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प्रधान की हत्या में आठ को उम्रकैद, जुर्माना भी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 30 Apr 2017 12:02 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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पांच साल पहले दलित ग्राम प्रधान की हुई थी हत्या
कठपुतली प्रधान बनने से इंकार करने पर दलित प्रधान की हत्या किए जाने के मामले में अदालत ने पूर्व प्रधान सहित आठ को दोषी पाया है। अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दो सगे भाईयों सहित आठ हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव कुकुरगोती में नई आरक्षण व्यवस्था के चलते जब प्रधान की सीट दलित के लिए आरक्षित हो गई तो कुछ लोगों ने दलित ओमकार को भी चुनाव लड़वा दिया। ओमकार प्रधानी का चुनाव जीत भी गया, लेकिन कुछ समय बाद जब उसे कठपुतली प्रधान बनाने के लिए बंदिशें शुरू हुईं तो उसने खिलाफत कर दी। इसी से नाराज होकर उसकी हत्या की साजिश बनने लगी।
आरोप है कि 28 सितंबर 2012 को जब गांव के मजरा देवीबोझी में खड़ंजा लग रहा था, तो इसके लिए ईंट की व्यवस्था करने ग्राम प्रधान ओमकार अपने साथी गुड्डू यादव और वेद्रपकाश के साथ मोटरसाइकिल से अरुण वर्मा के ईंट भट्टे पर आर्डर देने गया था। आर्डर देने के बाद जब तीनों लोग मोटर साइकिल से वापस आ रहे थे तभी पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह, अपने भाई संग्राम सिंह और साथी राममिलन, विनोद कुमार, लालाराम, गुड्डन, कालीचरन और विजयपाल के साथ धावा बोल दिया। हत्याभियुक्तों ने देशी रायफल तमंचा, अद्धी से कई राउंड फायरिंग कर ओमकार को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया। जबकि उसका साथी गुड्डू यादव घायल हो गया और वेदप्रकाश अपनी जान बचाने के लिए मोटर साइकिल छोड़कर भाग गया था।
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इस मामले में ओमकार के भाई ने आठ लोगों के साथ ही दृगपाल को भी हत्या की साजिश रचने के लिए नामजद किया था। पुलिस ने भी उसे सम्मलित करते हुए कुल नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालती सुनवाई के दौरान गुड्डू यादव, रामनरेश, अवधेश कुमार, वेदप्रकाश, डा. अनिल कुमार डा. वीके वर्मा, एसआई साधूसरन यादव सहित कुल 13 गवाह पेश हुए थे, अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हत्याभियुक्त महेंद्र सिंह, संग्राम सिंह, राममिलन, विनोद कुमार, गुड्डन, कालीचरन, विजयपाल को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि दृगपाल को साजिश में शामिल होने संबंधी साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
और हारते-हारते जीत गई सच्चाई
दिन-दहाडे़ हुए प्रधान हत्याकांड के मामले में भी आरोपियों ने बचने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी, उनका प्रभाव ही था कि स्वयं प्रधान ओमकार का भाई वादी मुकदमा रामनरेश अदालत में गवाही के दौरान पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गया था, लेकिन इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने हार नहीं मानी बल्कि मेहनत से जुटा रहा लिहाजा अदालत की नजरों से सच्चाई बच न सकी।
नाजायज शस्त्र बरामदगी में भी जुर्माना
इस मामले में हत्याभियुक्त राममिलन, विनोद कुमार लालाराम, गुड्डन और विजयपाल को नाजायज असलहा बरामद होने के कारण अलग से कैद और आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, इस तरह इन लोगों को 49-49 हजार रुपये का जुर्माना अदा करना होगा। अदालत ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि वसूले गए जुर्माने में से दो तिहाई रकम मृतक के परिजनों को दी जाएगी।
हत्यारोपी चार भाईयों को आजीवन कारावास
मोहम्मदी। एडीजे कोर्ट ने दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है।
एपीओ वीरेश सिंह के अनुसार पसगवां थानांतर्गत ग्राम सुनौरिया निवासी 45 वर्षीय शहरूम 28 फरवरी 2007 को करीब 12 बजे दोपहर ग्राम मोहिउद्दीनपुर गन्ना क्रय केंद्र आ रहा था तभी गांव के मोहम्मद फहीम, मोहम्मद सिकन्दर, मोहम्मद मोईन, निसारूद्दीन ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। गांव के बीचोबीच दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड में मृतक शहरूम का भाई जुबैर भी साथ में था। जिसमें जुबैर ने चारों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दस साल चले मुकदमे के बाद एडीजे संजय खरे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के पश्चात 28 अप्रैल को ही उक्त चारों के खिलाफ दोष सिद्ध का फैसला सुनाते हुए सजा की तारीख एक दिन के लिए बढ़ा दी थी, शनिवार 29 अप्रैल को एडीजे कोर्ट ने मोहम्मद फहीम, मोहम्मद सिकन्दर, मोहम्मद मोईन और निसारूद्दीन के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा चारों अभियुक्तों पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना ठोंका।
अभियुक्तों में मोहम्मद सिकन्दर और मोहम्मद मोईन दोनों सगे भाई है, जबकि फहीम चचेरा तथा निसारूद्दीन फुफेरा भाई है। घटना का एक दिलचस्प पहलू यह है कि पुलिस ने अपनी विवेचना में आलाकत्ल न बरामद कर अभियुक्तों की निशानदेही पर तीन तमंचे बरामद कर फहीम, सिकन्दर और निसारूद्दीन के पास दर्शाए थे, कोर्ट ने इस मामले में तीनों को धारा 3/25 के आरोप से मुक्त कर दिया है। जबकि हत्या के षड़यंत्र और हत्या कारित के मामले में दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्या का कारण गांव में घूरे को लेकर हुआ विवाद पुरानी रंजिश में तब्दील हो गया था।
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कठपुतली प्रधान बनने से इंकार करने पर दलित प्रधान की हत्या किए जाने के मामले में अदालत ने पूर्व प्रधान सहित आठ को दोषी पाया है। अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दो सगे भाईयों सहित आठ हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव कुकुरगोती में नई आरक्षण व्यवस्था के चलते जब प्रधान की सीट दलित के लिए आरक्षित हो गई तो कुछ लोगों ने दलित ओमकार को भी चुनाव लड़वा दिया। ओमकार प्रधानी का चुनाव जीत भी गया, लेकिन कुछ समय बाद जब उसे कठपुतली प्रधान बनाने के लिए बंदिशें शुरू हुईं तो उसने खिलाफत कर दी। इसी से नाराज होकर उसकी हत्या की साजिश बनने लगी।
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आरोप है कि 28 सितंबर 2012 को जब गांव के मजरा देवीबोझी में खड़ंजा लग रहा था, तो इसके लिए ईंट की व्यवस्था करने ग्राम प्रधान ओमकार अपने साथी गुड्डू यादव और वेद्रपकाश के साथ मोटरसाइकिल से अरुण वर्मा के ईंट भट्टे पर आर्डर देने गया था। आर्डर देने के बाद जब तीनों लोग मोटर साइकिल से वापस आ रहे थे तभी पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह, अपने भाई संग्राम सिंह और साथी राममिलन, विनोद कुमार, लालाराम, गुड्डन, कालीचरन और विजयपाल के साथ धावा बोल दिया। हत्याभियुक्तों ने देशी रायफल तमंचा, अद्धी से कई राउंड फायरिंग कर ओमकार को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया। जबकि उसका साथी गुड्डू यादव घायल हो गया और वेदप्रकाश अपनी जान बचाने के लिए मोटर साइकिल छोड़कर भाग गया था।
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इस मामले में ओमकार के भाई ने आठ लोगों के साथ ही दृगपाल को भी हत्या की साजिश रचने के लिए नामजद किया था। पुलिस ने भी उसे सम्मलित करते हुए कुल नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालती सुनवाई के दौरान गुड्डू यादव, रामनरेश, अवधेश कुमार, वेदप्रकाश, डा. अनिल कुमार डा. वीके वर्मा, एसआई साधूसरन यादव सहित कुल 13 गवाह पेश हुए थे, अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हत्याभियुक्त महेंद्र सिंह, संग्राम सिंह, राममिलन, विनोद कुमार, गुड्डन, कालीचरन, विजयपाल को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि दृगपाल को साजिश में शामिल होने संबंधी साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
और हारते-हारते जीत गई सच्चाई
दिन-दहाडे़ हुए प्रधान हत्याकांड के मामले में भी आरोपियों ने बचने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी, उनका प्रभाव ही था कि स्वयं प्रधान ओमकार का भाई वादी मुकदमा रामनरेश अदालत में गवाही के दौरान पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गया था, लेकिन इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने हार नहीं मानी बल्कि मेहनत से जुटा रहा लिहाजा अदालत की नजरों से सच्चाई बच न सकी।
नाजायज शस्त्र बरामदगी में भी जुर्माना
इस मामले में हत्याभियुक्त राममिलन, विनोद कुमार लालाराम, गुड्डन और विजयपाल को नाजायज असलहा बरामद होने के कारण अलग से कैद और आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, इस तरह इन लोगों को 49-49 हजार रुपये का जुर्माना अदा करना होगा। अदालत ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि वसूले गए जुर्माने में से दो तिहाई रकम मृतक के परिजनों को दी जाएगी।
हत्यारोपी चार भाईयों को आजीवन कारावास
मोहम्मदी। एडीजे कोर्ट ने दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है।
एपीओ वीरेश सिंह के अनुसार पसगवां थानांतर्गत ग्राम सुनौरिया निवासी 45 वर्षीय शहरूम 28 फरवरी 2007 को करीब 12 बजे दोपहर ग्राम मोहिउद्दीनपुर गन्ना क्रय केंद्र आ रहा था तभी गांव के मोहम्मद फहीम, मोहम्मद सिकन्दर, मोहम्मद मोईन, निसारूद्दीन ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। गांव के बीचोबीच दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड में मृतक शहरूम का भाई जुबैर भी साथ में था। जिसमें जुबैर ने चारों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दस साल चले मुकदमे के बाद एडीजे संजय खरे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के पश्चात 28 अप्रैल को ही उक्त चारों के खिलाफ दोष सिद्ध का फैसला सुनाते हुए सजा की तारीख एक दिन के लिए बढ़ा दी थी, शनिवार 29 अप्रैल को एडीजे कोर्ट ने मोहम्मद फहीम, मोहम्मद सिकन्दर, मोहम्मद मोईन और निसारूद्दीन के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा चारों अभियुक्तों पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना ठोंका।
अभियुक्तों में मोहम्मद सिकन्दर और मोहम्मद मोईन दोनों सगे भाई है, जबकि फहीम चचेरा तथा निसारूद्दीन फुफेरा भाई है। घटना का एक दिलचस्प पहलू यह है कि पुलिस ने अपनी विवेचना में आलाकत्ल न बरामद कर अभियुक्तों की निशानदेही पर तीन तमंचे बरामद कर फहीम, सिकन्दर और निसारूद्दीन के पास दर्शाए थे, कोर्ट ने इस मामले में तीनों को धारा 3/25 के आरोप से मुक्त कर दिया है। जबकि हत्या के षड़यंत्र और हत्या कारित के मामले में दोषी मानते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्या का कारण गांव में घूरे को लेकर हुआ विवाद पुरानी रंजिश में तब्दील हो गया था।