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अंतरजनपदीय वन्यजीव तस्कर गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार
Updated Sat, 19 Aug 2017 04:43 PM IST
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज के जंगल से बोरों में भरकर चार लंगूरी बंदर ले जा रहे छह अंतर जनपदीय तस्करों को वन विभाग की टीम ने दबोच लिया। टीम ने बोलेरो को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
रेंजर मैलानी डीएस यादव ने बताया कि शुक्रवार शाम चार बजे के करीब मुखबिर की सूचना पर उन्होंने वन विभाग की टीम के साथ भरिगवां बीट के कंपार्टमेंट उत्तरी कठिना (3) की घेराबंदी कर एक बोलेरो में सवार छह वन्यजीव तस्करों को धर दबोचा। टीम में शामिल डिप्टी रेंजर सुदर्शन सिंह, वन दरोगा, राजेश कुमार, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, सुखपाल सिंह, शारिक आदि ने बोलेरो की जब तलाशी ली तो उसमें से एक बोरा बरामद हुआ, जिसमें तीन वयस्क लंगूरी बंदर और एक लंगूरी बच्चा बरामद हुआ। पूछताछ में वन्यजीव तस्करों ने अपना नाम महिपाल, हरिओम, मनोज, छोटे, श्रीपाल और अनुराग निवासी चरखौला थाना खुदागंज जनपद शाहजहांपुर बताया। रेंजर ने बताया कि वन्यजीव तस्करों ने पूछताछ करने पर बताया कि वह लंगूरी बंदर पालने के लिए जंगल से पकड़ कर ले जा रहे थे। मालूम हो कि वन्यजीवों को घर में रखने और पालने पर पाबंदी है। रेंजर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का मेडिकल परीक्षण के बाद वन्यजीव अधिनियम की धारा 2 के तहत चालान भेज दिया गया है। बोलेरो गाड़ी सीज कर दी गई है।
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चिकित्सा क्षेत्र में लंगूरी बंदरों का है योगदान..
उप्र वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि लंगूरी बंदर शेड्यूल (2) की श्रेणी में आता है। शास्त्रों के मुताबिक लंगूरी बंदर मनुष्य के पूर्वज कहलाते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में लंगूरी बंदरों का बहुत बड़ा योगदान है। इंसानों की जीवन रक्षक दवाइयों का लंगूरी बंदरों पर प्रयोग के बाद ही तय किया जाता है कि इंसानों पर संबंधित दवा का प्रभाव और दुष्प्रभाव कैसा होगा ? इसके बाद ही दवा को आमजनमानस के लिए इस्तेमाल की इजाजत मिलती है। जंगलों और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लंगूरी और आम बंदरों का संरक्षण बहुत जरूरी है। कहा कि पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों के लिए प्रकृति का अनमोल रत्न माने जाते है बंदर।
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