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बंदियों की पढ़ाई पटरी से उतरी
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 07 Feb 2015 07:06 PM IST
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पिछले करीब आठ महीने से शिक्षक विहीन चल रहे जिला कारागार में बंदियों की पढ़ाई पटरी से उतर गई है। यहां अशिक्षा के अंधेरे को दूर करने के लिए जेल अधिकारियों के प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। पूर्व डीएम गौरव दयाल ने बेसिक शिक्षा विभाग को कारागार में वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया था लेकिन शिक्षा अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।
शासन द्वारा निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए की गई व्यवस्था जिला कारागार में दम तोड़ रही है। यहां करीब 200 बंदी ऐसे हैं, जो कक्षा एक लेकर कक्षा आठ तक की पढ़ाई कर शिक्षित हो रहे हैं। करीब 50 से अधिक निरक्षर बंदी ऐसे हैं, जिन्हें अक्षर का ज्ञान दिया जा रहा है। वैसे तो बंदियों की पढ़ाई के लिए हर बैरक में एक-एक बंदी शिक्षक है। बंदियों को अक्षर ज्ञान देने और उनकी परीक्षाओं की तैयारी का जिम्मा बंदी शिक्षक ही संभालते हैं। लेकिन बंदियों की बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षक का होना जरूरी होता है।
कारागार प्रशासन करता है नियुक्ति
बंदियों को शिक्षित करने के लिए कारागार में शिक्षक की नियुक्ति आईजी जेल करते हैं। शिक्षक की सेवानिवृत्ति के बाद से अधिकारियों ने पत्र भेजकर कारागार प्रशासन से शिक्षक की नियुक्ति की मांग की लेकिन अभी तक मुख्यालय के अधिकारियों ने इसकी सुधि नहीं ली है।
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हाईस्कूल-इंटर का परीक्षार्थी नहीं
इसे शिक्षक की कमी कहें या कुछ और। इस बार कारागार में हाईस्कूल और इंटर का एक भी परीक्षार्थी नहीं हैं। जबकि पिछले कई सालों से 10-12 बंदी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए यहां से आदर्श कारागार लखनऊ जाते थे।
जेल अधीक्षक एचआर दोहरे ने बताया कि कारागार में शिक्षक राजाराम के सेवानिवृत्त होने के बाद से नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षक की कमी से आ रही दिक्कत को लेकर एक बैठक में तत्कालीन डीएम गौरव दयाल से बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। जिस पर उन्होंने बीएसए को निर्देश भी दिया था लेकिन अभी किसी शिक्षक की तैनाती नहीं की गई है।
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शासन द्वारा निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए की गई व्यवस्था जिला कारागार में दम तोड़ रही है। यहां करीब 200 बंदी ऐसे हैं, जो कक्षा एक लेकर कक्षा आठ तक की पढ़ाई कर शिक्षित हो रहे हैं। करीब 50 से अधिक निरक्षर बंदी ऐसे हैं, जिन्हें अक्षर का ज्ञान दिया जा रहा है। वैसे तो बंदियों की पढ़ाई के लिए हर बैरक में एक-एक बंदी शिक्षक है। बंदियों को अक्षर ज्ञान देने और उनकी परीक्षाओं की तैयारी का जिम्मा बंदी शिक्षक ही संभालते हैं। लेकिन बंदियों की बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षक का होना जरूरी होता है।
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कारागार प्रशासन करता है नियुक्ति
बंदियों को शिक्षित करने के लिए कारागार में शिक्षक की नियुक्ति आईजी जेल करते हैं। शिक्षक की सेवानिवृत्ति के बाद से अधिकारियों ने पत्र भेजकर कारागार प्रशासन से शिक्षक की नियुक्ति की मांग की लेकिन अभी तक मुख्यालय के अधिकारियों ने इसकी सुधि नहीं ली है।
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हाईस्कूल-इंटर का परीक्षार्थी नहीं
इसे शिक्षक की कमी कहें या कुछ और। इस बार कारागार में हाईस्कूल और इंटर का एक भी परीक्षार्थी नहीं हैं। जबकि पिछले कई सालों से 10-12 बंदी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने के लिए यहां से आदर्श कारागार लखनऊ जाते थे।
जेल अधीक्षक एचआर दोहरे ने बताया कि कारागार में शिक्षक राजाराम के सेवानिवृत्त होने के बाद से नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षक की कमी से आ रही दिक्कत को लेकर एक बैठक में तत्कालीन डीएम गौरव दयाल से बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। जिस पर उन्होंने बीएसए को निर्देश भी दिया था लेकिन अभी किसी शिक्षक की तैनाती नहीं की गई है।