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होली को जंगल के बाहर निकले बाघ, दहशत 

Fri, 25 Mar 2016 09:40 PM IST
ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 25 Mar 2016 09:40 PM IST
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 Holly came out of the jungle tiger , panic
बाद्य - फोटो : अमर उजाला
पूरनपुर गांव के पास खेतों में पूरे दिन खेतों में डटा रहा बाघ
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सुरजनपुर के खेतों में भी आया बाघ, बाल-बाल बचे दंपित
वनकर्मियों ने ग्रामीणों के सहयोग से हाका लगवाकर जंगल में खदेड़ा 

होली के दिन गुरुवार को बाघ भी मस्ती में आ गए। बाघों ने जंगलों से निकलकर आबादी कें निकट खेतों में आकर डेरा जमा लिया। मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे पूरनपुर गांव के पास खेतों में आया एक बाघ दिनभर खेतों में डेरा जमाए रहा। इस बीच वह बार-बार दहाड़ता रहा। गांव के लोगों ने दहशत के बीच रंग खेला। बाद में वनकर्मियों ने ग्रामीणों के सहयोग से हांका लगाकर बाघ को जंगल में खदेड़ा। उधर सुरजनुपर गांव के पास खेतों में भी एक बाघ आ धमका। खेत की रखवाली कर रहे दंपित बाघ का शिकार होने से बाल-बाल बचे। 
बांकेगंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे गांव पूरनपुर में होली के दिन गुरुवार को एक बाघ आ धमका। उसने गांव के बाहर गेहूं के खेत में खूब धमाल मचाया। सुबह करीब दस बजे गांव के बाहर बाघ की दहाड़ सुनकर लोग दहशत में आ गए। बाघ की दहाड़ सुनकर खेतों में गए किसान सुखराज सिंह, सोनू आदि ने एक बाघ को गेहूं के खेत में आम के पेड़ के नीचे बैठे देखा। वहां जुटे किसानों ने बाघ को खदेड़ने की कोशिश की तो बाघ ने दहाड़ कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद दिन भर बाघ और ग्रामीणों के बीच आंख मिचौली का खेल चलता रहा। बांकेगंज से मात्र चार किलोमीटर दूरी पर स्थित पूरनपुर गांव जंगल से बिल्कुल सटा हुआ है। गांव के पास ही बरौंछा नाला निकलता है। गुरुवार सुबह जब गांव के लोग होली के हुड़दंग में मस्त थे तभी अचानक बाघ की दहाड़ सुनाई दी। इससे सब चौंक पड़े। तमाम ग्रामीण दहाड़ की दिशा में बढ़े तो देखा कि एक बाघ किसान सुखराज सिंह के गेहूं के खेत मे लगे आम के पेड़ की नीचे आराम से चहल कदमी कर रहा है। जब ग्रामीण कुछ और आगे बढ़े तो बाघ इतनी तेजी से दहाड़ा कि लोग भाग खड़े हुए। इसके बाद बाघ दिन भर वहीं डेरा जामाए रहा। इस बीच लोगों ने डीएफओ साउथ नीरज कुमार सहित बांकेगंज पुलिस को गांव के निकट बाघ आने की सूचना दी। डीएफओ ने तत्काल मैलानी रेंजर डीएस यादव और वन कर्मियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। साथ ही बाघ की पूरी मुस्तैदी से निगरानी करने को कहा। वनकर्मियों और पुलिस के पहुंचने के बाद भी ग्रामीण दहशत में रहे। इस बीच ग्रामीणों और वनकर्मियों की टीम को बाघ रुक-रुक कर दहाड़ मारते हुए अपनी मौजूदगी का अहसास कराता रहा। सूरज ढलने के वक्त तक जब बाघ गेहूं खेत में डटा रहा तो वनकर्मियों के सब्र का बांध टूट गया। वनकर्मियों की टीम ग्रामीणों के सहयोग से हांका लगावाकर बमुश्किल बाघ को जंगल में खदेड़ पाई। बाघ को अपनी आंखों से जंगल में जाता देख लोगों ने राहत की सांस ली।
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मैलानी। जंगल से निकलकर एक बाघ न केवल खेतों तक पहुंच गया, बल्कि खेत की रखवाली कर रहे दंपति के पास तक पंहुच गया। दंपति तथा खेत की रखवाली कर रहे लोगों के  शोर मचाने पर बाघ वापस जंगल में लौट गया। तब जाकर दंपति बचे।
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सुरजनपुर निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि कबरहा कुंआ के  पास जंगल के किनारे उनका गेहूं का खेत है। खेत की रखवाली को वह पत्नी  रामरती के साथ रात को खेत में पड़ी झोपड़ी में रहते हैं। गत दिवस तड़के  पांच बजे पत्नी रामरानी शौच के लिए चली, तो किसी बड़े जानवर के खेत में  कूदने की आवाज आई, उसने आवाज लगाकर सुभाष को उठाया, तब तक एक बाघ उसके  सामने कुछ दूरी पर आकर रुक गया। यह देख वह और जोर से चिल्लाई। शोर से जागे  सुभाष ने भी बाघ को पत्नी के सामने देखा, घबराए सुभाष ने एक बांस हाथ में  लिया और दोनों ने जोर से चिल्लाना शुरू किया। माजरा समझ आसपास खेतों की  रखवाली कर रहे परदेशी, साधू तथा कबरहा कुंआ के सीताराम, रामरतन आदि ने भी जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया, शोर सुनकर बाघ जंगल में चला गया, तब  जाकर दोनों की जान बच सकी। हालांकि दोनों ने इसकी सूचना वन विभाग को नहीं  दी है।
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दहशत में कंपकंपाने लगा सुभाष
बाघ को एकदम  करीब से देखने वाले सुभाष के मन में बाघ की इतनी दहशत बैठ गई है कि उसका  शरीर कंपकंपाने लगा है। घटना की जानकारी देते समय कंपकंपाते हुए उसने बताया कि जब से उसने बाघ को एकदम पास से देखा है, तभी से वह दहशत में है। 

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डीएफओ ने वनकर्मियों को बाघ की निगरानी के निर्देश दिए
डीएफओ  साउथ नीरज कुमार ने बताया कि मैलानी रेंज की जटपुरा बीट से सटे पूरनपुर  गांव में वनकर्मियों की टीम गठित कर जंगल से निकलकर खेत में  पहुंचे बाघ की लगातार निगरानी कर रही है। डीएफओ ने ग्रामीणों से  सतर्कता बरतने की अपील की है। कहा कि वन्य जीव हमारे दोस्त है, दुश्मन नहीं।  वन्यजीव कभी अकारण हमलावर नहीं होते। 
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