{"_id":"5712824a4f1c1bd06c4a6cae","slug":"200-house-burned-in-fire-three-died","type":"story","status":"publish","title_hn":"आग से दो सौ घर राख, तीन मरे","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आग से दो सौ घर राख, तीन मरे
अमर उजाला ब्यूरो/बिजुआ (लखीमपुर खीरी)।
Updated Sat, 16 Apr 2016 11:53 PM IST
विज्ञापन
अाग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर के गांव महेशापुर में भीषण अग्निकांड
दादी पोते जिंदा जल गए, वृद्ध की दम घुटने से मौत
गोला तहसील के महेशापुर गांव में आग लगने से दादी-पोते समेत तीन लोगों को झुलसकर मौत हो गई। शाम करीब चार बजे लगी आग रात तक नहीं बुझाई जा सकी थी। आग की चपेट में दो सौ से अधिक घर आने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं सौ से अधिक मवेशी भी आग की चपेट में आए हैं। आग लगने की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड को गांव पहुंचने में दो घंटे से अधिक का समय लग गया।
शनिवार शाम को गांव अचानक आग लग गई। आग कैसे लगी, इसका पता नहीं लगा। तेज हवा चलने के कारण आग बढ़ने लगी और बड़कन्ने के घर के पास लगी आग में एक-एक कर छप्परनुमा घर जलते चले गए। आग इतनी विकराल थी कि लोग अपने घरों से सामान निकालना तो दूर गांव में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाए। छप्पर वाले मकानों के साथ पक्के मकान भी आग की चपेट में आ गए। इसी बीच आग की लपटों में गांव के बाबूराम का 15 साल का बेटा आलोक और उनकी 60 वर्षीय मां बहेशा जलते छप्पर के नीचे घिर गईं। कमजोर आंखों वाली दादी को बचाने के लिए आलोक उन्हें निकालने गया लेकिन छप्पर उन्हीं के ऊपर गिर गया। दोनों आग की लपटों में घिर गए और उनकी मौके पर मौत हो गई। दादी-पोते की मौत से गांव में कोहराम मच गया। वहीं अस्सी वर्षीय चिरंजीव भार्गव धुएं में घिर गए थे। उन्हें बाहर निकाला गया लेकिन देर रात उनकी मौत हो गई। मृत आलोक के भाई समेत चार अन्य लोग भी झुलस गए। सूचना पर भीरा एसओ ब्रजराज यादव टीम के साथ गांव पहुंचे। देर शाम विधायक विनय तिवारी गांव पहुंचे। उन्होंने एसडीएम से बात करके गांव में राहत कार्य में तेजी लाने को कहा। राजस्व टीम भी गांव पहुंच गई।
विज्ञापन
दादी पोते जिंदा जल गए, वृद्ध की दम घुटने से मौत
गोला तहसील के महेशापुर गांव में आग लगने से दादी-पोते समेत तीन लोगों को झुलसकर मौत हो गई। शाम करीब चार बजे लगी आग रात तक नहीं बुझाई जा सकी थी। आग की चपेट में दो सौ से अधिक घर आने का अनुमान जताया जा रहा है। वहीं सौ से अधिक मवेशी भी आग की चपेट में आए हैं। आग लगने की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड को गांव पहुंचने में दो घंटे से अधिक का समय लग गया।
शनिवार शाम को गांव अचानक आग लग गई। आग कैसे लगी, इसका पता नहीं लगा। तेज हवा चलने के कारण आग बढ़ने लगी और बड़कन्ने के घर के पास लगी आग में एक-एक कर छप्परनुमा घर जलते चले गए। आग इतनी विकराल थी कि लोग अपने घरों से सामान निकालना तो दूर गांव में घुसने की हिम्मत नहीं कर पाए। छप्पर वाले मकानों के साथ पक्के मकान भी आग की चपेट में आ गए। इसी बीच आग की लपटों में गांव के बाबूराम का 15 साल का बेटा आलोक और उनकी 60 वर्षीय मां बहेशा जलते छप्पर के नीचे घिर गईं। कमजोर आंखों वाली दादी को बचाने के लिए आलोक उन्हें निकालने गया लेकिन छप्पर उन्हीं के ऊपर गिर गया। दोनों आग की लपटों में घिर गए और उनकी मौके पर मौत हो गई। दादी-पोते की मौत से गांव में कोहराम मच गया। वहीं अस्सी वर्षीय चिरंजीव भार्गव धुएं में घिर गए थे। उन्हें बाहर निकाला गया लेकिन देर रात उनकी मौत हो गई। मृत आलोक के भाई समेत चार अन्य लोग भी झुलस गए। सूचना पर भीरा एसओ ब्रजराज यादव टीम के साथ गांव पहुंचे। देर शाम विधायक विनय तिवारी गांव पहुंचे। उन्होंने एसडीएम से बात करके गांव में राहत कार्य में तेजी लाने को कहा। राजस्व टीम भी गांव पहुंच गई।
विज्ञापन