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सरकारी अस्पताल में मिलने वाली दवा का नमूना फेल
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 30 May 2017 10:49 PM IST
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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डीआई ने उज्जैन की दवा निर्माता कंपनी को भेजा नोटिस
संबंधित दवा के वितरण पर लगाई रोक
कंपनी पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वितरित की जाने वाली दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकारी सप्लाई वाले केंद्रीय औषधि भंडार से वर्ष 2016 में लिए गए चार दवा के नमूनों में से कैप्सूल ओमेप्राजोल का नमूना लैब जांच में अधोमानक पाया गया है। जबकि एलर्जी दूर करने के लिए प्रयोग की जाने वाली टेबलेट सिट्रीजेन का नमूना मिसब्रांड पाया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर (डीआई) ने सीएमओ को लैब रिपोर्ट भेजकर अधोमानक पाई गई दवा को सीएचसी/पीएचसी पर वितरण तत्काल बंद कराने की आवश्यकता बताई है। साथ ही डीआई ने उज्जैन की दवा निर्माता कंपनी को नोटिस भेजकर कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
डीआई संदेश मौर्या ने सीएमओ आफिस के पास स्थित केंद्रीय औषधि भंडार से 26 फरवरी 2016 को चार दवाओं के नमूने लिए थे। तब चीफ फार्मासिस्ट के पद पर सरयू प्रसाद की तैनाती थी। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट करीब एक साल से अधिक समय बीतने के बाद आई है, जिसमें पेट की बीमारी से पीड़ित को दिए जाने वाले कैप्सूल ओमेप्राजोल का नमूना अधोमानक पाया गया है। डीआई ने बताया कि कैप्सूल में 84.2 प्रतिशत साल्ट पाया गया है, जो मानक 100 प्रतिशत से कम है। इसके अलावा टेबलेट सिट्रीजेन की लेबलिंग में गड़बड़ी के चलते मिसब्रांड करार दिया गया है, जिसके लिए कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
कैप्सूल के वितरण पर तत्काल रोक
सीएचसी/पीएचसी में इस दवा के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित दवा निर्माता कंपनी सुपर फार्मोलेशन प्रा. लिमिटेड को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कंपनी में इस दवा के मौजूदा स्टाक समेत जिलेवार सप्लाई का जवाब मांगा गया हैै। साथ ही कंपनी को दवा की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश दिया गया है।
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तो मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहीं लैब
जीवन रक्षक दवाओं से जुड़े मामलों में हो रही लंबी देरी मरीजों की सेहत को खतरे में डालने के लिए काफी है। 26 फरवरी 2016 को लिए गए दवा की जांच रिपोर्ट लखनऊ की लैब ने 23 मार्च 2017 की डेट में तैयार की थी, जिसके बाद डिस्पैच होकर डाक करीब एक माह बाद लखीमपुर में डीआई तक (29 अप्रैल 2017) को पहुंची। इसके बाद डीआई ने पहले सीएमओ से रिकार्ड जुटाए, फिर कार्रवाई अमल में लाई गई। हालांकि अभी मामला सिर्फ नोटिस तक पहुंचा है।
कंपनी का जवाब प्राप्त होते ही मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी, जिससे पहले आयुक्त एफएसडीए से अनुमति ली जाएगी। लैब से रिपोर्ट काफी देर से मिली, जिसके बाद फौरन कार्रवाई की गई है।
संदेश मौर्या, ड्रंग इंस्पेक्टर
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संबंधित दवा के वितरण पर लगाई रोक
कंपनी पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वितरित की जाने वाली दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकारी सप्लाई वाले केंद्रीय औषधि भंडार से वर्ष 2016 में लिए गए चार दवा के नमूनों में से कैप्सूल ओमेप्राजोल का नमूना लैब जांच में अधोमानक पाया गया है। जबकि एलर्जी दूर करने के लिए प्रयोग की जाने वाली टेबलेट सिट्रीजेन का नमूना मिसब्रांड पाया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर (डीआई) ने सीएमओ को लैब रिपोर्ट भेजकर अधोमानक पाई गई दवा को सीएचसी/पीएचसी पर वितरण तत्काल बंद कराने की आवश्यकता बताई है। साथ ही डीआई ने उज्जैन की दवा निर्माता कंपनी को नोटिस भेजकर कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
डीआई संदेश मौर्या ने सीएमओ आफिस के पास स्थित केंद्रीय औषधि भंडार से 26 फरवरी 2016 को चार दवाओं के नमूने लिए थे। तब चीफ फार्मासिस्ट के पद पर सरयू प्रसाद की तैनाती थी। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट करीब एक साल से अधिक समय बीतने के बाद आई है, जिसमें पेट की बीमारी से पीड़ित को दिए जाने वाले कैप्सूल ओमेप्राजोल का नमूना अधोमानक पाया गया है। डीआई ने बताया कि कैप्सूल में 84.2 प्रतिशत साल्ट पाया गया है, जो मानक 100 प्रतिशत से कम है। इसके अलावा टेबलेट सिट्रीजेन की लेबलिंग में गड़बड़ी के चलते मिसब्रांड करार दिया गया है, जिसके लिए कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
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कैप्सूल के वितरण पर तत्काल रोक
सीएचसी/पीएचसी में इस दवा के वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित दवा निर्माता कंपनी सुपर फार्मोलेशन प्रा. लिमिटेड को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कंपनी में इस दवा के मौजूदा स्टाक समेत जिलेवार सप्लाई का जवाब मांगा गया हैै। साथ ही कंपनी को दवा की बिक्री तत्काल रोकने का आदेश दिया गया है।
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तो मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहीं लैब
जीवन रक्षक दवाओं से जुड़े मामलों में हो रही लंबी देरी मरीजों की सेहत को खतरे में डालने के लिए काफी है। 26 फरवरी 2016 को लिए गए दवा की जांच रिपोर्ट लखनऊ की लैब ने 23 मार्च 2017 की डेट में तैयार की थी, जिसके बाद डिस्पैच होकर डाक करीब एक माह बाद लखीमपुर में डीआई तक (29 अप्रैल 2017) को पहुंची। इसके बाद डीआई ने पहले सीएमओ से रिकार्ड जुटाए, फिर कार्रवाई अमल में लाई गई। हालांकि अभी मामला सिर्फ नोटिस तक पहुंचा है।
कंपनी का जवाब प्राप्त होते ही मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी, जिससे पहले आयुक्त एफएसडीए से अनुमति ली जाएगी। लैब से रिपोर्ट काफी देर से मिली, जिसके बाद फौरन कार्रवाई की गई है।
संदेश मौर्या, ड्रंग इंस्पेक्टर