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वनकर्मियों की मिलीभगत में दुधवा जंगल का हो रहा सफाया
अमर उजाला ब्यूरो बेलरायां खीरी।
Updated Sun, 19 Mar 2017 11:31 PM IST
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dudhwa
- फोटो : amar ujala
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बेलरायां रेंज क्षेत्र में हावी हैं लकड़ी चोर
फर्नीचर कारोबारियों से लेकर ईंट भट्ठों तक सप्लाई होती है बेशकीमती लकड़ी
देश-प्रदेश में सुविख्यात दुधवा नेशनल पार्क को हरियाली के दुश्मनों की नजर लगी हुई है। खासतौर पर लकड़ी चोर बेलरायां वन रेंज के तहत साखू और सागौन के पेड़ काटकर क्षेत्र के लकड़ी कारोबारियों से लेकर कुछ ईंट भट्ठों तक सप्लाई कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पार्क अफसरों और रेंज के कर्मचारियों को नहीं हैं, लेकिन कमाई के लालच में सभी आंखें बंद किए हुए हैं।
बेलरायां और उसके आसपास के गांवों में कई फर्नीचर कारोबारी हैं। इसके अलावा ईंट भट्टे भी लगे हैं। वन विभाग के कर्मचारियों की मदद से लकड़ी चोर बेधड़क पार्क में लगे बेशकीमती साखू और सागौन के पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। दुधवा के जंगलों से काटकर लाई जा रही यह लकड़ी गिने-चुने फर्नीचर कारोबारियों से लेकर ईंट भट्ठों पर खुलेआम पहुंचाई जा रही है। फर्नीचर कारोबारियों के यहां जहां लकड़ी चोर साइकिलों से बोटे ले जाते हैं, वहीं ईंट भट्टों पर ले जाने वाली लकड़ी भैरमपुर के बरौलाहार से चकरोड के रास्ते तकियापुर और मोतीपुर होते हुए तांगों से भरकर ईंट भट्ठों पर पहुंचाई जा रही है। बरौलाहार से भैरमपुर मार्ग को जोड़ने वाले इस चकरोड पर लकड़ी के भरे तांगों को किसी भी समय देखा जा सकता है, लेकिन इसके बाद भी वन अफसरों और कर्मचारियों की उन पर नजर नहीं जाती है।
इस तरह से होता है खेल
फर्नीचर बनाने के कारोबारी वन विभाग से लकड़ी की लॉट नीलामी में ले लेते हैं, लेकिन इस लॉट के एक-दो बोटों को फड़वाकर लकड़ी रख तो लेते हैं, लेकिन उपयोग नहीं करते। लॉट की लकड़ी की आंड़ में जंगल से चोरी छिपे काटकर लाई गई लकड़ी से अपना कारोबार करते रहते हैं। इसकी एवज में ग्राहक को असली मेमों न देकर सादे कागज पर बनाकर एक रसीद दी जाती है। वन विभाग भी बेलरायां सहित कई स्थानों पर चल रहे ऐसी फर्नीचर की दुकानों की चेकिंग भी महज कागजी आंकड़ों में करती है।
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सूचना मिलने पर समय समय पर छापेमारी की जाती है। बरौलाहार से लकड़ी निकाले जाने की जानकारी नहीं है। इसे अपने स्तर से दिखवाएंगे, जो इस मामले में शामिल होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार कश्यप, रेंजर पार्क, बेलरायां
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फर्नीचर कारोबारियों से लेकर ईंट भट्ठों तक सप्लाई होती है बेशकीमती लकड़ी
देश-प्रदेश में सुविख्यात दुधवा नेशनल पार्क को हरियाली के दुश्मनों की नजर लगी हुई है। खासतौर पर लकड़ी चोर बेलरायां वन रेंज के तहत साखू और सागौन के पेड़ काटकर क्षेत्र के लकड़ी कारोबारियों से लेकर कुछ ईंट भट्ठों तक सप्लाई कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पार्क अफसरों और रेंज के कर्मचारियों को नहीं हैं, लेकिन कमाई के लालच में सभी आंखें बंद किए हुए हैं।
बेलरायां और उसके आसपास के गांवों में कई फर्नीचर कारोबारी हैं। इसके अलावा ईंट भट्टे भी लगे हैं। वन विभाग के कर्मचारियों की मदद से लकड़ी चोर बेधड़क पार्क में लगे बेशकीमती साखू और सागौन के पेड़ों पर आरा चला रहे हैं। दुधवा के जंगलों से काटकर लाई जा रही यह लकड़ी गिने-चुने फर्नीचर कारोबारियों से लेकर ईंट भट्ठों पर खुलेआम पहुंचाई जा रही है। फर्नीचर कारोबारियों के यहां जहां लकड़ी चोर साइकिलों से बोटे ले जाते हैं, वहीं ईंट भट्टों पर ले जाने वाली लकड़ी भैरमपुर के बरौलाहार से चकरोड के रास्ते तकियापुर और मोतीपुर होते हुए तांगों से भरकर ईंट भट्ठों पर पहुंचाई जा रही है। बरौलाहार से भैरमपुर मार्ग को जोड़ने वाले इस चकरोड पर लकड़ी के भरे तांगों को किसी भी समय देखा जा सकता है, लेकिन इसके बाद भी वन अफसरों और कर्मचारियों की उन पर नजर नहीं जाती है।
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इस तरह से होता है खेल
फर्नीचर बनाने के कारोबारी वन विभाग से लकड़ी की लॉट नीलामी में ले लेते हैं, लेकिन इस लॉट के एक-दो बोटों को फड़वाकर लकड़ी रख तो लेते हैं, लेकिन उपयोग नहीं करते। लॉट की लकड़ी की आंड़ में जंगल से चोरी छिपे काटकर लाई गई लकड़ी से अपना कारोबार करते रहते हैं। इसकी एवज में ग्राहक को असली मेमों न देकर सादे कागज पर बनाकर एक रसीद दी जाती है। वन विभाग भी बेलरायां सहित कई स्थानों पर चल रहे ऐसी फर्नीचर की दुकानों की चेकिंग भी महज कागजी आंकड़ों में करती है।
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सूचना मिलने पर समय समय पर छापेमारी की जाती है। बरौलाहार से लकड़ी निकाले जाने की जानकारी नहीं है। इसे अपने स्तर से दिखवाएंगे, जो इस मामले में शामिल होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार कश्यप, रेंजर पार्क, बेलरायां