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युवक की मौत से नाराज परिवार वालों ने काटा हंगामा, स्टाफ से की हांथापाई
Updated Wed, 11 Oct 2017 10:39 PM IST
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लखीमपुर खीरी/निघासन।
सीएचसी में इलाज के दौरान होमगार्ड पुत्र की मौत से नाराज लोगों ने मंगलवार रात सीएचसी में जमकर हंगामा काटा। मृतक के परिवार वालों ने इमरजेंसी सेवा में मौजूद डॉक्टर और वार्ड ब्वाय के पुत्र से हाथापाई की। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को किसी तरह शांत कराया। नाराज डॉक्टर इमरजेंसी सेवा बंद कर सीएचसी छोड़कर अपने आवास पर चले गए। एसओ ने किसी तरह से दोनों पक्षों को शांत कराते हुए इमरजेंसी सेवा चालू कराई।
क्षेत्र के गांव कृपाकुंड निवासी होमगार्ड महेश गुप्ता के 22 वर्षीय पुत्र नीतू गुप्ता की तबीयत जब खराब हुई तो घरवाले उसे लेकर मंगलवार सुबह सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां पर डॉक्टर पीके रावत ने उसकी हालत देखी और उसे जिला अस्पताल ले जाने को कहा।
महेश ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर से नीतू का इलाज यहीं करने को कहा। डॉक्टर के इलाज से उसकी लैट्रीन में काफी सुधार हुआ। रात करीब साढे़ नौ बजे उसकी हालत एक बार फिर बिगड़ गई। महेश का छोटा पुत्र आशीष डॉक्टर को बुलाने के लिए गया। डॉक्टर ने मौजूद स्टाफ से इंजेक्शन लगाने को कहा।
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आरोप है कि इंजेक्शन लगाते ही उसकी मौत हो गई। मौत से नाराज परिवार वालों ने ड्यूटी पर तैनात डॉ. पीके रावत को पीटने के लिए घेराबंदी शुरू कर दी। आरोप है कि डॉक्टर से हाथापाई भी की गई। शोर शराबा सुनकर वहां पर मौजूद स्टाफ भी आ गया। लोगों को आक्रोशित देखकर स्टाफ के कर्मचारी भाग निकले।
वार्ड ब्वाय मनोज के पुत्र सूरज ने डॉक्टर को बचाने की कोशिश की तो भीड़ ने उसे भी पीट दिया। किसी तरह लोगों के चंगुल से छूटकर डॉक्टर अपने कार्यालय में पहुंचे। वहां पर भी उनको भीड़ ने नहीं बक्शा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने का दबाव बनाया, लेकिन परिवार वाले तैयार नहीं हुए। पुलिस ने दोनों पक्षों को किसी तरह से शांत कराया।
सीएचसी में डॉक्टर से अभद्रता करना बहुत गलत है। संगठन से बातचीत की गई है। इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- अरुण मिश्रा, सीएचसी प्रभारी
हालत खराब होने के कारण मैंने जिला मुख्यालय ले जाने को कहा था, लेकिन वह लोग पैसा न होने की बात कहकर यहीं इलाज करने का दवाब बना रहे थे। इंजेक्शन सिर्फ पेट दर्द कम करने के लिए दिया गया था। साथ ही कुछ भी खाने पीने के लिए मना किया गया था, लेकिन मृतक को बेड पर लिटाकर पानी पिलाया गया, जिससे दिक्कत आई, मेरी कोई गलती नहीं।
- डॉ. पीके रावत, इमरजेंसी सेवा
दोनों पक्षों से तहरीर देने को कहा गया था, लेकिन होमगार्ड ने लिखकर दे दिया था कि वह पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता। डॉक्टर की तरफ से अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अजय यादव, एसओ
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सीएचसी में इलाज के दौरान होमगार्ड पुत्र की मौत से नाराज लोगों ने मंगलवार रात सीएचसी में जमकर हंगामा काटा। मृतक के परिवार वालों ने इमरजेंसी सेवा में मौजूद डॉक्टर और वार्ड ब्वाय के पुत्र से हाथापाई की। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को किसी तरह शांत कराया। नाराज डॉक्टर इमरजेंसी सेवा बंद कर सीएचसी छोड़कर अपने आवास पर चले गए। एसओ ने किसी तरह से दोनों पक्षों को शांत कराते हुए इमरजेंसी सेवा चालू कराई।
क्षेत्र के गांव कृपाकुंड निवासी होमगार्ड महेश गुप्ता के 22 वर्षीय पुत्र नीतू गुप्ता की तबीयत जब खराब हुई तो घरवाले उसे लेकर मंगलवार सुबह सीएचसी लेकर पहुंचे। यहां पर डॉक्टर पीके रावत ने उसकी हालत देखी और उसे जिला अस्पताल ले जाने को कहा।
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महेश ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर से नीतू का इलाज यहीं करने को कहा। डॉक्टर के इलाज से उसकी लैट्रीन में काफी सुधार हुआ। रात करीब साढे़ नौ बजे उसकी हालत एक बार फिर बिगड़ गई। महेश का छोटा पुत्र आशीष डॉक्टर को बुलाने के लिए गया। डॉक्टर ने मौजूद स्टाफ से इंजेक्शन लगाने को कहा।
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आरोप है कि इंजेक्शन लगाते ही उसकी मौत हो गई। मौत से नाराज परिवार वालों ने ड्यूटी पर तैनात डॉ. पीके रावत को पीटने के लिए घेराबंदी शुरू कर दी। आरोप है कि डॉक्टर से हाथापाई भी की गई। शोर शराबा सुनकर वहां पर मौजूद स्टाफ भी आ गया। लोगों को आक्रोशित देखकर स्टाफ के कर्मचारी भाग निकले।
वार्ड ब्वाय मनोज के पुत्र सूरज ने डॉक्टर को बचाने की कोशिश की तो भीड़ ने उसे भी पीट दिया। किसी तरह लोगों के चंगुल से छूटकर डॉक्टर अपने कार्यालय में पहुंचे। वहां पर भी उनको भीड़ ने नहीं बक्शा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने का दबाव बनाया, लेकिन परिवार वाले तैयार नहीं हुए। पुलिस ने दोनों पक्षों को किसी तरह से शांत कराया।
सीएचसी में डॉक्टर से अभद्रता करना बहुत गलत है। संगठन से बातचीत की गई है। इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- अरुण मिश्रा, सीएचसी प्रभारी
हालत खराब होने के कारण मैंने जिला मुख्यालय ले जाने को कहा था, लेकिन वह लोग पैसा न होने की बात कहकर यहीं इलाज करने का दवाब बना रहे थे। इंजेक्शन सिर्फ पेट दर्द कम करने के लिए दिया गया था। साथ ही कुछ भी खाने पीने के लिए मना किया गया था, लेकिन मृतक को बेड पर लिटाकर पानी पिलाया गया, जिससे दिक्कत आई, मेरी कोई गलती नहीं।
- डॉ. पीके रावत, इमरजेंसी सेवा
दोनों पक्षों से तहरीर देने को कहा गया था, लेकिन होमगार्ड ने लिखकर दे दिया था कि वह पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता। डॉक्टर की तरफ से अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अजय यादव, एसओ