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प्रनीत के लिए काल बना लैट्रीन टैंक का एक्जास्ट पिलर

Wed, 24 Feb 2016 10:04 PM IST
मैलानी (लखीमपुर खीरी)।
मैलानी (लखीमपुर खीरी)। Updated Wed, 24 Feb 2016 10:04 PM IST
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Period for making the latrine tank exhaust Praneeth Pilar
 रेलवे कॉलोनी में लैट्रीन टैंक का एक्जास्ट पिलर गिरने से उसके नीचे दबकर रेलकर्मी के चार वर्षीय बेटे प्रनीत उर्फ लड्डू की मौत गई। प्रनीत पूरी कॉलोनी में सबका राजदुलारा था। उसकी मौत से परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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रेलवे में रनिंग रूम बेयरर श्याम सुंदर रेलवे कालोनी के आवास संख्या एल/26/ए में रहते हैं और वह मूलत: गोरखपुर के पीपी गंज थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। दिन में 11 बजे श्याम सुंदर अपने क्वार्टर में थे और पास ही उनका छोटा बेटा चार वर्षीय प्रनीत उर्फ लड्डू खेल रहा था। इसी बीच बाउंड्री में ही बने लैट्रीन के टैंक का एक्जास्ट पिलर प्रनीत के ऊपर गिर गया। पास में मौजूद पिता श्याम सुंदर ने बेटे को बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इस कोशिश में श्याम सुंदर भी घायल हो गए। बाद में बमुश्किल प्रनीत को पिलर के नीचे से निकाला गया। प्रनीत के शरीर में गुम चोटें आईं और वह बेहोश हो गया। उसे फौरन निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रनीत की मौत की खबर सुनते ही माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और यह खबर आनन-फानन पूरी रेलवे कॉलोनी में फैल गई। रेलवे आवासों में रह रहे लोगों में इस घटना से आक्रोश फैल गया। उनका कहना था कि पिलर काफी पुराना था और इसी कारण वह गिरा। लोगों ने इसके लिए रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग को दोषी माना। अधिकतर लोगों का कहना था कि आवासों की हालत जर्जर है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। घटना की खबर पाकर चीफ क्रू कंट्रोलर अजय कुमार फौरन मौके पर पंहुचे और श्याम सुंदर को ढाढ़स बंधाया। इंजीनियरिंग विभाग के सहायक मंडल अभियंता और सेक्शन इंजीनियर का मोबाइल बंद मिला, लिहाजा उनके वर्जन नहीं मिल सके।  
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पिता के सामने ही जिगर के टुकड़े ने दम तोड़ा
मैलानी। प्रनीत की मौत उसके पिता के सामने ही हुई। पिता श्याम सुंदर ने सुबकते हुए कहा कि लड्डू खेल रहा था। उसके सामने ही पिलर गिरा। उन्होंने लड्डू को बचाने की जीतोड़ कोशिश की, जिसमें उनको चोट भी आई पर वह जिगर के टुकड़े को बचा नहीं सके।
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थोड़ी देर पहले ही पी थी पोलियो की खुराक
मैलानी। लड्डू की मौत की खबर सुनकर वहां पहुंचे लोगों में वह महिला भी शामिल थी जिसने उसे पोलियो ड्रॉप पिलाई थी। उसकी आंखों से भी आंसू छलक रहे थे और वह बार-बार यही कह रही थी कि अभी थोड़ी देर पहले ही उसने उसे पोलियो की ड्रॉप पिलाई थी। उसे क्या पता था कि दोबारा वह लड्डू को पोलियो ड्रॉप नहीं पिला सकेगी।

मेरे लड्डू को बचा लो
मैलानी। प्रनीत की अचानक हुई मौत से रोते हुए मां के मुंह से बस एक ही वाक्य बार-बार निकल रहा था कि कोई मेरे लड्डू को बचा लो, वह अभी खेल रहा था, उसके चोट लगी है, वह मरा नहीं है, उसे अस्पताल ले चलो। मां का यह करुण क्रंदन सुनकर सभी की आंखें भीग गईं

दो बच्चों में छोटा था प्रनीत
मैलानी। श्याम सुंदर के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा साहिल नगर के अतुल महादेव एकेडमी में कक्षा पांच का छात्र है और छोटा बेटा प्रनीत उर्फ लड़डू था।

कॉलोनी में सबका दुलारा था लड्डू
मैलानी। प्रनीत उर्फ लड्डू अपने माता-पिता ही नहीं बल्कि पूरी कॉलोनी का चहेता था। चंचल स्वभाव का होने के कारण वह पड़ोसियों का भी दुलारा था। जिसने भी उसकी अकस्मात मौत की खबर सुनी, वह दंग रह गया।

रेलवे कॉलोनी में दहशत
मैलानी। इस दु:खद घटना के बाद रेलवे आवासों में रहने वाले अन्य तमाम रेल कर्मियों के परिवारवाले घबराए हुए हैं। ऐसे तमाम पिलर रेल आवासों में बने हुए हैं। जो पिलर गिरा है, वह काफी पुराना है। सबको यही चिंता सता रही है कि यदि संबंधित अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, दोबारा फिर ऐसा हादसा हो सकता है। रेल कर्मियों ने बताया कि हाल ही में जो बाउंड्री बनी है, वह भी मानक के अनुरूप नहीं है, उसके भी कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। आवास भी पुराने होकर जर्जर हो चुके हैं, ज्यादातर आवासों की छतें टपकती हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस बाबत कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत भी कराया जा चुका है।


गमगीन माहौल में हुआ प्रनीत का अंतिम संस्कार
मैलानी। मासूम प्रनीत का दोपहर बाद गमगीन माहौल में यहीं अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के समय मौजूद सभी की आंखें नम थीं। प्रनीत के पिता मूलत: गोरखपुर के रहने वाले हैं। दूरी अधिक होने के कारण परिवारवालों को आने में काफी समय लगेगा। इसी से रिश्तेदारों के आने का इंतजार किए बिना उसे यहीं सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी गई।
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