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एफसीआई का पुराने बोरों में भरा गेहूं उतरवाने से इंकार, ट्रक लौटाया
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 19 May 2016 10:10 PM IST
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गेहूं
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- 18 हजार क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर अटका, खरीद बंद
- केंद्र प्रभारी ने एडीएम को पत्र देकर लगाई गुहार
- मोहम्मदी की सहकारी समिति विचपरी का मामला
मोहम्मदी ब्लाक के विचपरी साधन सहकारी समिति में खोले गए पीसीएफ के क्रय केंद्र पर खरीदा गया गेहूं प्रबंधक की लापरवाही के चलते गले की हड्डी साबित हो रहा है। पीसीएफ ने खरीफ सीजन के पुराने बोरों में रबी सीजन में खरीदा गया गेहूं पैक करा दिया, जिसकी डिलीवरी एफसीआई डिपो पर पहुंची तो वहां कर्मचारियों ने गेहूं उतारने से मना कर दिया हैै। इससे 18 हजार क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर अटक गया है, जिससे केंद्र प्रभारी ने खरीद बंद कर दी है। केंद्र प्रभारी/सचिव ने एडीएम को प्रार्थना पत्र देकर गेहूं का एफसीआई डिपो पर उतार करवाने की मांग की है।
बता दें कि गेहूं का उतार कराने वाली केंद्रीय पूल की एजेंसी एफसीआई ने पुराने बोरों में गेहूं की डिलीवरी लेने से पूर्व में ही मना कर दिया था। इसके बावजूद स्टेट की एजेंसी पीसीएफ ने क्रय केंद्रों पर खरीफ सीजन के पुराने बोरे भेज दिए। मोहम्मदी ब्लाक के साधन सहकारी समिति विचपरी का मामला फंस गया है, जहां पुराने बोरों में 18 हजार क्विंटल गेहूं पैक किया गया है। इन बोरों की डिलीवरी जब एफसीआई के गोदाम पर भेजी गई, तो वहां कर्मचारियों ने पुराने बोरे देखकर डिलीवरी लेने से मना कर दिया। लिहाजा गेहूं को वापस क्रय केंद्र ले जाया गया, जिससे दुगुना भाड़ा भी लग गया है। सचिव अरविंद कुमार गुप्ता ने एडीएम/जिला गेहूं खरीद अधिकारी को पत्र देकर गुहार लगाई है, जिसमें कहा गया है कि ज्यादा दिन तक केंद्र पर गेहूं रखने से गुणवत्ता खराब हो सकती है। वहीं बोरों को खोलवाकर नए बोरों में पुन: सिलाई कराने पर ज्यादा धन का व्यय होने से केंद्र को लंबा घाटा उठाना पड़ सकता हैै। इस बाबत पीसीएफ प्रबंधक मीनाक्षी यादव ने ऐसी जानकारी होने से ही इंकार किया है।
इस मामले में एफसीआई अधिकारियों से बातचीत कर हल निकाला जाएगा। पीसीएफ को पूर्व में ही एफसीआई को सूचना देकर सत्यापन कराना चाहिए था। अब सत्यापन कराने के बाद ही डिलीवरी देने के प्रयास किए जाएंगे। -कौशल देव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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- केंद्र प्रभारी ने एडीएम को पत्र देकर लगाई गुहार
- मोहम्मदी की सहकारी समिति विचपरी का मामला
मोहम्मदी ब्लाक के विचपरी साधन सहकारी समिति में खोले गए पीसीएफ के क्रय केंद्र पर खरीदा गया गेहूं प्रबंधक की लापरवाही के चलते गले की हड्डी साबित हो रहा है। पीसीएफ ने खरीफ सीजन के पुराने बोरों में रबी सीजन में खरीदा गया गेहूं पैक करा दिया, जिसकी डिलीवरी एफसीआई डिपो पर पहुंची तो वहां कर्मचारियों ने गेहूं उतारने से मना कर दिया हैै। इससे 18 हजार क्विंटल गेहूं क्रय केंद्र पर अटक गया है, जिससे केंद्र प्रभारी ने खरीद बंद कर दी है। केंद्र प्रभारी/सचिव ने एडीएम को प्रार्थना पत्र देकर गेहूं का एफसीआई डिपो पर उतार करवाने की मांग की है।
बता दें कि गेहूं का उतार कराने वाली केंद्रीय पूल की एजेंसी एफसीआई ने पुराने बोरों में गेहूं की डिलीवरी लेने से पूर्व में ही मना कर दिया था। इसके बावजूद स्टेट की एजेंसी पीसीएफ ने क्रय केंद्रों पर खरीफ सीजन के पुराने बोरे भेज दिए। मोहम्मदी ब्लाक के साधन सहकारी समिति विचपरी का मामला फंस गया है, जहां पुराने बोरों में 18 हजार क्विंटल गेहूं पैक किया गया है। इन बोरों की डिलीवरी जब एफसीआई के गोदाम पर भेजी गई, तो वहां कर्मचारियों ने पुराने बोरे देखकर डिलीवरी लेने से मना कर दिया। लिहाजा गेहूं को वापस क्रय केंद्र ले जाया गया, जिससे दुगुना भाड़ा भी लग गया है। सचिव अरविंद कुमार गुप्ता ने एडीएम/जिला गेहूं खरीद अधिकारी को पत्र देकर गुहार लगाई है, जिसमें कहा गया है कि ज्यादा दिन तक केंद्र पर गेहूं रखने से गुणवत्ता खराब हो सकती है। वहीं बोरों को खोलवाकर नए बोरों में पुन: सिलाई कराने पर ज्यादा धन का व्यय होने से केंद्र को लंबा घाटा उठाना पड़ सकता हैै। इस बाबत पीसीएफ प्रबंधक मीनाक्षी यादव ने ऐसी जानकारी होने से ही इंकार किया है।
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इस मामले में एफसीआई अधिकारियों से बातचीत कर हल निकाला जाएगा। पीसीएफ को पूर्व में ही एफसीआई को सूचना देकर सत्यापन कराना चाहिए था। अब सत्यापन कराने के बाद ही डिलीवरी देने के प्रयास किए जाएंगे। -कौशल देव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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