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बाघ के हमले में किशोरी की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी (लखीमपुर खीरी)।
Updated Wed, 17 Aug 2016 12:13 AM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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जंगल में लकड़ियां बीनने गई थी
सोमवार की दोपहर हुई वारदात
मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ ब्लाक जंगल में सोमवार को लकड़ी बीनने गई एक किशोरी पर बाघ ने हमला कर दिया। बाघ के हमले से घायल किशोरी की करीब एक घंटे बाद मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामसभा सुआबोझ के गांव सुरजनपुर कपरहा कुआं निवासी हिंछलाल की पत्नी सुम्मारी देवी, 13 साल की पुत्री सरस्वती और गांव की इंद्रावती के साथ पास के जंगल में लकड़ी बीनने गईं थीं। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे झाड़ी में छिपे बैठे बाघ ने सरस्वती पर पीछे से हमला कर उसे दबोच लिया। बेटी की चीख सुनकर मां सुम्मारी देवी और इंद्रावती जब वहां पहुंचीं तो यह नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। मां सरस्वती ने हिम्मत नहीं छोड़ी और बेटी को बाघ के मुंह से छुड़ाने के लिए दौड़ पड़ी और इंद्रावती एक डंडे को जमीन पर पटकने के साथ ही जोर-जोर से चीखने लगी तो बाघ सरस्वती को मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग गया।
सुम्मारी देवी ने बताया कि करीब एक घंटे बाद सरस्वती की मौत हो गई। सूचना पाकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किशोरी का शव गांव ले आए। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक सुनील चौधरी के निर्देश पर मैलानी सेंक्चुरी रेंजर वीसी तिवारी ने घटनास्थल का मुआयना किया तथा बाघ के पगमार्क मौके पर देखे। उन्होंने बताया कि हमला करने वाला बाघ छह-सात साल का नर है। वन रेंजर मैलानी डीएस यादव ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और ग्रामीणों को जंगल में न जाने की सलाह दी। उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपये की नकद राशि मृतका की मां सुम्मारी देवी को दी। उधर पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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जान पर खेलकर छुड़ाया बिटिया को
मैलानी। सरस्वती की मां सुम्मारी देवी ने बताया कि बाघ ने उनकी बिटिया को अपने मुंह में दबोच रखा था। यह देख उन्होंने भी हिम्मत नहीं हारी और सोच लिया कि चाहे जान चली जाए, मगर बिटिया को छुड़ाकर ही दम लेंगी। सुम्मारी और इंद्रावती का हौसला वाकई काम आया और उन्होंने बाघ के मुंह से बिटिया को छुड़ा ही लिया। मगर यह अफसोस है कि बिटिया की जान नहीं बच सकी।
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सोमवार की दोपहर हुई वारदात
मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ ब्लाक जंगल में सोमवार को लकड़ी बीनने गई एक किशोरी पर बाघ ने हमला कर दिया। बाघ के हमले से घायल किशोरी की करीब एक घंटे बाद मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामसभा सुआबोझ के गांव सुरजनपुर कपरहा कुआं निवासी हिंछलाल की पत्नी सुम्मारी देवी, 13 साल की पुत्री सरस्वती और गांव की इंद्रावती के साथ पास के जंगल में लकड़ी बीनने गईं थीं। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे झाड़ी में छिपे बैठे बाघ ने सरस्वती पर पीछे से हमला कर उसे दबोच लिया। बेटी की चीख सुनकर मां सुम्मारी देवी और इंद्रावती जब वहां पहुंचीं तो यह नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। मां सरस्वती ने हिम्मत नहीं छोड़ी और बेटी को बाघ के मुंह से छुड़ाने के लिए दौड़ पड़ी और इंद्रावती एक डंडे को जमीन पर पटकने के साथ ही जोर-जोर से चीखने लगी तो बाघ सरस्वती को मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग गया।
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सुम्मारी देवी ने बताया कि करीब एक घंटे बाद सरस्वती की मौत हो गई। सूचना पाकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किशोरी का शव गांव ले आए। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक सुनील चौधरी के निर्देश पर मैलानी सेंक्चुरी रेंजर वीसी तिवारी ने घटनास्थल का मुआयना किया तथा बाघ के पगमार्क मौके पर देखे। उन्होंने बताया कि हमला करने वाला बाघ छह-सात साल का नर है। वन रेंजर मैलानी डीएस यादव ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और ग्रामीणों को जंगल में न जाने की सलाह दी। उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपये की नकद राशि मृतका की मां सुम्मारी देवी को दी। उधर पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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जान पर खेलकर छुड़ाया बिटिया को
मैलानी। सरस्वती की मां सुम्मारी देवी ने बताया कि बाघ ने उनकी बिटिया को अपने मुंह में दबोच रखा था। यह देख उन्होंने भी हिम्मत नहीं हारी और सोच लिया कि चाहे जान चली जाए, मगर बिटिया को छुड़ाकर ही दम लेंगी। सुम्मारी और इंद्रावती का हौसला वाकई काम आया और उन्होंने बाघ के मुंह से बिटिया को छुड़ा ही लिया। मगर यह अफसोस है कि बिटिया की जान नहीं बच सकी।