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जंगल में बाढ़ का पानी, वन और वन्यजीवों पर खतरा
अशोक निगम लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:42 PM IST
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jungle
- फोटो : amar ujala
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दुधवा नेशनल पार्क जंगल का बड़ा इलाका जलमग्न
उत्तर खीरी वन प्रभाग का नवीन पौधरोपण भी डूबा
जिले में आई भीषण बाढ़ से जंगल का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। शारदा, मोहाना और सुहेली नदियों का पानी दुधवा नेशनल पार्क के सठियाना, गौरीफंटा वनकटी और दुधवा रेंज के इलाके में भरा हुआ है। वहीं किशनपुर सेंक्चुरी में उफनाई शारदा नदी ताल में मिल गई है। दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी के करीब 270 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ का पानी है। उधर उत्तर खीरी वन प्रभाग के बेलरायां, संपूर्णानगर रेंज बाढ़ से प्रभावित हैं। उत्तर खीरी वन प्रभाग को करीब 100 हेक्टेयर का नवीन पौधरोपण भी पानी में डूब गया है।
शारदा के अलावा मोहाना और सुहेली नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ से वन और वन्यजीवों को भारी नुकसान हो रहा है। पिछले बीस पच्चीस वर्षों में भारत नेपाल सीमा पर बाढ़ का प्रकोप ज्यादा बढ़ा है। इस साल भी अगस्त के मध्य में ही दुधवा नेशनल पार्क और उत्तर खीरी वन प्रभाग का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे साल के पेड़ों के सूखने और गिरने से करोड़ों रुपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बाढ़ के चलते वन्यजीवों के आवास और चारे की समस्या भी पैदा हो गई है। वन्यजीव सुरक्षित स्थानों पर पलायन के प्रयास में शिकारियों के निशाने पर आ रहे हैं।
डीएफओ नार्थ डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि उत्तर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर, बेलरायां और धौरहरा रेंज में इसी साल किया करीब 100 हेक्टेयर पौधरोपण बाढ़ के पानी में डूब गया है। इसके अलावा करीब 220 हेक्टेयर पुराना पौधरोपण और जंगल क्षेत्र में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है।
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बाढ़ से बदल रही जंगल की आबोहवा
जंगल में लंबे अरसे तक पानी भरा रहने से घास के मैदान कम हो रहे हैं। उनकी जगह दूसरी वनस्पतियां उग रही हैं। जंगल की पारिस्थितिकी बदल रही है। जलभराव से साल के जंगल सूख रहे हैं उनकी जगह जामुन, गुटैल आदि के जंगल खड़े हो रहे हैं। घास के मैदान कम होने से शाकाहारी पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा हो रही है। बाढ़ जंगल की जैव विविधता को तो प्रभावित कर ही रही है, वन्यजीवों की खाद्य श्रंखला पर भी असर पड़ रहा है। जंगल में जलभराव होने से जंगली जानवर बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में शिकारियों का डर बना हुआ है।
बाढ़ जंगल की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में जंगल में बाढ़ का प्रकोप बढ़ने से वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है। जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ रहा है।
दुधवा नेशनल पार्क और किशपुर सेंक्चुरी का कुछ हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पार्क कर्मी लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
सुनील चौधरी, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड डायरेक्टर
दुधवा टाइगर रिजर्व
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उत्तर खीरी वन प्रभाग का नवीन पौधरोपण भी डूबा
जिले में आई भीषण बाढ़ से जंगल का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है। शारदा, मोहाना और सुहेली नदियों का पानी दुधवा नेशनल पार्क के सठियाना, गौरीफंटा वनकटी और दुधवा रेंज के इलाके में भरा हुआ है। वहीं किशनपुर सेंक्चुरी में उफनाई शारदा नदी ताल में मिल गई है। दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी के करीब 270 हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ का पानी है। उधर उत्तर खीरी वन प्रभाग के बेलरायां, संपूर्णानगर रेंज बाढ़ से प्रभावित हैं। उत्तर खीरी वन प्रभाग को करीब 100 हेक्टेयर का नवीन पौधरोपण भी पानी में डूब गया है।
शारदा के अलावा मोहाना और सुहेली नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ से वन और वन्यजीवों को भारी नुकसान हो रहा है। पिछले बीस पच्चीस वर्षों में भारत नेपाल सीमा पर बाढ़ का प्रकोप ज्यादा बढ़ा है। इस साल भी अगस्त के मध्य में ही दुधवा नेशनल पार्क और उत्तर खीरी वन प्रभाग का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे साल के पेड़ों के सूखने और गिरने से करोड़ों रुपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बाढ़ के चलते वन्यजीवों के आवास और चारे की समस्या भी पैदा हो गई है। वन्यजीव सुरक्षित स्थानों पर पलायन के प्रयास में शिकारियों के निशाने पर आ रहे हैं।
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डीएफओ नार्थ डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि उत्तर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर, बेलरायां और धौरहरा रेंज में इसी साल किया करीब 100 हेक्टेयर पौधरोपण बाढ़ के पानी में डूब गया है। इसके अलावा करीब 220 हेक्टेयर पुराना पौधरोपण और जंगल क्षेत्र में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है।
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बाढ़ से बदल रही जंगल की आबोहवा
जंगल में लंबे अरसे तक पानी भरा रहने से घास के मैदान कम हो रहे हैं। उनकी जगह दूसरी वनस्पतियां उग रही हैं। जंगल की पारिस्थितिकी बदल रही है। जलभराव से साल के जंगल सूख रहे हैं उनकी जगह जामुन, गुटैल आदि के जंगल खड़े हो रहे हैं। घास के मैदान कम होने से शाकाहारी पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा हो रही है। बाढ़ जंगल की जैव विविधता को तो प्रभावित कर ही रही है, वन्यजीवों की खाद्य श्रंखला पर भी असर पड़ रहा है। जंगल में जलभराव होने से जंगली जानवर बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में शिकारियों का डर बना हुआ है।
बाढ़ जंगल की पारिस्थितिकी के लिए बड़ा खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में जंगल में बाढ़ का प्रकोप बढ़ने से वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है। जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ रहा है।
दुधवा नेशनल पार्क और किशपुर सेंक्चुरी का कुछ हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पार्क कर्मी लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
सुनील चौधरी, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड डायरेक्टर
दुधवा टाइगर रिजर्व