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नेपाली महिला की बस में मौत
पलियाकलां
Updated Fri, 08 May 2015 07:23 PM IST
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मुंबई से अपने भाइयों और दो बच्चियों के साथ रोडवेज बस से अपने गांव जा रही नेपाली महिला की बस में मौत हो गई। उसके गर्भवती होने और संदिग्ध हालात में मौत की सूचना पर पुलिस ने शव का अल्ट्रासाउंड कराया तो उसके गर्भवती होने की सूचना झूठी निकली। भाइयों के कार्रवाई न चाहने और पीड़ितों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उनके सुपुर्द कर दिया। इसके बाद कमल चौराहे पर समाजसेवियों ने चंदा कर उसका अंतिम संस्कार शारदा नदी तट पर कराया।
नेपाल राष्ट्र के चीसा पानी के करनाली निवासी राजेश मुंबई में नौकरी करता है। राजेश की 32 वर्षीय पत्नी अमृता अपनी दो बच्चियों और भाई गंगाराम, गोपाल के साथ घर वापस आ रही थी। मुंबई से यह लोग मथुरा पहुंचे और वहां से रोडवेज की बस से भारत-नेपाल सीमा गौरीफंटा के लिए चल दिए। मथुरा में अमृता की तबियत कुछ बिगड़ी तो उसे दवा दिलवाई गई, लेकिन तबियत में सुधार न हुआ तो उसे आगरा में सघन इलाज के लिए उतारा जाने लगा पर उसने बस में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद उसके भाई शव को लेकर यहां ले आए और पलिया के कमल चौराहे पर उतार लिया। महिला को कुछ लोग गर्भवती बता रहे थे। यहां श्री कुल परिवार के शिविर में उसे रखा गया। जहां कुल परिवार के संस्थापक पंडित गोविंद माधव, आशीष अग्निहोत्री आदि ने चंदा कर उसका अंतिम संस्कार शारदा नदी तट पर कराने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस पहुंच गई और शव को पलिया के क्लीनिक पर ले आई। जहां उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया जिसमें उसके गर्भवती नहीं होने की पुष्टि हुई। विवाद की कोई वजह न होने, पीड़ित भाइयों और लोगों के कहने पर पुलिस ने मृतका के शव को पंचनामे के बाद सुपुर्द कर दिया, जिस पर शारदा नदी तट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
...मां की गोद से महरूम हो गईं खुशी और भाजी
मृतका के दो पुत्रियां हैं, जिनमें खुशी की उम्र चार वर्ष और भाजी की दो वर्ष है। दोनो मां के आखिरी पलों में साथ थीं। दोनो के सामने मां की लाश पड़ी थी और उनको इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी कि उनकी मां अब दुनिया से रुखसत हो चुकी है।
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नेपाल राष्ट्र के चीसा पानी के करनाली निवासी राजेश मुंबई में नौकरी करता है। राजेश की 32 वर्षीय पत्नी अमृता अपनी दो बच्चियों और भाई गंगाराम, गोपाल के साथ घर वापस आ रही थी। मुंबई से यह लोग मथुरा पहुंचे और वहां से रोडवेज की बस से भारत-नेपाल सीमा गौरीफंटा के लिए चल दिए। मथुरा में अमृता की तबियत कुछ बिगड़ी तो उसे दवा दिलवाई गई, लेकिन तबियत में सुधार न हुआ तो उसे आगरा में सघन इलाज के लिए उतारा जाने लगा पर उसने बस में ही दम तोड़ दिया। इसके बाद उसके भाई शव को लेकर यहां ले आए और पलिया के कमल चौराहे पर उतार लिया। महिला को कुछ लोग गर्भवती बता रहे थे। यहां श्री कुल परिवार के शिविर में उसे रखा गया। जहां कुल परिवार के संस्थापक पंडित गोविंद माधव, आशीष अग्निहोत्री आदि ने चंदा कर उसका अंतिम संस्कार शारदा नदी तट पर कराने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस पहुंच गई और शव को पलिया के क्लीनिक पर ले आई। जहां उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया जिसमें उसके गर्भवती नहीं होने की पुष्टि हुई। विवाद की कोई वजह न होने, पीड़ित भाइयों और लोगों के कहने पर पुलिस ने मृतका के शव को पंचनामे के बाद सुपुर्द कर दिया, जिस पर शारदा नदी तट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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...मां की गोद से महरूम हो गईं खुशी और भाजी
मृतका के दो पुत्रियां हैं, जिनमें खुशी की उम्र चार वर्ष और भाजी की दो वर्ष है। दोनो मां के आखिरी पलों में साथ थीं। दोनो के सामने मां की लाश पड़ी थी और उनको इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी कि उनकी मां अब दुनिया से रुखसत हो चुकी है।
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