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अमरोहा से बरामद हुई इनोवा सवालों के घेरे में
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:20 PM IST
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सदर कोतवाली पुलिस ने करीब 24 दिन पहले एक इनोवा को कब्जे में लेकर तफ्तीश शुरू की थी, जिसमें इनोवा चोरी की मानकर जांच चल रही है। अभी तक पुलिस किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैै। यदि इनोवा कार चोरी की होती, तो उसकी एफआईआर होनी चाहिए, जो किसी थाने में नहीं है। इस बीच डीजीपी कार्यालय से इनोवा मामले की जांच शुरू हुई, तो जांच अधिकारियों में खलबली मच गई। फिर नाटकीय अंदाज में मंगलवार को अमरोहा में इसी रजिस्ट्रेशन नंबर की दूसरी इनोवा बरामद होना बताकर पुलिस ने राहत की सांस ली जरूर, लेकिन इसकी बरामदगी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैैं, जो पुलिस की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
बता दें कि मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील की इनोवा को कोतवाली पुलिस ने 27 अगस्त 2015 को पकड़कर कब्जे में ली थी, जिसमें दूसरे दावेदार अंकित सिंह को मोहरा बनाया गया। पुलिस ने इसे चोरी की कार मानते हुए तफ्तीश शुरू की, जिसमें पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिली है। बताते चलें कि इसी कार को तत्कालीन जेल गेट चौकी इंचार्ज धर्मदास सिद्धार्थ ने भी चोरी के शक में पकड़ा था, लेकिन एक माह बाद एसडीएम के आदेश पर इनोवा रिलीज कर दी गई थी। तब भी पुलिस कार के चोरी का होने का संबंध में कोई पुख्ता सुराग हासिल नहीं कर सकी थी। दुबारा इसी इनोवा को पकड़कर पुलिस ने जांच शुरू की, तो मामला डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया। कारण भी है कि 20 दिन की जांच के बाद भी पुलिस के हाथ कोई अहम सुराग नहीं लगा है। ऐसे में पुलिस इस मसले पर खुद ही घिरती जा रही थी। फिर नाटकीय अंदाज में अमरोहा पुलिस इनोवा कार बरामद करती है, जिसका नंबर भी खीरी में पकड़ी गई इनोवा यूपी 78 बीसी 8677 है। इससे कोतवाली पुलिस ने राहत की सांस ली है, लेकिन कई सवाल उसकी परेशानी बढ़ा सकते हैैं। मसलन अमरोहा पुलिस ने किस आधार पर इनोवा को पकड़ा, क्योंकि अभी तक इनोवा कार के चोरी होने की रिपोर्ट नहीं है। ऐसे में अमरोहा पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। इनोवा स्वामी शकील ने आरोप लगाया है कि जांच कर रही पुलिस ने गुमराह करने के लिए इसी नंबर की दूसरी इनोवा बरामद कराने का ड्रामा रचा है, जिससे हमारी कार को चोरी की कार साबित कर सकें। जबकि हमारी इनोवा का अप्रैल में एआरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
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बता दें कि मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील की इनोवा को कोतवाली पुलिस ने 27 अगस्त 2015 को पकड़कर कब्जे में ली थी, जिसमें दूसरे दावेदार अंकित सिंह को मोहरा बनाया गया। पुलिस ने इसे चोरी की कार मानते हुए तफ्तीश शुरू की, जिसमें पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिली है। बताते चलें कि इसी कार को तत्कालीन जेल गेट चौकी इंचार्ज धर्मदास सिद्धार्थ ने भी चोरी के शक में पकड़ा था, लेकिन एक माह बाद एसडीएम के आदेश पर इनोवा रिलीज कर दी गई थी। तब भी पुलिस कार के चोरी का होने का संबंध में कोई पुख्ता सुराग हासिल नहीं कर सकी थी। दुबारा इसी इनोवा को पकड़कर पुलिस ने जांच शुरू की, तो मामला डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया। कारण भी है कि 20 दिन की जांच के बाद भी पुलिस के हाथ कोई अहम सुराग नहीं लगा है। ऐसे में पुलिस इस मसले पर खुद ही घिरती जा रही थी। फिर नाटकीय अंदाज में अमरोहा पुलिस इनोवा कार बरामद करती है, जिसका नंबर भी खीरी में पकड़ी गई इनोवा यूपी 78 बीसी 8677 है। इससे कोतवाली पुलिस ने राहत की सांस ली है, लेकिन कई सवाल उसकी परेशानी बढ़ा सकते हैैं। मसलन अमरोहा पुलिस ने किस आधार पर इनोवा को पकड़ा, क्योंकि अभी तक इनोवा कार के चोरी होने की रिपोर्ट नहीं है। ऐसे में अमरोहा पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। इनोवा स्वामी शकील ने आरोप लगाया है कि जांच कर रही पुलिस ने गुमराह करने के लिए इसी नंबर की दूसरी इनोवा बरामद कराने का ड्रामा रचा है, जिससे हमारी कार को चोरी की कार साबित कर सकें। जबकि हमारी इनोवा का अप्रैल में एआरटीओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
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