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फील्ड यूनिट बुलाई न ही कराई पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी
टीएन अवस्थी/लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 02 Jul 2016 10:43 PM IST
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बच्ची से रेप के बाद हत्या का मामला..
घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में पुलिस रही लापरवाह
लापरवाही से पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
मासूम बालिकाओं के साथ हैवानियत की घटनाओं के प्रति खीरी पुलिस कितनी गंभीर है, इसकी बानगी पसगवां थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बच्ची की रेप के बाद हत्या के मामले में देखने को मिली। पुलिस ने न तो पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई और न ही फील्ड यूनिट को बुलाकर मौके से साक्ष्य जुटाए। वह भी तब, जब पुलिस महानिदेशक के साफ आदेश हैं कि रेप, रेप के बाद हत्या, बंदी या कैदी की मौत, बड़ी डकैती आदि मामले की पुलिस हर हाल में वीडियोग्राफी कराएगी और फील्ड यूनिट को बुलाकर साक्ष्य जुटाएगी। इससे पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आठ वर्षीय बच्ची के साथ दरिंदे ने पहले हैवानियत की। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस कर रेप किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे सीओ रामशंकर सिंह, एसओ पसगवां विजय प्रताप यादव और बरवर चौकी इंचार्ज ने जल्दबाजी दिखाई और आननफानन में शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने मौके पर शव के पास पड़े खून को तो सैंपल ले लिया और मुंह में ठूंसा गया अंडरवियर बच्ची को पहनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन पुलिस ने फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की जरूरत नहीं समझी। इतना ही नहीं बच्ची के शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई। वहीं जबकि शासन और डीजीपी के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे मामलों की हर हाल में वीडियोग्राफी कराई जाए और फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाएं जाएं, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। इससे साफ है कि खीरी पुलिस के लिए शासन और डीजीपी के आदेश कोई मायने नहीं रखते हैं।
सीओ और एसओ ने बोला झूठ
जब सीओ मोहम्मदी और एसओ पसगवां को मोबाइल पर कॉल कर वैज्ञानिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के बारे में पूछा तो सीओ रामशंकर सिंह का कहना था कि पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, जबकि एसओ विजय प्रताप से जब वीडियोग्राफी के बाबत पूछा गया तो बोले कि हो रही होगी। जब पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से पूछा गया तो दोनों जिम्मेदार अफसरों का झूठ सामने आ गया। डॉक्टरों ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम कीवीडियोग्राफी नहीं हुई है।
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शव गायब करने की फिराक में तो नहीं था आरोपी
जंगबहादुर गंज। ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल से मात्र 20 मीटर की दूरी पर स्थित खेत में आरोपी के फूफा की झोपड़ी पड़ी है। मृतका के परिवार वालों का कहना है कि आरोपी बालिका के शव को गायब करने की फिराक में था, लेकिन ग्रामीणों के मौके पर पहुंच जाने से वह सफल नहीं हो सका। आरोपी ग्रामीण के सामने से ही खेत से निकलकर भागा था।
पांच बहनों में सबसे छोटी थी मृतका
जंगबहादुरगंज। हैवानियत की शिकार हुई आठ वर्षीय बालिका कक्षा चार की छात्रा थी। वह गांव के ही स्कूल में पढ़ती थी। चार बहनों और एक स्वभाव की होने के कारण वह सबकी दुलारी थी। उसकी मौत से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना को लेकर ग्रामीणों में भी रोष है।
शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं कराना गंभीर बात है। कहीं न कहीं लापरवाही तो है। मैं पता कर रहा हूं कि क्यों नहीं कराई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद रेप और पाक्सो की धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
-दीपेंद्र नाथ चौधरी, एएसपी
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घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में पुलिस रही लापरवाह
लापरवाही से पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
मासूम बालिकाओं के साथ हैवानियत की घटनाओं के प्रति खीरी पुलिस कितनी गंभीर है, इसकी बानगी पसगवां थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बच्ची की रेप के बाद हत्या के मामले में देखने को मिली। पुलिस ने न तो पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई और न ही फील्ड यूनिट को बुलाकर मौके से साक्ष्य जुटाए। वह भी तब, जब पुलिस महानिदेशक के साफ आदेश हैं कि रेप, रेप के बाद हत्या, बंदी या कैदी की मौत, बड़ी डकैती आदि मामले की पुलिस हर हाल में वीडियोग्राफी कराएगी और फील्ड यूनिट को बुलाकर साक्ष्य जुटाएगी। इससे पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आठ वर्षीय बच्ची के साथ दरिंदे ने पहले हैवानियत की। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस कर रेप किया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे सीओ रामशंकर सिंह, एसओ पसगवां विजय प्रताप यादव और बरवर चौकी इंचार्ज ने जल्दबाजी दिखाई और आननफानन में शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने मौके पर शव के पास पड़े खून को तो सैंपल ले लिया और मुंह में ठूंसा गया अंडरवियर बच्ची को पहनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन पुलिस ने फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की जरूरत नहीं समझी। इतना ही नहीं बच्ची के शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई। वहीं जबकि शासन और डीजीपी के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे मामलों की हर हाल में वीडियोग्राफी कराई जाए और फील्ड यूनिट को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाएं जाएं, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। इससे साफ है कि खीरी पुलिस के लिए शासन और डीजीपी के आदेश कोई मायने नहीं रखते हैं।
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सीओ और एसओ ने बोला झूठ
जब सीओ मोहम्मदी और एसओ पसगवां को मोबाइल पर कॉल कर वैज्ञानिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के बारे में पूछा तो सीओ रामशंकर सिंह का कहना था कि पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, जबकि एसओ विजय प्रताप से जब वीडियोग्राफी के बाबत पूछा गया तो बोले कि हो रही होगी। जब पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से पूछा गया तो दोनों जिम्मेदार अफसरों का झूठ सामने आ गया। डॉक्टरों ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम कीवीडियोग्राफी नहीं हुई है।
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शव गायब करने की फिराक में तो नहीं था आरोपी
जंगबहादुर गंज। ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल से मात्र 20 मीटर की दूरी पर स्थित खेत में आरोपी के फूफा की झोपड़ी पड़ी है। मृतका के परिवार वालों का कहना है कि आरोपी बालिका के शव को गायब करने की फिराक में था, लेकिन ग्रामीणों के मौके पर पहुंच जाने से वह सफल नहीं हो सका। आरोपी ग्रामीण के सामने से ही खेत से निकलकर भागा था।
पांच बहनों में सबसे छोटी थी मृतका
जंगबहादुरगंज। हैवानियत की शिकार हुई आठ वर्षीय बालिका कक्षा चार की छात्रा थी। वह गांव के ही स्कूल में पढ़ती थी। चार बहनों और एक स्वभाव की होने के कारण वह सबकी दुलारी थी। उसकी मौत से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना को लेकर ग्रामीणों में भी रोष है।
शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं कराना गंभीर बात है। कहीं न कहीं लापरवाही तो है। मैं पता कर रहा हूं कि क्यों नहीं कराई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद रेप और पाक्सो की धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
-दीपेंद्र नाथ चौधरी, एएसपी