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पालिका की लापरवाही बनी मासूम की मौत की वजह
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:16 AM IST
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मोहम्मदी खीरी।
मोहल्ला पश्चिमी लखपेड़ा में मंगलवार की सुबह नाले में गिरकर हुई बच्चे की मौत के बारे में जिसने भी सुना उसी ने पालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। पालिका प्रशासन द्वारा विकास के किए जा रहे तमाम दावों को बच्चे की मौत ने खोखला साबित कर दिया। शहर के लोगों का कहना है कि शहर में छोटे बड़े नालों की संख्या 19 के करीब है और सभी खुले हैं, जिन पर पालिका ने पत्थर डलवाना जरूरी नहीं समझा।
मंगलवार को सुबह मोहल्ला पश्चिमी लखपेड़ा निवासी सगीर अहमद का ढाई वर्षीय पुत्र फुजैल घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान वह घर के पास सड़क पार बने खुले नाले में जा गिरा। घंटों तक ढूंढे जाने के बाद बच्चे को नाले से मृत अवस्था में निकाला जा सका। मासूम की मौत से शहर में हड़कंप मच गया, जिसने भी इस हादसे को सुना वही पालिका को कोसता नजर आया। लोगों का कहना है कि इस तरह के नालों को लेकर यदि पालिका जरा भी संजीदा होती तो यह हादसा नहीं होता।
आए दिन नाले बनते हैं हादसों का कारण
शहर के लोगों का कहना है कि बच्चे की मौत का हादसा पहला नहीं है। कई साल पहले भी नाले में गिरकर एक युवक की मौत हो चुकी है। वहीं इन नालों में जानवरों और लोगों को का गिरना तो रोज की ही बात है।
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नालों पर पत्थरों का न पड़ना पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही है। नालों पर पत्थर डलवाने के लिए कई बार पालिका में कहा, लेकिन बजट न होने की बात कहकर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
- रवि गुप्ता, पालिका सदस्य वार्ड 19
बच्चे की मौत की घटना दुखद है। इसके लिए पालिका प्रशासन को सीधे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। नाले अमूमन खुले हैं, पत्थर डाल दिए जाने से उनकी सफाई होने में दिक्क्त आएगी।
- अतुल रस्तोगी, अध्यक्ष नगर व्यापार मंडल
नालों पर पत्थरों का न होना खतरनाक है। खुले नाले आए दिन हादसों को दावत देते हैं। पालिका प्रशासन को नालों पर पत्थर डलवाना चाहिए।
- मोहम्मद कामिल पालिका सदस्य वार्ड 13
बच्चे की मौत के बाद पालिका प्रशासन ने नाले पर 15 जनवरी तक पत्थर डलवाने का आश्वासन दिया है। यदि पालिका संजीदा होती तो हमारे बेटे की मौत नहीं होती। बेटे के मौत की जिम्मेदारी पालिका है।
- सगीर अहमद, पीड़ित पिता
बच्चे की मौत की घटना दुखद है। शहर में जो भी नाले खुले हैं उन पर 15 जनवरी तक पत्थर डलवाने के लिए ईओ को निर्देशित किया जा रहा है।
- स्वाती शुक्ला, एसडीएम मोहम्मदी
घटना दुखद है। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। अतिशीघ्र अभियान चलाकर खुले नालों पर पत्थर डलवाए जाएंगे।
-संदीप मेहरोत्रा, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष
अपने बचाव में पालिका ईओ पीड़ित की ही गिना रहे कमियां
पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि शहर में पांच-छह ही बड़े नाले हैं और जिस मोहल्ले में हादसा हुआ है वहां के लोगों ने नाले की दीवार पर ही मकान की दीवार खड़ी कर रखी है, जिससे पत्थर रखने तक की जगह नहीं है। नाले ढाई से तीन फुट तक गहरे हैं। ईओ का कहना है कि जल्द ही जेई से सर्वे कराकर नाल पर पत्थर डलवाने का काम शुरू किया जाएगा। नाले की दीवार पर दीवार बनाने वालों को चिह्नित करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मोहल्ला पश्चिमी लखपेड़ा में मंगलवार की सुबह नाले में गिरकर हुई बच्चे की मौत के बारे में जिसने भी सुना उसी ने पालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। पालिका प्रशासन द्वारा विकास के किए जा रहे तमाम दावों को बच्चे की मौत ने खोखला साबित कर दिया। शहर के लोगों का कहना है कि शहर में छोटे बड़े नालों की संख्या 19 के करीब है और सभी खुले हैं, जिन पर पालिका ने पत्थर डलवाना जरूरी नहीं समझा।
मंगलवार को सुबह मोहल्ला पश्चिमी लखपेड़ा निवासी सगीर अहमद का ढाई वर्षीय पुत्र फुजैल घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान वह घर के पास सड़क पार बने खुले नाले में जा गिरा। घंटों तक ढूंढे जाने के बाद बच्चे को नाले से मृत अवस्था में निकाला जा सका। मासूम की मौत से शहर में हड़कंप मच गया, जिसने भी इस हादसे को सुना वही पालिका को कोसता नजर आया। लोगों का कहना है कि इस तरह के नालों को लेकर यदि पालिका जरा भी संजीदा होती तो यह हादसा नहीं होता।
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आए दिन नाले बनते हैं हादसों का कारण
शहर के लोगों का कहना है कि बच्चे की मौत का हादसा पहला नहीं है। कई साल पहले भी नाले में गिरकर एक युवक की मौत हो चुकी है। वहीं इन नालों में जानवरों और लोगों को का गिरना तो रोज की ही बात है।
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नालों पर पत्थरों का न पड़ना पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही है। नालों पर पत्थर डलवाने के लिए कई बार पालिका में कहा, लेकिन बजट न होने की बात कहकर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
- रवि गुप्ता, पालिका सदस्य वार्ड 19
बच्चे की मौत की घटना दुखद है। इसके लिए पालिका प्रशासन को सीधे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। नाले अमूमन खुले हैं, पत्थर डाल दिए जाने से उनकी सफाई होने में दिक्क्त आएगी।
- अतुल रस्तोगी, अध्यक्ष नगर व्यापार मंडल
नालों पर पत्थरों का न होना खतरनाक है। खुले नाले आए दिन हादसों को दावत देते हैं। पालिका प्रशासन को नालों पर पत्थर डलवाना चाहिए।
- मोहम्मद कामिल पालिका सदस्य वार्ड 13
बच्चे की मौत के बाद पालिका प्रशासन ने नाले पर 15 जनवरी तक पत्थर डलवाने का आश्वासन दिया है। यदि पालिका संजीदा होती तो हमारे बेटे की मौत नहीं होती। बेटे के मौत की जिम्मेदारी पालिका है।
- सगीर अहमद, पीड़ित पिता
बच्चे की मौत की घटना दुखद है। शहर में जो भी नाले खुले हैं उन पर 15 जनवरी तक पत्थर डलवाने के लिए ईओ को निर्देशित किया जा रहा है।
- स्वाती शुक्ला, एसडीएम मोहम्मदी
घटना दुखद है। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। अतिशीघ्र अभियान चलाकर खुले नालों पर पत्थर डलवाए जाएंगे।
-संदीप मेहरोत्रा, नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष
अपने बचाव में पालिका ईओ पीड़ित की ही गिना रहे कमियां
पालिका ईओ रविशंकर शुक्ला का कहना है कि शहर में पांच-छह ही बड़े नाले हैं और जिस मोहल्ले में हादसा हुआ है वहां के लोगों ने नाले की दीवार पर ही मकान की दीवार खड़ी कर रखी है, जिससे पत्थर रखने तक की जगह नहीं है। नाले ढाई से तीन फुट तक गहरे हैं। ईओ का कहना है कि जल्द ही जेई से सर्वे कराकर नाल पर पत्थर डलवाने का काम शुरू किया जाएगा। नाले की दीवार पर दीवार बनाने वालों को चिह्नित करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।