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एक एजेंसी ने आठ किसानों के सात लाख रुपये हड़पे
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:03 PM IST
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राजकोट कैश
- फोटो : ani
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- तिकुनिया और पलिया क्रय केंद्रों पर पिछले वर्ष खरीदा था धान एवं गेहूं
- डीएम के आदेश पर महाप्रबंधक समेत चार कर्मचारियों पर रिपोर्ट दर्ज
सरकारी क्रय केंद्रों पर आम किसानों के लिए धान-गेहूं बेचना आसान नहीं था और अब किसानों का लाखों रुपये का भुगतान हड़पकर एजेंसी भागने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ है, जिसमें लखनऊ की सोसाइटी इंडियन कामर्शियल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव ने दो क्रय केंद्रों तिकुनिया और पलिया मंडी में खरीदे धान-गेहूं का छह लाख 96 हजार 881 रुपये हड़प लिया है। इस धोखाधड़ी से आठ किसान पीड़ित हैं, जिन्होंने डीएम से पैसा दिलाने की मांग की। जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद डीएम आकाशदीप के आदेश पर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने महाप्रबंधक, प्रबंधक समेत चार लोगों के खिलाफ तिकुनिया कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पीसीएफ से जुड़कर कार्य करने वाली इंडियन कामर्शियल एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव ने तिकुनिया मंडी में वर्ष 2015-16 में धान क्रय केंद्र खोला था, जबकि रबी सीजन में पलिया मंडी में गेहूं क्रय केंद्र खोला था। तिकुनिया मंडी में इस सोसाइटी ने खरीद बंद करने के बाद छह किसानों बनवारीपुर निवासी जगदीश सिंह, सुखविंदर सिंह, तिकुनिया निवासी लखवीर सिंह, सुखजिंदर सिंह, जगदीश सिंह और रामचरन के 305 क्विंटल धान का तीन लाख 19 हजार 231 रुपये भुगतान नहीं किया। भुगतान की आस में किसान अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसी तरह पलिया मंडी के क्रय केंद्र पर 260 क्विंटल (130-130 क्विंटल) गेहूं बेचने वाले किसान हरिजेंदर सिंह और गुरुवचन सिंह को भी सोसाइटी ने तीन लाख 77 हजार 650 रुपये का भुगतान नहीं किया। दोनों क्रय केंद्रों से किसानों का करीब सात लाख रुपया हड़पने के बाद सोसाइटी के प्रबंधक एवं कर्मचारी फरार हो गए हैं।
कई महीने तक भुगतान न मिलने पर किसानों ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की, जिसके बाद जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने दोनों प्रकरणों की जांच की। आरोपों की पुष्टि होने पर सोसाइटी के तिकुनिया क्रय केंद्र पर गड़बड़ी करने में जिला प्रबंधक दिव्यांगना त्यागी और लेखाकार पवन दीक्षित दोषी पाए गए। जबकि पलिया मंडी के क्रय केंद्र पर हुई गड़बड़ी में महाप्रबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव और प्रमोद अवस्थी को दोषी पाया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम के समक्ष पेश की गई, जिस पर डीएम ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। इस पर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने तिकुनिया कोतवाली में तहरीर देकर चार आरोपियों दिव्यांगना त्यागी, पवन दीक्षित, अजय कुमार श्रीवास्तव और प्रमोद अवस्थी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसकी जांच एसआई धर्मदास सिद्धार्थ करेंगे।
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गोला मंडी के एक क्रय केंद्र पर हो चुका घोटाला
तिकुनिया और पलिया का मामला पहला नहीं है, क्योंकि रबी सीजन 2015-16 में ही गोला मंडी स्थित विपणन के क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने वाले दर्जनों किसानों का भुगतान गबन कर लिया गया था। इस मामले में केंद्र प्रभारी और दलालों की भूमिका सामने आई थी, जिसमें तत्कालीन गोला के वरिष्ठ खाद्य निरीक्षक अर्जुन लाल पाठक को संलिप्त पाया गया था। चार माह पूर्व ही गोला कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसकी जांच चल रही है।
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- डीएम के आदेश पर महाप्रबंधक समेत चार कर्मचारियों पर रिपोर्ट दर्ज
सरकारी क्रय केंद्रों पर आम किसानों के लिए धान-गेहूं बेचना आसान नहीं था और अब किसानों का लाखों रुपये का भुगतान हड़पकर एजेंसी भागने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ है, जिसमें लखनऊ की सोसाइटी इंडियन कामर्शियल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव ने दो क्रय केंद्रों तिकुनिया और पलिया मंडी में खरीदे धान-गेहूं का छह लाख 96 हजार 881 रुपये हड़प लिया है। इस धोखाधड़ी से आठ किसान पीड़ित हैं, जिन्होंने डीएम से पैसा दिलाने की मांग की। जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद डीएम आकाशदीप के आदेश पर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने महाप्रबंधक, प्रबंधक समेत चार लोगों के खिलाफ तिकुनिया कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पीसीएफ से जुड़कर कार्य करने वाली इंडियन कामर्शियल एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव ने तिकुनिया मंडी में वर्ष 2015-16 में धान क्रय केंद्र खोला था, जबकि रबी सीजन में पलिया मंडी में गेहूं क्रय केंद्र खोला था। तिकुनिया मंडी में इस सोसाइटी ने खरीद बंद करने के बाद छह किसानों बनवारीपुर निवासी जगदीश सिंह, सुखविंदर सिंह, तिकुनिया निवासी लखवीर सिंह, सुखजिंदर सिंह, जगदीश सिंह और रामचरन के 305 क्विंटल धान का तीन लाख 19 हजार 231 रुपये भुगतान नहीं किया। भुगतान की आस में किसान अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसी तरह पलिया मंडी के क्रय केंद्र पर 260 क्विंटल (130-130 क्विंटल) गेहूं बेचने वाले किसान हरिजेंदर सिंह और गुरुवचन सिंह को भी सोसाइटी ने तीन लाख 77 हजार 650 रुपये का भुगतान नहीं किया। दोनों क्रय केंद्रों से किसानों का करीब सात लाख रुपया हड़पने के बाद सोसाइटी के प्रबंधक एवं कर्मचारी फरार हो गए हैं।
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कई महीने तक भुगतान न मिलने पर किसानों ने मामले की शिकायत अधिकारियों से की, जिसके बाद जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने दोनों प्रकरणों की जांच की। आरोपों की पुष्टि होने पर सोसाइटी के तिकुनिया क्रय केंद्र पर गड़बड़ी करने में जिला प्रबंधक दिव्यांगना त्यागी और लेखाकार पवन दीक्षित दोषी पाए गए। जबकि पलिया मंडी के क्रय केंद्र पर हुई गड़बड़ी में महाप्रबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव और प्रमोद अवस्थी को दोषी पाया गया है। पूरे मामले की रिपोर्ट डीएम के समक्ष पेश की गई, जिस पर डीएम ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। इस पर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कौशल देव ने तिकुनिया कोतवाली में तहरीर देकर चार आरोपियों दिव्यांगना त्यागी, पवन दीक्षित, अजय कुमार श्रीवास्तव और प्रमोद अवस्थी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसकी जांच एसआई धर्मदास सिद्धार्थ करेंगे।
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गोला मंडी के एक क्रय केंद्र पर हो चुका घोटाला
तिकुनिया और पलिया का मामला पहला नहीं है, क्योंकि रबी सीजन 2015-16 में ही गोला मंडी स्थित विपणन के क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने वाले दर्जनों किसानों का भुगतान गबन कर लिया गया था। इस मामले में केंद्र प्रभारी और दलालों की भूमिका सामने आई थी, जिसमें तत्कालीन गोला के वरिष्ठ खाद्य निरीक्षक अर्जुन लाल पाठक को संलिप्त पाया गया था। चार माह पूर्व ही गोला कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसकी जांच चल रही है।