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नहर में पलटी ट्रैक्टर-ट्रॉली, तीन मजदूरों की मौत
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान
Updated Wed, 06 Jan 2016 09:54 PM IST
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नगर से सटे अलीगंज रोड स्थित एक भट्ठे से ईंटें भरकर पलिया जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली मूड़ा सवारान के पास नहर पटरी पर मुड़ते ही पलट गई और नहर में जा गिरी, जिससे चार मजदूर ट्रॉली के नीचे दब गए, जिसमें गांव कालीचरनपुर निवासी तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक मौके से भाग निकला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चालक भी मामूली रूप से घायल हुआ है।
पुलिस के अनुसार, कालीचरनपुर गांव से एक भट्ठे से स्वराज ट्रैक्टर और ट्रॉली में ईंटें भरकर कालीचरनपुर निवासी चालक पप्पू पलिया के लिए 5/6 की रात ढाई बजे निकला था। ट्रैक्टर पर ही पासी बिरादरी के तीन मजदूर बैठे थे। रास्ते में मूड़ा सवारान के पास छोटी नहर (अल्पिका) पुलिया पार करते ही मुड़ते समय ट्रैक्टर ट्रॉली नहर में पलट गई। चालक पप्पू किसी तरह कूद गया और मौके से भाग गया। गांव कालीचरनपुर निवासी विपत (35), अरुण कुमार (18) और पिंकू (22) की ट्रॉली के नीचे दबकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद चालक ने हादसे की जानकारी ट्रैक्टर मालिक गांव निवासी बाल गोविंद वर्मा को दी। गांव में खबर आते ही कोहराम मच गया। तीनों घरों के लोग दहाड़े मारकर रोने लगे। गांव से तमाम लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उधर चालक कहा कुछ भी पता नहीं चल सका है। पुलिस का अनुमान है कि वह भयभीत होकर कहीं भाग गया है। परिवारवाले उसकी खोजबीन कर रहे हैं।
प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली-गोला नेमचंद गंगवार ने बताया कि ट्रैक्टर से जुड़ी ट्रॉली में हुक का चक्का फंस जाने के कारण हादसा हुआ है। मृतक अरुण के पिता रामऔतार ने घटना की सूचना देते हुए तहरीर दी है, जिस पर इत्तेफाकिया हादसे की रिपोर्ट दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
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मौत ने छीने तीन घरों के कमाऊ पूत
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। कोतवाली क्षेत्र के गांव कालीचरनपुर के तीन मजदूर युवकों की मूड़ा सवारान चौराहे के पास नहर पुल को पार करते समय ट्रैक्टर ट्रॉली के पलटने से हुई दुर्घटना ने तीन परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। तीन युवकों की एक साथ मौत से गांव में मातम छाया हुआ है।
ट्रैक्टर से जुड़ी ट्रॉली में ईंटें भरकर कालीचरनपुर निवासी पप्पू गांव के ही 35 वर्षीय विपत, 22 वर्षीय पिंकू और 18 वर्षीय अरुण के साथ पलिया के लिए घर से मंगलवार रात में निकला था, किंतु भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे ही मूड़ा सवारान के पास नहर पुल को पार कर मुड़ी, ट्राली का चक्का फंसने के कारण ट्रॉली और ट्रैक्टर असंतुलित होकर पानी से भरी नहर में पलट गया। इससे विपत, पिंकू और अरुण की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में मारे गए गांव के तीनों मजदूर अपने माता-पिता के बड़े और कमाऊ बेटे थे। जो मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी मौत से तीनों परिवार सकते में हैं। गांव निवासी अरुण अपने मां-बाप का बड़ा बेटा था। उसके पिता रामऔतार विकलांग हैं। जो ईंट भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करके अपने अपनी मां चमेली, छोटे भाई दीपू और अमित का पालन पोषण करता था। जवान बेटे की मौत से इनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कैसे चलेगी जिंदगी
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। दुर्घटना में मारे गए विपत की पत्नी मालती और उसके बच्चों सोनू, विनीत, गोपी का रो रोकर बुरा हाल है। पति की मौत के साथ ही उसके बेटों और उसकी जिंदगी तबाह हो गई है।
दुधमुंही बच्ची के सिर से उठा बाप का साया
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। दुर्घटना में मारा गया पिंकू अपने पिता लालाराम और मां लाली का बड़ा कमाऊ बेटा था। उसकी दो वर्ष पूर्व शादी हुई थी। पत्नी संगीता अपनी गोद में लिए एक वर्ष की दुधमुंही बच्ची के साथ दहाड़े मारकर रोती रही। पिंकू मेहनत मजदूरी कर माता पिता, पत्नी, छोटे भाई अमित और विश्नू का पालन पोषण करता था। उसकी मौत के साथ पूरे परिवार के अरमान खाक हो गए हैं।
तीनों परिवार हैं भूमिहीन, सरकारी सुविधा से वंचित
गोला गोकर्णनाथ। कालीचरनपुर गांव निवासी मृतकों के परिवार भूमिहीन हैं। जो सरकारी सुविधाओं से भी वंचित हैं। गरीबी और बदहाली की जीती जागती तस्वीर देखकर लोग सरकारी तंत्र को कोस रहे हैं। परिवारों के पास एपीएल कार्ड हैं। घरों पर पड़े टूटे छप्पर इन परिवारों की बदहाली बयां कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान ने चलाया बचाव कार्य
मूउ़ा सवारान। ग्राम प्रधान रियासत अली सिद्दीकी ने सूचना मिलते ही राजा अंसार अहमद खां के साथ तत्काल मौके पर पहुंचकर जेसीबी बुलाई और ग्रामीणों की सहायता से बचाव कार्य शुरू कराया, जिससे भोर होते ही नहर में गिरी ट्रैक्टर ट्रॉली और तीनों शवों को बाहर निकाल लिया गया।
चालक का मोबाइल ऑफ, नहीं लगा सुराग
गोला गोकर्णनाथ। दुर्घटना की सूचना ट्रैक्टर मालिक बालगोविंद वर्मा को देने के बाद ट्रैक्टर चालक पप्पू का सुराग नहीं मिला है। मोबाइल फोन बंद होने से परिवार वालों घटनास्थल और आस पास के क्षेत्र में तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा है, जिससे सभी चिंतित हैं। पुलिस का अनुमान है कि वह भयभीत होकर कहीं चला गया है।
सांत्वना देने पहुंचे जनप्रतिनिधि
गोला गोकर्णनाथ। कालीचरनपुर गांव के निवासी मृतकों के घर पर गांव एवं क्षेत्र के तमाम लोग शोकाकुल परिवार वालों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। घटनास्थल पर विधायक विनय तिवारी, पूर्व विधायक अरविंद गिरि, भाजपा नेता डॉ प्रीति वर्मा, शिवरतन वर्मा, आशीष पांडे, शिवनंदन वर्मा, अशोक अग्रवाल ने मृतकों के घर जाकर शोकाकुल परिवार को ढाढ़स बंधाया है।
इससे पहले भी होती रही हैं नहर में घटनाएं
मूड़ा सवारान। इस नहर में इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे कई लोग असमय काल के गाल में समा गए।
फरवरी 2012 : नौगवां निवासी एक व्यक्ति की बाइक अनियंत्रित होने से मौत
जुलाई 2013 : पिपरिया निवासी एक व्यक्ति की डूबने से मौत
नवंबर 2014 : भैठिया निवासी किशोर पटेल की बाइक रात के समय नहर में जाने से मौत
मार्च 2015 : मूड़ा सवारान के एक विक्षिप्त की डूबने से मौत
टैक्स चोरी कर धड़ल्ले से चलते हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
लखीमपुर खीरी। जिले में टैक्स चोरी कर निजी वाहनों को किराए के कार्य में धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। अधिकारियों और राजनेताओं के संरक्षण में फलफूल रहे इस गोरखधंधे में लिप्त लोगों द्वारा इन वाहनों के संचालन से जहां दुर्घटनाओं में आए दिन इजाफा हो रहा है। वहीं लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
जिले भर में कृषि कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टर ट्रॉलियों से भट्ठे पर किराए का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। इन वाहनों से किराए का काम लेने के लिए परिवहन विभाग में ट्रॉलियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता। सरकार से प्रति महीने लाखों रुपये का टैक्स चोरी कर तेज गति से सड़कों पर सरपट दौड़ाया जाता है।
गन्ने की ढुलाई में भी प्रयुक्त होती हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
जिले के गोला, पलिया, संपूर्णानगर, गुलरिया, खंभारखेड़ा, खमरिया, कुंभी, अजबापुर आदि चीनी मिलों के क्रय केंद्रों से भारी भरकम ट्रॉलों पर दो से तीन सौ क्विंटल गन्ना भरकर मिलों को ले जाया जाता है। इन वाहनों के बीमा और चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होते हैं। कुछ मिलों के क्रय केंद्रों से ट्रैक्टर में दो ट्रॉलियां जोड़कर दुर्घटना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खनन में भी प्रयुक्त होती हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
नहरों और नदियों से चोरी कर बालू निकालना, प्लाटों और तालाबों की पटाई के कार्य में इन वाहनों को धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है। हरे भरे पेड़ों को कटवाकर लकड़ी ढुलाई, भूसी और खोई ढुलाई में भी इन वाहनों का प्रयोग किया जाता है। यह वाहन जब सड़क पर निकलते हैं तो लोग इन्हें देखकर सड़क छोड़कर दूर भागने लगते हैं। इन वाहनों से घटनाएं होती रहती हैं, किंतु कभी इस ओर अधिकारी और राजनेता गंभीर नहीं होते हैं। इस गोरखधंधे में लिप्त लोगों की राजनेताओं से अच्छी साठगांठ रहती हैं, जिससे इस तरह सरकार को हो रही राजस्व की क्षति का मुद्दा विधानसभा और लोक सभा में भी कभी नहीं गूंजता है। ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाए तो दुर्घटनाओं पर काफी हद तक विराम लग सकता है।
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पुलिस के अनुसार, कालीचरनपुर गांव से एक भट्ठे से स्वराज ट्रैक्टर और ट्रॉली में ईंटें भरकर कालीचरनपुर निवासी चालक पप्पू पलिया के लिए 5/6 की रात ढाई बजे निकला था। ट्रैक्टर पर ही पासी बिरादरी के तीन मजदूर बैठे थे। रास्ते में मूड़ा सवारान के पास छोटी नहर (अल्पिका) पुलिया पार करते ही मुड़ते समय ट्रैक्टर ट्रॉली नहर में पलट गई। चालक पप्पू किसी तरह कूद गया और मौके से भाग गया। गांव कालीचरनपुर निवासी विपत (35), अरुण कुमार (18) और पिंकू (22) की ट्रॉली के नीचे दबकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद चालक ने हादसे की जानकारी ट्रैक्टर मालिक गांव निवासी बाल गोविंद वर्मा को दी। गांव में खबर आते ही कोहराम मच गया। तीनों घरों के लोग दहाड़े मारकर रोने लगे। गांव से तमाम लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उधर चालक कहा कुछ भी पता नहीं चल सका है। पुलिस का अनुमान है कि वह भयभीत होकर कहीं भाग गया है। परिवारवाले उसकी खोजबीन कर रहे हैं।
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प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली-गोला नेमचंद गंगवार ने बताया कि ट्रैक्टर से जुड़ी ट्रॉली में हुक का चक्का फंस जाने के कारण हादसा हुआ है। मृतक अरुण के पिता रामऔतार ने घटना की सूचना देते हुए तहरीर दी है, जिस पर इत्तेफाकिया हादसे की रिपोर्ट दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
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मौत ने छीने तीन घरों के कमाऊ पूत
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। कोतवाली क्षेत्र के गांव कालीचरनपुर के तीन मजदूर युवकों की मूड़ा सवारान चौराहे के पास नहर पुल को पार करते समय ट्रैक्टर ट्रॉली के पलटने से हुई दुर्घटना ने तीन परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। तीन युवकों की एक साथ मौत से गांव में मातम छाया हुआ है।
ट्रैक्टर से जुड़ी ट्रॉली में ईंटें भरकर कालीचरनपुर निवासी पप्पू गांव के ही 35 वर्षीय विपत, 22 वर्षीय पिंकू और 18 वर्षीय अरुण के साथ पलिया के लिए घर से मंगलवार रात में निकला था, किंतु भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे ही मूड़ा सवारान के पास नहर पुल को पार कर मुड़ी, ट्राली का चक्का फंसने के कारण ट्रॉली और ट्रैक्टर असंतुलित होकर पानी से भरी नहर में पलट गया। इससे विपत, पिंकू और अरुण की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में मारे गए गांव के तीनों मजदूर अपने माता-पिता के बड़े और कमाऊ बेटे थे। जो मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी मौत से तीनों परिवार सकते में हैं। गांव निवासी अरुण अपने मां-बाप का बड़ा बेटा था। उसके पिता रामऔतार विकलांग हैं। जो ईंट भट्ठे पर मेहनत मजदूरी करके अपने अपनी मां चमेली, छोटे भाई दीपू और अमित का पालन पोषण करता था। जवान बेटे की मौत से इनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कैसे चलेगी जिंदगी
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। दुर्घटना में मारे गए विपत की पत्नी मालती और उसके बच्चों सोनू, विनीत, गोपी का रो रोकर बुरा हाल है। पति की मौत के साथ ही उसके बेटों और उसकी जिंदगी तबाह हो गई है।
दुधमुंही बच्ची के सिर से उठा बाप का साया
गोला गोकर्णनाथ/मूड़ा सवारान। दुर्घटना में मारा गया पिंकू अपने पिता लालाराम और मां लाली का बड़ा कमाऊ बेटा था। उसकी दो वर्ष पूर्व शादी हुई थी। पत्नी संगीता अपनी गोद में लिए एक वर्ष की दुधमुंही बच्ची के साथ दहाड़े मारकर रोती रही। पिंकू मेहनत मजदूरी कर माता पिता, पत्नी, छोटे भाई अमित और विश्नू का पालन पोषण करता था। उसकी मौत के साथ पूरे परिवार के अरमान खाक हो गए हैं।
तीनों परिवार हैं भूमिहीन, सरकारी सुविधा से वंचित
गोला गोकर्णनाथ। कालीचरनपुर गांव निवासी मृतकों के परिवार भूमिहीन हैं। जो सरकारी सुविधाओं से भी वंचित हैं। गरीबी और बदहाली की जीती जागती तस्वीर देखकर लोग सरकारी तंत्र को कोस रहे हैं। परिवारों के पास एपीएल कार्ड हैं। घरों पर पड़े टूटे छप्पर इन परिवारों की बदहाली बयां कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान ने चलाया बचाव कार्य
मूउ़ा सवारान। ग्राम प्रधान रियासत अली सिद्दीकी ने सूचना मिलते ही राजा अंसार अहमद खां के साथ तत्काल मौके पर पहुंचकर जेसीबी बुलाई और ग्रामीणों की सहायता से बचाव कार्य शुरू कराया, जिससे भोर होते ही नहर में गिरी ट्रैक्टर ट्रॉली और तीनों शवों को बाहर निकाल लिया गया।
चालक का मोबाइल ऑफ, नहीं लगा सुराग
गोला गोकर्णनाथ। दुर्घटना की सूचना ट्रैक्टर मालिक बालगोविंद वर्मा को देने के बाद ट्रैक्टर चालक पप्पू का सुराग नहीं मिला है। मोबाइल फोन बंद होने से परिवार वालों घटनास्थल और आस पास के क्षेत्र में तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा है, जिससे सभी चिंतित हैं। पुलिस का अनुमान है कि वह भयभीत होकर कहीं चला गया है।
सांत्वना देने पहुंचे जनप्रतिनिधि
गोला गोकर्णनाथ। कालीचरनपुर गांव के निवासी मृतकों के घर पर गांव एवं क्षेत्र के तमाम लोग शोकाकुल परिवार वालों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। घटनास्थल पर विधायक विनय तिवारी, पूर्व विधायक अरविंद गिरि, भाजपा नेता डॉ प्रीति वर्मा, शिवरतन वर्मा, आशीष पांडे, शिवनंदन वर्मा, अशोक अग्रवाल ने मृतकों के घर जाकर शोकाकुल परिवार को ढाढ़स बंधाया है।
इससे पहले भी होती रही हैं नहर में घटनाएं
मूड़ा सवारान। इस नहर में इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे कई लोग असमय काल के गाल में समा गए।
फरवरी 2012 : नौगवां निवासी एक व्यक्ति की बाइक अनियंत्रित होने से मौत
जुलाई 2013 : पिपरिया निवासी एक व्यक्ति की डूबने से मौत
नवंबर 2014 : भैठिया निवासी किशोर पटेल की बाइक रात के समय नहर में जाने से मौत
मार्च 2015 : मूड़ा सवारान के एक विक्षिप्त की डूबने से मौत
टैक्स चोरी कर धड़ल्ले से चलते हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
लखीमपुर खीरी। जिले में टैक्स चोरी कर निजी वाहनों को किराए के कार्य में धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। अधिकारियों और राजनेताओं के संरक्षण में फलफूल रहे इस गोरखधंधे में लिप्त लोगों द्वारा इन वाहनों के संचालन से जहां दुर्घटनाओं में आए दिन इजाफा हो रहा है। वहीं लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
जिले भर में कृषि कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टर ट्रॉलियों से भट्ठे पर किराए का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। इन वाहनों से किराए का काम लेने के लिए परिवहन विभाग में ट्रॉलियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता। सरकार से प्रति महीने लाखों रुपये का टैक्स चोरी कर तेज गति से सड़कों पर सरपट दौड़ाया जाता है।
गन्ने की ढुलाई में भी प्रयुक्त होती हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
जिले के गोला, पलिया, संपूर्णानगर, गुलरिया, खंभारखेड़ा, खमरिया, कुंभी, अजबापुर आदि चीनी मिलों के क्रय केंद्रों से भारी भरकम ट्रॉलों पर दो से तीन सौ क्विंटल गन्ना भरकर मिलों को ले जाया जाता है। इन वाहनों के बीमा और चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होते हैं। कुछ मिलों के क्रय केंद्रों से ट्रैक्टर में दो ट्रॉलियां जोड़कर दुर्घटना को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खनन में भी प्रयुक्त होती हैं ट्रैक्टर ट्रॉली
नहरों और नदियों से चोरी कर बालू निकालना, प्लाटों और तालाबों की पटाई के कार्य में इन वाहनों को धड़ल्ले से प्रयोग किया जाता है। हरे भरे पेड़ों को कटवाकर लकड़ी ढुलाई, भूसी और खोई ढुलाई में भी इन वाहनों का प्रयोग किया जाता है। यह वाहन जब सड़क पर निकलते हैं तो लोग इन्हें देखकर सड़क छोड़कर दूर भागने लगते हैं। इन वाहनों से घटनाएं होती रहती हैं, किंतु कभी इस ओर अधिकारी और राजनेता गंभीर नहीं होते हैं। इस गोरखधंधे में लिप्त लोगों की राजनेताओं से अच्छी साठगांठ रहती हैं, जिससे इस तरह सरकार को हो रही राजस्व की क्षति का मुद्दा विधानसभा और लोक सभा में भी कभी नहीं गूंजता है। ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाए तो दुर्घटनाओं पर काफी हद तक विराम लग सकता है।