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कार बरामद, छह पशु मुक्त कराए
निघासन।
Updated Thu, 25 Feb 2016 06:43 PM IST
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पुलिस ने बुधवार रात पशुओं से भरी लग्जरी कार गन्ने के खेत से बरामद की। चालक मौके से फरार हो गया। कस्बे के एक दरोगा की भूमिका संदिग्ध होने पर एएसपी ने जांच के आदेश दिए हैं। पशुओं को पशु पालकों में वितरित कर दिया गया।
प्रभारी एसओ मुसाफिर प्रसाद ने बताया कि बुधवार की रात करीब नौ बजे किसी ने पशुओं से भरी एक कार जाने की सूचना दी। पुलिस ने पशु तस्करों को रोकने के लिए कई स्थानों पर नाकेबंदी कर दी। दरोगा संदीप कुमार, रामनाथ समेत कई पुलिसकर्मियों ने मुंसिफ कोर्ट के पास मोहनलाल पुरवा जाने वाले मार्ग की घेराबंदी कर दी। रात करीब 10 बजे एक काले रंग की कार उस रास्ते से गुजरी। पुलिस ने जब कार को रोकने का प्रयास किया तो चालक ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। वह कार को एक खेत में ले गया। उसने दूसरी ओर निकलने की कोशिश की तो वहां भी नाकेबंदी मिली । घिरता देख चालक कार को खेत में खड़ा कर भाग गया। पुलिस ने कार यूपी 16 एई 8208 को कब्जे में लेकर उसमें ठूसे गए छह पशुओं को कब्जे में ले लिया। बाद में इन्हें पशु पालकों को बांट दिया गया। प्रभारी एसओ ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। कार के कागज नहीं मिले हैं। एएसपी अष्टभुजा सिंह ने बताया कि पशु तस्करी में कस्बे के एक दरोगा की भूमिका संदिग्ध हैं। उसकी जांच की जा रही है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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और यहां भी नहीं पकड़े गए तस्कर
जिले के ज्यादातर थानों की पुलिस पशु तस्करों को नहीं पकड़ पाती। अक्सर पशु बरामद कर लिए जाते हैं, लेकिन चालक और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकलते हैं। ऐसे में पुलिस की भूमिका सवालों में आ गई है। निघासन में भी यही हुआ। चालक गन्ने के खेत में कार छोड़कर भाग निकला।
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गांव वालों को पशु देने का अधिकार नहीं
पशुओं को सिर्फ गोशाला संचालक की सुपुर्दगी में देने का प्रावधान है, लेकिन निघासन पुलिस ने ऐसा न करके बरामद किए पशु गांव वालों को दे दिए। गोवंश प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक विजय शुक्ला रिंकू का कहना है कि गांव में इस तरह से पशुओं को देने से पशु फिर तस्करों के पास पहुंच जाएंगे। उधर इस बाबत एसओ निघासन अमर सिंह का कहना है कि सोच समझकर पशुओं को गांव वालों की सुपुर्दगी में दिया गया है।
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प्रभारी एसओ मुसाफिर प्रसाद ने बताया कि बुधवार की रात करीब नौ बजे किसी ने पशुओं से भरी एक कार जाने की सूचना दी। पुलिस ने पशु तस्करों को रोकने के लिए कई स्थानों पर नाकेबंदी कर दी। दरोगा संदीप कुमार, रामनाथ समेत कई पुलिसकर्मियों ने मुंसिफ कोर्ट के पास मोहनलाल पुरवा जाने वाले मार्ग की घेराबंदी कर दी। रात करीब 10 बजे एक काले रंग की कार उस रास्ते से गुजरी। पुलिस ने जब कार को रोकने का प्रयास किया तो चालक ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। वह कार को एक खेत में ले गया। उसने दूसरी ओर निकलने की कोशिश की तो वहां भी नाकेबंदी मिली । घिरता देख चालक कार को खेत में खड़ा कर भाग गया। पुलिस ने कार यूपी 16 एई 8208 को कब्जे में लेकर उसमें ठूसे गए छह पशुओं को कब्जे में ले लिया। बाद में इन्हें पशु पालकों को बांट दिया गया। प्रभारी एसओ ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। कार के कागज नहीं मिले हैं। एएसपी अष्टभुजा सिंह ने बताया कि पशु तस्करी में कस्बे के एक दरोगा की भूमिका संदिग्ध हैं। उसकी जांच की जा रही है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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और यहां भी नहीं पकड़े गए तस्कर
जिले के ज्यादातर थानों की पुलिस पशु तस्करों को नहीं पकड़ पाती। अक्सर पशु बरामद कर लिए जाते हैं, लेकिन चालक और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकलते हैं। ऐसे में पुलिस की भूमिका सवालों में आ गई है। निघासन में भी यही हुआ। चालक गन्ने के खेत में कार छोड़कर भाग निकला।
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गांव वालों को पशु देने का अधिकार नहीं
पशुओं को सिर्फ गोशाला संचालक की सुपुर्दगी में देने का प्रावधान है, लेकिन निघासन पुलिस ने ऐसा न करके बरामद किए पशु गांव वालों को दे दिए। गोवंश प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक विजय शुक्ला रिंकू का कहना है कि गांव में इस तरह से पशुओं को देने से पशु फिर तस्करों के पास पहुंच जाएंगे। उधर इस बाबत एसओ निघासन अमर सिंह का कहना है कि सोच समझकर पशुओं को गांव वालों की सुपुर्दगी में दिया गया है।