनपुर पहुंची थीं व निर्धारित समय से पहले ही जंगल भ्रमण पर जाना चाहती थीं और कर्मचारियों के मना करने पर गुस्साकर यह कार्रवाई करा दी थी।
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गुरुवार को इस घटना से आक्रोशित दुधवा के कुल 35 जिप्सी चालक, करीब 50 नेचर गाइड और जिप्सी मालिकों ने आंदोलन की घोषणा कर दी। इसके बाद सभी दुधवा मुख्यालय आए और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन व नारेबाजी की।
उन्होंने मुख्यमंत्री, डिप्टी डायरेक्टर को एक ज्ञापन भी भेजा और इसमें कहा गया है कि डीएम ने पूर्व में भी दुधवा के नियमों को तोड़कर पार्क कर्मचारियों का उत्पीड़न किया था, जिसको लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा गया था। इस संबंध में जांच अधिकारी नामित होने के बाद पार्क कर्मियों ने कार्य बहिष्कार स्थगित कर दिया। पर फिर से वही सब हो रहा है।
जिप्सी चालकों और गाइडों ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती वह सैलानियों को जंगल भ्रमण नहीं कराएंगे। उन्होंने शाम से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। प्रदर्शन करने वालों में इश्तियाक खान, तौफीक, रंजीत सिंह, अनिल कुमार, पप्पू, दीपक कुमार, मो. सलमान, बद्री विशाल, फरहान खान, महादेव, रज्जन अली, रामकिशोर, कमलेश, राजेंद्र, अल्ताफ, राजेंद्र कुमार, हैप्पी, सरफराज आदि शामिल थे।
शाम को नहीं कर सके तमाम सैलानी दुधवा जंगल के दीदार
जिप्सी चालकों और नेचर गाइडों के शाम से शुरू किए कार्य बहिष्कार के चलते दुधवा में आए तमाम सैलानियों को शाम की शिफ्ट में दुधवा जंगल के दीदार नहीं हो सके। जंगल के दीदार के लिए जिप्सी ही एक वाहन है जो भीतर जाती है। आंदोलित चालकों ने जिप्सियों को नहीं चलाया और इसी के कारण के सैलानियों को जाने को नहीं मिल पाया।
फेडरेशन आफ फारेस्ट भी कूद सकता है आंदोलन में
फेेडरेशन आफ फारेस्ट भी आंदोलन में कूद सकता है इसके आसार बढ़ रहे हैं। फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि शुक्रवार को उनकी बैठक होगी और इसमें चर्चा कर कोई फैसला लिया जाएगा। अगर फेडरेशन भी इसमें शामिल हो गया तो हालात फिर खराब हो जाएंगे और दुधवा का पर्यटन पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
पार्क उपनिदेशक ने किया सेलफोन बंद
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक पीपी सिंह ने मामले में कुछ भी बोलने से बचने के लिए सेलफोन बंद कर लिया। वह ऑफिस में भी नहीं मिले, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल सका है। इधर, फील्ड डायरेक्टर-दुधवा टाइगर रिजर्व संजय सिंह ने बताया कि विभागीय बैठक में लगातार दो दिन से व्यस्त रहा। आज ही लखनऊ लौटा हूं, इसलिए दुधवा नेशनल पार्क के जिप्सी चालकों और नेचर गाइड के कार्य बाहिष्कार की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो पूरा मामला दिखवाएंगे।
डीएम ने पत्र लिखकर पार्क प्रशासन को किया आगाह।
लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क की तीन जिप्सियों को उठाने के मामले में एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने डीएम को पत्र लिख कर अवगत कराया है कि दुधवा नेशनल पार्क में सैलानियों को भ्रमण कराने के लिए जो जिप्सियां लगाई गई हैं। उनमें से अधिकतर के परमिट नहीं है। न ही चालकों के पास वैध लाइसेंस हैं। कई जिप्सियों की फिटनेस नहीं है। इससे सैलानियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इस पत्र के आधार पर डीएम ने दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक को पत्र लिख कर इसमें सुधार लाने को कहा है। उधर, डीएम किंजल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में अवैध रूप से वाहनों को संचालित किया जा रहा है। जिप्सियों को संचालन कुछ लोग ठेके पर कर रहे हैं। अवैध रूप से वाहनों के संचालन की जांच एआरटीओ ने की। दो जिप्सियां अनफिट मिलीं, जबकि तीसरी का चालक मौके से भाग निकला। अवैध रूप से वाहनों को लगाए जाने से जहां सैलानियों के लिए खतरा है, वहीं राजस्व की भी हानि हो रही है।
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मालूम हो कि नवंबर महीने में फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन ने डीएम किंजल सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए पहले उन्हें हटाने और कार्रवाई की मांग का ज्ञापन शासन से लेकर उच्चाधिकारियों को भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर आंदोलन करते हुए 29 नवंबर से पर्यटन बंद कर दिया था, जो उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप पर दो दिसंबर को खुल सका था।
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इधर बुधवार को एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने दुधवा नेशनल पार्क में छापा मारकर तीन जिप्सियों को फिटनेस में कमी और कागज न मिलने पर सीज कर उन्हें उठवाकर थाना पलिया पहुंचा दिया था। इससे गुस्साए जिप्सी चालकों ने आरोप लगाया गया था कि डीएम किशनपुर पहुंची थीं व निर्धारित समय से पहले ही जंगल भ्रमण पर जाना चाहती थीं और कर्मचारियों के मना करने पर गुस्साकर यह कार्रवाई करा दी थी।
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गुरुवार को इस घटना से आक्रोशित दुधवा के कुल 35 जिप्सी चालक, करीब 50 नेचर गाइड और जिप्सी मालिकों ने आंदोलन की घोषणा कर दी। इसके बाद सभी दुधवा मुख्यालय आए और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन व नारेबाजी की।
उन्होंने मुख्यमंत्री, डिप्टी डायरेक्टर को एक ज्ञापन भी भेजा और इसमें कहा गया है कि डीएम ने पूर्व में भी दुधवा के नियमों को तोड़कर पार्क कर्मचारियों का उत्पीड़न किया था, जिसको लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा गया था। इस संबंध में जांच अधिकारी नामित होने के बाद पार्क कर्मियों ने कार्य बहिष्कार स्थगित कर दिया। पर फिर से वही सब हो रहा है।
जिप्सी चालकों और गाइडों ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती वह सैलानियों को जंगल भ्रमण नहीं कराएंगे। उन्होंने शाम से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। प्रदर्शन करने वालों में इश्तियाक खान, तौफीक, रंजीत सिंह, अनिल कुमार, पप्पू, दीपक कुमार, मो. सलमान, बद्री विशाल, फरहान खान, महादेव, रज्जन अली, रामकिशोर, कमलेश, राजेंद्र, अल्ताफ, राजेंद्र कुमार, हैप्पी, सरफराज आदि शामिल थे।
शाम को नहीं कर सके तमाम सैलानी दुधवा जंगल के दीदार
जिप्सी चालकों और नेचर गाइडों के शाम से शुरू किए कार्य बहिष्कार के चलते दुधवा में आए तमाम सैलानियों को शाम की शिफ्ट में दुधवा जंगल के दीदार नहीं हो सके। जंगल के दीदार के लिए जिप्सी ही एक वाहन है जो भीतर जाती है। आंदोलित चालकों ने जिप्सियों को नहीं चलाया और इसी के कारण के सैलानियों को जाने को नहीं मिल पाया।
फेडरेशन आफ फारेस्ट भी कूद सकता है आंदोलन में
फेेडरेशन आफ फारेस्ट भी आंदोलन में कूद सकता है इसके आसार बढ़ रहे हैं। फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि शुक्रवार को उनकी बैठक होगी और इसमें चर्चा कर कोई फैसला लिया जाएगा। अगर फेडरेशन भी इसमें शामिल हो गया तो हालात फिर खराब हो जाएंगे और दुधवा का पर्यटन पूरी तरह से ठप हो जाएगा।
पार्क उपनिदेशक ने किया सेलफोन बंद
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक पीपी सिंह ने मामले में कुछ भी बोलने से बचने के लिए सेलफोन बंद कर लिया। वह ऑफिस में भी नहीं मिले, जिससे उनका पक्ष नहीं मिल सका है। इधर, फील्ड डायरेक्टर-दुधवा टाइगर रिजर्व संजय सिंह ने बताया कि विभागीय बैठक में लगातार दो दिन से व्यस्त रहा। आज ही लखनऊ लौटा हूं, इसलिए दुधवा नेशनल पार्क के जिप्सी चालकों और नेचर गाइड के कार्य बाहिष्कार की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो पूरा मामला दिखवाएंगे।
डीएम ने पत्र लिखकर पार्क प्रशासन को किया आगाह।
लखीमपुर खीरी। दुधवा नेशनल पार्क की तीन जिप्सियों को उठाने के मामले में एआरटीओ प्रशासन श्वेता वर्मा ने डीएम को पत्र लिख कर अवगत कराया है कि दुधवा नेशनल पार्क में सैलानियों को भ्रमण कराने के लिए जो जिप्सियां लगाई गई हैं। उनमें से अधिकतर के परमिट नहीं है। न ही चालकों के पास वैध लाइसेंस हैं। कई जिप्सियों की फिटनेस नहीं है। इससे सैलानियों की जान खतरे में पड़ सकती है। इस पत्र के आधार पर डीएम ने दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक को पत्र लिख कर इसमें सुधार लाने को कहा है। उधर, डीएम किंजल सिंह ने अमर उजाला को बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में अवैध रूप से वाहनों को संचालित किया जा रहा है। जिप्सियों को संचालन कुछ लोग ठेके पर कर रहे हैं। अवैध रूप से वाहनों के संचालन की जांच एआरटीओ ने की। दो जिप्सियां अनफिट मिलीं, जबकि तीसरी का चालक मौके से भाग निकला। अवैध रूप से वाहनों को लगाए जाने से जहां सैलानियों के लिए खतरा है, वहीं राजस्व की भी हानि हो रही है।