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अपनी ही कार्रवाई में फंसती जा रही है अमीरनगर पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो अमीरनगर (खीरी)।
Updated Sat, 29 Oct 2016 08:04 PM IST
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तीसरे दिन बताया, तस्करों पर लिखी रिपोर्ट
सपा विधायक की मौजूदगी में पुलिस चौकी घेरने का मामला
मांस के साथ दो आरोपियों को पकड़ने और सपा विधायक विनय तिवारी के हस्तक्षेप के बाद बैकफुट पर आने वाली चौकी पुलिस अब सबकुछ ठीक करने में जुट गई है। चौकी इंचार्ज रवि बालियान ने शनिवार को तीसरे दिन बताया कि मांस बेचकर तस्करी करने वाले आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गुरुवार को चौकी पुलिस ने दो लोगों को मांस के साथ पकड़ा था। पकड़े गए युवकों के निर्दोष बताने पर ग्रामीणों ने सपा विधायक विनय तिवारी के साथ चौकी घेर ली थी और हंगामा करते हुए निर्दोषों को छोड़ने का दबाव बनाया था। शुरुआत में तो पुलिस ने पकड़े गए युवकों के पास से ही मांस बरामदगी का दावा किया था, लेकिन जब उन्होंने उसे खरीदने की बात कही तो पुलिस जनता और विधायक के दबाव में आकर चुप हो गई थी। इसके बाद दोनों आरोपियों को छुड़ा लिया गया था। मामला शांत होने के बाद एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने चौकी पहुंचकर मामले की जांच की थी। बाद में पुलिस ने गांव मोहम्मदपुर निवासी बाबू और दानिश के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम का मामला दर्ज किया गया था। हालांकि शुक्रवार तक पुलिस मामले में कुछ भी नहीं बताना चाह रही थी। यहां तक कि पुलिस इस सवाल पर भी चुप थी कि नामजद आरोपी वही दोनों हैं, जिन्हें विधायक छुड़ा ले गए थे? शनिवार को पुलिस ने चुप्पी तोड़ी और चौकी इंचार्ज रवि बालियान ने बताया कि नामजद आरोपी पशु तस्कर हैं, जो मौके से भाग निकले थे। चौकी पर लाए गए युवकों को उन्होंने फिलहाल निर्दोष करार दिया है। हालांकि पुलिस अपने लिखे इस मुकदमे में खुद ही फंसती नजर आ रही है। वजह है वादी एचसीपी रजनीश कुमार का दर्ज कराई रिपोर्ट में कहना है, मुखबिर की सूचना मिली थी कि गांव छतुरी के पास पशु को काटा जा रहा है। वह मौके पर पहुंचे तो गांव मोहम्मदपुर निवासी दोनो आरोपी भागते दिखे। चूंकि दोनों पशु मांस बेचने का काम करते हैं, इसलिए उन्हें पहचान लिया। अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस तस्करों को पहचानती थी तो अमीरनगर निवासी दोनों युवकों को पुलिस चौकी क्यों पकड़ ले गई? यहां तक कि विधायक के पहुंचने के बाद भी पुलिस उन्हीं को आरोपी बता रही थी, जिन्हें अब निर्दोष करार दिया है। कुल मिलाकर पुलिस अपनी ही कार्रवाई में फंसती नजर आ रही है।
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तो निर्दोषों पर कार्रवाई कर देती पुलिस
अमीरनगर पुलिस का कारनामा तो देखिए, जिन युवकों को चौकी ले गई। उन्हें तब तक दोषी बताती रही, जब तक लोगों ने विधायक के साथ बवाल नहीं कर दिया। आखिर पुलिस बैक फुट पर आई और अब उन्हें निर्दोष ही नहीं बताने लगी, बल्कि जिन पर मुकदमा दर्ज किया, उन्हें तहरीर में ही पहचानने का दावा तक ठोक दिया। यदि पुलिस के मुकदमे को सही मानें तो उन युवकों को चौकी क्यों ले जाया गया? इससे विधायक का वह आरोप भी सही साबित होता नजर आता है, जिसमें उन्होंने अमीरनगर पुलिस पर जनता को परेशान करने का आरोप लगाया था। कुल मिलाकर यदि विधायक मामले में न पहुंचते तो पुलिस निर्दोषों पर ही कार्रवाई कर देती।
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कहीं दबाव में आकर धंधे से जुड़े लोगों को तो नहीं फांस रही पुलिस
एक सवाल यह भी उठता है कि जब पुलिस छुड़ाए गए आरोपियों को ही दोषी बता रही थी तो जिन दो आरोपियों को नामजद किया गया है, वह दोषी हैं अथवा नहीं? कहीं पुलिस पशु मांस तस्करी के धंधे से जुड़े लोगों फांसकर सबकुछ ठीक करने में तो नहीं लगी है? फिलहाल पुलिस के पास इन दोनों सवालों के जवाब नहीं हैं।
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एएसपी ने दोहराया, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
उधर एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने मामले में कुछ भी बोलने से इनकार किया। साथ ही इतना दोहराया कि पशु तस्करी के मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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सपा विधायक की मौजूदगी में पुलिस चौकी घेरने का मामला
मांस के साथ दो आरोपियों को पकड़ने और सपा विधायक विनय तिवारी के हस्तक्षेप के बाद बैकफुट पर आने वाली चौकी पुलिस अब सबकुछ ठीक करने में जुट गई है। चौकी इंचार्ज रवि बालियान ने शनिवार को तीसरे दिन बताया कि मांस बेचकर तस्करी करने वाले आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है।
गुरुवार को चौकी पुलिस ने दो लोगों को मांस के साथ पकड़ा था। पकड़े गए युवकों के निर्दोष बताने पर ग्रामीणों ने सपा विधायक विनय तिवारी के साथ चौकी घेर ली थी और हंगामा करते हुए निर्दोषों को छोड़ने का दबाव बनाया था। शुरुआत में तो पुलिस ने पकड़े गए युवकों के पास से ही मांस बरामदगी का दावा किया था, लेकिन जब उन्होंने उसे खरीदने की बात कही तो पुलिस जनता और विधायक के दबाव में आकर चुप हो गई थी। इसके बाद दोनों आरोपियों को छुड़ा लिया गया था। मामला शांत होने के बाद एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने चौकी पहुंचकर मामले की जांच की थी। बाद में पुलिस ने गांव मोहम्मदपुर निवासी बाबू और दानिश के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम का मामला दर्ज किया गया था। हालांकि शुक्रवार तक पुलिस मामले में कुछ भी नहीं बताना चाह रही थी। यहां तक कि पुलिस इस सवाल पर भी चुप थी कि नामजद आरोपी वही दोनों हैं, जिन्हें विधायक छुड़ा ले गए थे? शनिवार को पुलिस ने चुप्पी तोड़ी और चौकी इंचार्ज रवि बालियान ने बताया कि नामजद आरोपी पशु तस्कर हैं, जो मौके से भाग निकले थे। चौकी पर लाए गए युवकों को उन्होंने फिलहाल निर्दोष करार दिया है। हालांकि पुलिस अपने लिखे इस मुकदमे में खुद ही फंसती नजर आ रही है। वजह है वादी एचसीपी रजनीश कुमार का दर्ज कराई रिपोर्ट में कहना है, मुखबिर की सूचना मिली थी कि गांव छतुरी के पास पशु को काटा जा रहा है। वह मौके पर पहुंचे तो गांव मोहम्मदपुर निवासी दोनो आरोपी भागते दिखे। चूंकि दोनों पशु मांस बेचने का काम करते हैं, इसलिए उन्हें पहचान लिया। अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस तस्करों को पहचानती थी तो अमीरनगर निवासी दोनों युवकों को पुलिस चौकी क्यों पकड़ ले गई? यहां तक कि विधायक के पहुंचने के बाद भी पुलिस उन्हीं को आरोपी बता रही थी, जिन्हें अब निर्दोष करार दिया है। कुल मिलाकर पुलिस अपनी ही कार्रवाई में फंसती नजर आ रही है।
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तो निर्दोषों पर कार्रवाई कर देती पुलिस
अमीरनगर पुलिस का कारनामा तो देखिए, जिन युवकों को चौकी ले गई। उन्हें तब तक दोषी बताती रही, जब तक लोगों ने विधायक के साथ बवाल नहीं कर दिया। आखिर पुलिस बैक फुट पर आई और अब उन्हें निर्दोष ही नहीं बताने लगी, बल्कि जिन पर मुकदमा दर्ज किया, उन्हें तहरीर में ही पहचानने का दावा तक ठोक दिया। यदि पुलिस के मुकदमे को सही मानें तो उन युवकों को चौकी क्यों ले जाया गया? इससे विधायक का वह आरोप भी सही साबित होता नजर आता है, जिसमें उन्होंने अमीरनगर पुलिस पर जनता को परेशान करने का आरोप लगाया था। कुल मिलाकर यदि विधायक मामले में न पहुंचते तो पुलिस निर्दोषों पर ही कार्रवाई कर देती।
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कहीं दबाव में आकर धंधे से जुड़े लोगों को तो नहीं फांस रही पुलिस
एक सवाल यह भी उठता है कि जब पुलिस छुड़ाए गए आरोपियों को ही दोषी बता रही थी तो जिन दो आरोपियों को नामजद किया गया है, वह दोषी हैं अथवा नहीं? कहीं पुलिस पशु मांस तस्करी के धंधे से जुड़े लोगों फांसकर सबकुछ ठीक करने में तो नहीं लगी है? फिलहाल पुलिस के पास इन दोनों सवालों के जवाब नहीं हैं।
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एएसपी ने दोहराया, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा
उधर एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने मामले में कुछ भी बोलने से इनकार किया। साथ ही इतना दोहराया कि पशु तस्करी के मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।