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हत्यारोपी पति को दस साल की कैद, जुर्माना भी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:26 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हत्यारोपी पति को दस साल की कैद, जुर्माना भी
दहेज के लिए नवविवाहिता को प्रताड़ित कर मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने हत्यारोपी पति को दोषी पाया है। अदालत ने दोषसिद्ध पति को दस साल के कठोर कारावास और दस हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम ढखिया कलां निवासी बाबूराम ने अपनी लड़की प्रेमलता की शादी अप्रैल 2012 में गोला थाना क्षेत्र के गांव खलीलपुरवा मजरा चौरठिया निवासी रामप्रमोद के साथ की थी। आरोप है कि अतिरिक्त दहेज की मांग के चलते नवविवाहिता को परेशान किया जाने लगा। इसी बीच आठ महीने बाद ही पांच दिसंबर 2012 को प्रेमलता की लाश संदिग्ध हालात में ससुराल में फांसी के फंदे पर झूलती पाई गई। मृतका के पिता बाबूराम ने इस मामले में पति रामप्रमोद, सास रामपति, ससुर संतराम, देवर ओमकार और अनिल के खिलाफ दहेज मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने बाबूराम, गोकरन, डा.राजेंद्र प्रसाद, अशोक यादव, राजमणि पांडेेय तथा सीओ गोला टीपी सिंह की गवाही दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। इस पर अदालत ने रामप्रमोद को दहेज मृत्यु के लिए दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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दहेज के लिए नवविवाहिता को प्रताड़ित कर मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने हत्यारोपी पति को दोषी पाया है। अदालत ने दोषसिद्ध पति को दस साल के कठोर कारावास और दस हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कौशल किशोर ने बताया भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम ढखिया कलां निवासी बाबूराम ने अपनी लड़की प्रेमलता की शादी अप्रैल 2012 में गोला थाना क्षेत्र के गांव खलीलपुरवा मजरा चौरठिया निवासी रामप्रमोद के साथ की थी। आरोप है कि अतिरिक्त दहेज की मांग के चलते नवविवाहिता को परेशान किया जाने लगा। इसी बीच आठ महीने बाद ही पांच दिसंबर 2012 को प्रेमलता की लाश संदिग्ध हालात में ससुराल में फांसी के फंदे पर झूलती पाई गई। मृतका के पिता बाबूराम ने इस मामले में पति रामप्रमोद, सास रामपति, ससुर संतराम, देवर ओमकार और अनिल के खिलाफ दहेज मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालती सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने बाबूराम, गोकरन, डा.राजेंद्र प्रसाद, अशोक यादव, राजमणि पांडेेय तथा सीओ गोला टीपी सिंह की गवाही दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। इस पर अदालत ने रामप्रमोद को दहेज मृत्यु के लिए दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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