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35 घर राख, तीन साल की मासूम जिंदा जली

Mon, 13 Apr 2015 08:41 PM IST
पलियाकलां/ महंगापुर (लखीमपुर खीरी)।
पलियाकलां/ महंगापुर (लखीमपुर खीरी)। Updated Mon, 13 Apr 2015 08:41 PM IST
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35 Home ash, burnt alive three years Innocent
 संपूर्णानगर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत पढ़ुवा के मजरा कंचनपुर में सोमवार दोपहर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ग्रामीण की तीन साल की बच्ची ललिता और दो बकरियों की जलकर मौत हो गई। वहीं सभी 35 घर राख हो गए। सूचना मिलते ही एसडीएम, सीओ समेत तमाम प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। अग्निकांड में करीब 25 लाख रुपये की क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है।
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सोमवार को दिन में डेढ़ बजे कंचनपुर गांव निवासी कैलाश के घर में आग लग गई। जिसमें उसकी तीन वर्षीय बच्ची ललिता, दो बकरियों की जलकर मौत हो गई। इस समय कैलाश और उसकी पत्नी मंजो घर पर नहीं थी। इसके बाद आग ने देखते ही देखते मोतीलाल, केशवराम, अजय यादव, सालिकराम, राजेश, अवधेश, विजय, प्रेम सागर, ब्रम्हादीन, झगड़ू, पिंटू, लालबहादुर, बृज बिहारी, रामचंद्र, सुखवंती, खुशीराम, अजय कुमार, धमेंद्र समेत करीब 35 लोगों के घरों को चपेट में ले लिया। आग इतनी भयानक थी कि कुछ नहीं बचा सका। जानकारी मिलते ही एसडीएम नागेन्द्र कुमार सिंह, सीओ रामआसरे सिंह मय दलबल के मौके पर पहुंच गए। उन्होंने पीड़ितों को ढाढ़स बंधाया और सभी को सहायता का आश्वासन दिया।
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...हवा का साथ मिला तो आग ने कहर बरपाया
गांव में पसरा मातमी सन्नाटा
पलियाकलां। कंचनपुर गांव में आग को हवा का साथ मिला तो बस कहर ही टूट पड़ा। देखते ही देखते पूरा गांव राख में बदल गया।
सोमवार को लोग अपने कामों में जुटे थे। कोई खेत पर गया था तो कोई घर पर खाना खा और बना रहा था। आसमान बादलों से घिरा था लेकिन हवा चल रही थी, बारिश का अंदेशा जताया जा रहा था कि इसी बीच गांव के एक कोने में बसे घर में आग की लपटें दिखाई दीं और देखते ही देखते हवाओं का साथ पाकर आग ने मिनटों में एक-एक कर सभी के घरों को अपने आगोश में ले लिया। चंद मिनटों में गांव के सभी 35 घर राख हो गए। गांव में भगदड़ मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
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...मंजों की आंखों से बह रही है आंसुओं की धार
पलियाकलां। कंचनपुर गांव में आग में जलकर मरी तीन साल की मासूम ललिता की मां मंजों की आंखों से आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही है। उसे लाडली के जाने का गम तो है ही साथ उससे ज्यादा अफसोस है कि वह चारा लेने क्यों चली गई। कैलाश एक फार्म पर मजदूरी करता है वह वहीं था। दोपहर में मंजों को चारे की फिक्र सताई तो वह अपने तीन और बच्चों को लाडली ललिता का जिम्मा सौंप कर घर से चारा लेने चली गई, लौटी तो ललिता आग में झुलस कर मौत हो चुकी थी और घर भी राख था। ललिता की मौत से कैलाश, मंजों और उसकी तीन संतानों का रो-रो कर बुरा हाल है।

आग की लपटों में जल गए इनके अरमान
पलियाकलां। कंचनपुर गांव में लगी आग में लाखों रुपये की संपत्ति जल गई वहीं तमाम के अरमान भी आग की भेंट चढ़ गए। गांव निवासी पिंटू की शादी अगले महीने होने थी और इसी के लिए उसने घर में करीब 23 हजार रुपये रखे थे जो जल गए। इसी तरह खुशीराम के लड़के का तिलक 16 अप्रैल को था और शादी 17 अप्रैल को। इसका भी घर और हजारों रुपये जल गए। अजय कुमार के पुत्र का मुंडन 15 अप्रैल को होना था बड़ी तैयारियां हो रहीं थीं। दूर दराज से मेहमान भी आने वाले थे लेकिन कुदरत को कुछ और मंजूर था उसने घर तो छीना ही साथ 12 हजार रुपये भी जलकर राख हो गई। सालिकराम ने अपने पोते के मुंडन के लिए 15 हजार रुपये रखे थे जो जल गए। धर्मेंद्र की शादी अगले महीने होने थी। तैयारियों के लिए घर में करीब 17 हजार रुपये रखे थे लेकिन वह आग में जलकर राख हो गए।

देरशाम तक नहीं पहुंच सकी फायर ब्रिगेड
हमेशा की ही तरह इस बार भी फायर सर्विस निघासन के वाहन देरशाम तक मौके पर नहीं पहुंच सके। इससे लोगों में काफी गुस्सा है।

एक बार फिर एसएसबी बनी मद्दगार
कंचनपुर गांव में लगी आग पर काबू पाने में भले ही फायर सर्विस के वाहन न पहुंचे हों लेकिन एसएसबी वहां कुछ देर बाद ही अपने वाहन लेकर पहुंच गई। अफसोस रहा कि वह आग को शुरुआती समय में नहीं रोक पाई क्योंकि आग पूरे गांव को अपनी चपेट में ले चुकी थी। हालांकि उसने आग को ठंडा जरूर किया।

सबको आज ही मिलेगी इमदाद
एसडीएम नागेंद्र कुमार सिंह मौके पर जमे हुए थे। उन्होंने कहा कि आद ही पीड़ितों को तात्कालिक इमदाद मुहैया कराई जाएगी। कुछ सामान मौके पर पहुंच भी गया है।


फूस, खागर, बल्ली के लिए न रोके वन विभाग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि वन विभाग उनके दोबारा घर बनाने के लिए जंगल से लाए जाने वाले फूस, खागर, बल्ली आदि को न रोके। युवा नेता डिंपल शर्मा ने बताया कि वैसे इन पर वन विभाग पाबंदी लगाता रहा है लेकिन मानवता के नाते उसे यह सामग्री अग्निपीड़ितों को मुहैया करानी चाहिए।
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