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दरिंदों की हवस की आग में झुलस रहीं बेटियां
टीएन अवस्थी/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 24 May 2016 10:43 PM IST
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रेप
- फोटो : अमर उजाला
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स्लग : बच्ची से दरिंदगी का मामला
बड़े मामलों में भी पुलिस की संवेदनहीनता से बढ़ा खौफ
आरोपी गिरफ्तार लेकिन खून से सने कपड़े नहीं जब्त किए
खून से सने कपड़े देखकर ही हुआ था आरोपी पर शक
घर के बाहर ही नहीं अंदर भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। हवस के भेड़िए कब उनको कहां नोचने आ धमकें, यह डर अब हर मां-बाप को अंदर तक खाए जा रहा है। शहर में बढ़ रहीं घटनाएं और घटनाओं पर पुलिस का रवैया लोगों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है। यूं तो दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद सरकार ने महिला उत्पीड़न संबंधी कानूनों में बदलाव किया और पाक्सो जैसे अधिनियम लागू किए। पाक्सो जैसा कठोर कानून अमल में आने के बाद भी दरिंदे महिलाओं और बालिकाओं को हवस का शिकार बनाने से बाज नहीं आ रहे। उस पर पुलिस की संवेदनहीनता से भी लोग अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैं।
ऐसा ही रविवार रात को देखने को मिला। शहर की एक गरीब परिवार की बेटी के साथ हुई घटना में। बालिका की रेप के बाद हत्या की घटना से लोग दहल उठे, लेकिन दिलों को झकझोर देने वाली इस घटना का असर एसपी और एएसपी पर नहीं दिखा। जब हालात बेकाबू हुए और भीड़ कुछ भी करने पर उतर आई तो तब खाकी का पसीना छूटा। तीन घंटे बाद एएसपी एपी सिंह कई थानों की फोर्स, क्यूआरटी और पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे। यही नहीं शुरुआती दौर से लापरवाह बनी पुलिस ने मौके से साक्ष्य भी नहीं जुटाए। खून के सने आरोपी के कपड़े न तो कब्जे में लिए और न ही फिंगर एक्सपर्ट को मौके पर भेजकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। दूसरे दिन भी पुलिस का रवैया ऐसा ही रहा। फील्ड यूनिट को भी मौके पर भेजकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की जरूरत नहीं समझी। आरोपी के खून से सने कपड़े भी बरामद करने के लिए पुलिस ने कोई प्रयास नहीं किए। पुलिस के इस रवैये से लोगों में रोष है। परिवार वाले और ग्रामीण आरोपी को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। घर वालों का कहना है कि आरोपी पुलिस का मुखबिर है इसलिए पुलिस उसे बचाने में जुटी हुई है।
इन मामलों में भी पुलिस ने बरती ढिलाई
केस- एक
थाना पसगवां क्षेत्र में लखनऊ-दिल्ली हाइवे पर 21 मई की सुबह खेत में लगे पेड़ से बंधा महिला का नग्न शव बरामद हुआ था। उसकी भी बेरहमी से रेप के बाद हत्या की गई थी। पुलिस तीसरे दिन भी महिला की शिनाख्त नहीं करा सकी है। पुलिस मामले से पल्ला झाड़ने के लिए हत्या अन्य स्थान पर कर शव यहां फेंकने की बात कह रही है।
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केस- दो
सदर कोतवाली क्षेत्र के महेवागंज पुलिस चौकी क्षेत्र में टेंपो चालक ने दो जून को 13 वर्षीय छात्रा का अपहरण कर लिया था। तीन दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बरामद किया था। पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की और आरोपियों को छोड़ दिया था। इस मामले की जांच एसपी के आदेश पर सीओ सिटी कर रहे हैं।
शव कुएं में काफी गहराई में था, इसलिए फील्ड यूनिट साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। आरोपी पकड़ लिया गया है। उसने अपने कपड़े बदल लिए थे। पूछताछ कर खून से सने कपड़े बरामद किए जाएंगे। सवाल अधिकारियों के मौके पर पहुंचने का है तो शव निकलने के बाद ही अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे।
- अखिलेश चौरसिया, एसपी
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बड़े मामलों में भी पुलिस की संवेदनहीनता से बढ़ा खौफ
आरोपी गिरफ्तार लेकिन खून से सने कपड़े नहीं जब्त किए
खून से सने कपड़े देखकर ही हुआ था आरोपी पर शक
घर के बाहर ही नहीं अंदर भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। हवस के भेड़िए कब उनको कहां नोचने आ धमकें, यह डर अब हर मां-बाप को अंदर तक खाए जा रहा है। शहर में बढ़ रहीं घटनाएं और घटनाओं पर पुलिस का रवैया लोगों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है। यूं तो दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद सरकार ने महिला उत्पीड़न संबंधी कानूनों में बदलाव किया और पाक्सो जैसे अधिनियम लागू किए। पाक्सो जैसा कठोर कानून अमल में आने के बाद भी दरिंदे महिलाओं और बालिकाओं को हवस का शिकार बनाने से बाज नहीं आ रहे। उस पर पुलिस की संवेदनहीनता से भी लोग अपने को कमजोर महसूस कर रहे हैं।
ऐसा ही रविवार रात को देखने को मिला। शहर की एक गरीब परिवार की बेटी के साथ हुई घटना में। बालिका की रेप के बाद हत्या की घटना से लोग दहल उठे, लेकिन दिलों को झकझोर देने वाली इस घटना का असर एसपी और एएसपी पर नहीं दिखा। जब हालात बेकाबू हुए और भीड़ कुछ भी करने पर उतर आई तो तब खाकी का पसीना छूटा। तीन घंटे बाद एएसपी एपी सिंह कई थानों की फोर्स, क्यूआरटी और पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे। यही नहीं शुरुआती दौर से लापरवाह बनी पुलिस ने मौके से साक्ष्य भी नहीं जुटाए। खून के सने आरोपी के कपड़े न तो कब्जे में लिए और न ही फिंगर एक्सपर्ट को मौके पर भेजकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। दूसरे दिन भी पुलिस का रवैया ऐसा ही रहा। फील्ड यूनिट को भी मौके पर भेजकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की जरूरत नहीं समझी। आरोपी के खून से सने कपड़े भी बरामद करने के लिए पुलिस ने कोई प्रयास नहीं किए। पुलिस के इस रवैये से लोगों में रोष है। परिवार वाले और ग्रामीण आरोपी को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। घर वालों का कहना है कि आरोपी पुलिस का मुखबिर है इसलिए पुलिस उसे बचाने में जुटी हुई है।
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इन मामलों में भी पुलिस ने बरती ढिलाई
केस- एक
थाना पसगवां क्षेत्र में लखनऊ-दिल्ली हाइवे पर 21 मई की सुबह खेत में लगे पेड़ से बंधा महिला का नग्न शव बरामद हुआ था। उसकी भी बेरहमी से रेप के बाद हत्या की गई थी। पुलिस तीसरे दिन भी महिला की शिनाख्त नहीं करा सकी है। पुलिस मामले से पल्ला झाड़ने के लिए हत्या अन्य स्थान पर कर शव यहां फेंकने की बात कह रही है।
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केस- दो
सदर कोतवाली क्षेत्र के महेवागंज पुलिस चौकी क्षेत्र में टेंपो चालक ने दो जून को 13 वर्षीय छात्रा का अपहरण कर लिया था। तीन दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बरामद किया था। पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की और आरोपियों को छोड़ दिया था। इस मामले की जांच एसपी के आदेश पर सीओ सिटी कर रहे हैं।
शव कुएं में काफी गहराई में था, इसलिए फील्ड यूनिट साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। आरोपी पकड़ लिया गया है। उसने अपने कपड़े बदल लिए थे। पूछताछ कर खून से सने कपड़े बरामद किए जाएंगे। सवाल अधिकारियों के मौके पर पहुंचने का है तो शव निकलने के बाद ही अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे।
- अखिलेश चौरसिया, एसपी