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बेटी के सामने ही बाप ने मां को उतार दिया मौत के घाट
अमर उजाला ब्यूरो बेहजम।
Updated Mon, 12 Jun 2017 11:22 PM IST
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हत्या
- फोटो : अमर उजाला
आंखों में खून देखकर किसी की हिम्मत ने हुई कि आगे बढ़कर पकड़ ले
बेटी ने आंखों के सामने पिता को मां की बेरहमी से हत्या करते देखा। लेकिन पिता की आंखों में सवार खून के आगे वह मां को बचाने आगे न बढ़ पाई। थोड़ी देर में उसका भाई भी पहुंचा। तब तक मां की जान निकल गई थी। लेकिन पिता को पकड़ने की हिम्मत वही भी नहीं जुटा पाया। दोनो डर के चीखने चिल्लाने लगे। तब तक भीड़ जुट गई। पर आरोपी राम सेवक से सब दूर ही रहे। वह खुद ही भीड़ को चीरते हुए लगभग एक किमी पैदल चलकर पुलिस चौकी पहुंचा।
मनोज कुमार ने बताया कि पिता जब सुबह सोकर उठे तो पूरी तरह से स्वस्थ्य थे। मां ने चाय और नाश्ता बनाया। दोनों खा पीकर घर से खेत के लिए निकले थे। उनके जाने बाद वह अपने खेत से करीब 100 मीटर की दूरी पर दूसरे के खेत में गन्ने की गुड़ाई करने चला गया। माता-पिता के जाने के करीब 20 मिनट बाद बहन पम्मी खेत पर माता-पिता को पानी देने गई थी। खेत के नजदीक जब वह पहुंची तो देखा कि पिता बेरहमी से खुरपी से मां की गर्दन रेत रहा था। वह डर गई और चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर वह भी दौड़कर मौके पर पहुंचा। तब तक कस्बे के कई लोग मौके पर पहुंच गए, लेकिन कोई भी शख्स पिता के नजदीक तक जाने का साहस नहीं जुटा सका और सभी के सामने से पिता खून से सनी खुरपी, और सिर लेकर पुलिस चौकी पहुंच गए।
भीड़ के बीच से निकला तो दहल उठे लोग
पत्नी की गर्दन धड़ से अलग करने के बाद रामसेवक काफी खुश था। खेत से पुलिस चौकी जाने की बीच वह कहीं दौड़ता तो कहीं आराम से चलता। रास्ते में कई लोगों ने उसके हाथ में सिर देखा तो दहशत में भाग खड़े हुए। उसे देखकर पुलिस चौकी में भी हड़कंप मच गया।
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पत्नी को डर था मारे जाने का
रामसेवक की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। अक्सर वह घर में झगड़ा किया करता था। बेटी पम्मी ने बताया कि रात में वह गुस्साया था। कह रहा था कि उसे और उसकी मां को मार डालेगा। सुबह मां उसके साथ खेत जाने को तैयार नहीं थी। वह जबरदस्ती उसे खेत में ले गया। अनहोनी का आशंका के चलते ही वह ही कुछ देर बाद वह खेत पहुंची।
हाय बप्पा, अम्मा कइहां काहे मार डारेऊ
ऊषा देवी की हत्या के बाद उसके परिवार में कोहराम मच गया। मृतका के दो पुत्र मनोज कुमार, सुनील कुमार, पुत्री पम्मी देवी और अंजली देवी हैं। पिता रामसेवक के सिर लेकर मौके से चले जाने के बाद जब मनोज कुमार और उसकी बहन मां के शव के पास पहुंची तो दोनों चीख-चीखकर मां के शव से लिपटकर रोने लगे। मनोज जोर जोर से यह कहते हुए रोने लगा कि हाय बप्पा, अम्मा कइहां काहे मार डारेऊ।
सिर साथ लाने की बात को नकार गई पुलिस
पुलिस चौकी में सिर लाने की बात को पुलिस सिरे से खारिज कर रही है। चौकी इंचार्ज पारस नाथ यादव ने बताया कि आरोपी सिर्फ एक पॉलिथीन पकड़े था, जिसमें खून से सना अंगोछा और खुरपी थी, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपी बाल पकड़कर सिर लटकाते हुए चल रहा था और उसके एक हाथ में खुरपी थी। उसकी बनियान भी खून से सनी थी।
एसओ डीके सिंह ने ऊषा देवी हत्याकांड की सूचना फील्ड यूनिट को दी और घटना स्थल को येलो टेप लगाकर सुरक्षित कर लिया। सूचना पर पहुंचे फील्ड यूनिट के एक्सपर्ट ने मौके से कई वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।
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बेटी ने आंखों के सामने पिता को मां की बेरहमी से हत्या करते देखा। लेकिन पिता की आंखों में सवार खून के आगे वह मां को बचाने आगे न बढ़ पाई। थोड़ी देर में उसका भाई भी पहुंचा। तब तक मां की जान निकल गई थी। लेकिन पिता को पकड़ने की हिम्मत वही भी नहीं जुटा पाया। दोनो डर के चीखने चिल्लाने लगे। तब तक भीड़ जुट गई। पर आरोपी राम सेवक से सब दूर ही रहे। वह खुद ही भीड़ को चीरते हुए लगभग एक किमी पैदल चलकर पुलिस चौकी पहुंचा।
मनोज कुमार ने बताया कि पिता जब सुबह सोकर उठे तो पूरी तरह से स्वस्थ्य थे। मां ने चाय और नाश्ता बनाया। दोनों खा पीकर घर से खेत के लिए निकले थे। उनके जाने बाद वह अपने खेत से करीब 100 मीटर की दूरी पर दूसरे के खेत में गन्ने की गुड़ाई करने चला गया। माता-पिता के जाने के करीब 20 मिनट बाद बहन पम्मी खेत पर माता-पिता को पानी देने गई थी। खेत के नजदीक जब वह पहुंची तो देखा कि पिता बेरहमी से खुरपी से मां की गर्दन रेत रहा था। वह डर गई और चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर वह भी दौड़कर मौके पर पहुंचा। तब तक कस्बे के कई लोग मौके पर पहुंच गए, लेकिन कोई भी शख्स पिता के नजदीक तक जाने का साहस नहीं जुटा सका और सभी के सामने से पिता खून से सनी खुरपी, और सिर लेकर पुलिस चौकी पहुंच गए।
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भीड़ के बीच से निकला तो दहल उठे लोग
पत्नी की गर्दन धड़ से अलग करने के बाद रामसेवक काफी खुश था। खेत से पुलिस चौकी जाने की बीच वह कहीं दौड़ता तो कहीं आराम से चलता। रास्ते में कई लोगों ने उसके हाथ में सिर देखा तो दहशत में भाग खड़े हुए। उसे देखकर पुलिस चौकी में भी हड़कंप मच गया।
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पत्नी को डर था मारे जाने का
रामसेवक की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। अक्सर वह घर में झगड़ा किया करता था। बेटी पम्मी ने बताया कि रात में वह गुस्साया था। कह रहा था कि उसे और उसकी मां को मार डालेगा। सुबह मां उसके साथ खेत जाने को तैयार नहीं थी। वह जबरदस्ती उसे खेत में ले गया। अनहोनी का आशंका के चलते ही वह ही कुछ देर बाद वह खेत पहुंची।
हाय बप्पा, अम्मा कइहां काहे मार डारेऊ
ऊषा देवी की हत्या के बाद उसके परिवार में कोहराम मच गया। मृतका के दो पुत्र मनोज कुमार, सुनील कुमार, पुत्री पम्मी देवी और अंजली देवी हैं। पिता रामसेवक के सिर लेकर मौके से चले जाने के बाद जब मनोज कुमार और उसकी बहन मां के शव के पास पहुंची तो दोनों चीख-चीखकर मां के शव से लिपटकर रोने लगे। मनोज जोर जोर से यह कहते हुए रोने लगा कि हाय बप्पा, अम्मा कइहां काहे मार डारेऊ।
सिर साथ लाने की बात को नकार गई पुलिस
पुलिस चौकी में सिर लाने की बात को पुलिस सिरे से खारिज कर रही है। चौकी इंचार्ज पारस नाथ यादव ने बताया कि आरोपी सिर्फ एक पॉलिथीन पकड़े था, जिसमें खून से सना अंगोछा और खुरपी थी, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपी बाल पकड़कर सिर लटकाते हुए चल रहा था और उसके एक हाथ में खुरपी थी। उसकी बनियान भी खून से सनी थी।
एसओ डीके सिंह ने ऊषा देवी हत्याकांड की सूचना फील्ड यूनिट को दी और घटना स्थल को येलो टेप लगाकर सुरक्षित कर लिया। सूचना पर पहुंचे फील्ड यूनिट के एक्सपर्ट ने मौके से कई वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।