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20 दिन पहले ही रची थी हत्या की साजिश
लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:34 PM IST
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शहर से सटे गांव छाउछ निवासी जितेंद्र वर्मा उर्फ जीतू हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है, जिसमें जीतू के करीबी दोस्त ही दगेबाज निकले। इस हत्या के पीछे सूदखोरी के लिए रुपये उधार देना कारण सामने आया है, जिसकी साजिश का खाका करीब 20 दिन पहले ही अभियुक्तों ने तैैयार कर लिया था।
नए वर्ष की पार्टी मनाने के बहाने हत्यारों ने जीतू को बुलाया था, जिसके बाद कार में ही रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। फिर शव को रवही पुल के नीचे नहर में फेंककर हत्यारों ने कार हरगांव में शराब दुकान के सामने खड़ी कर दी थी। स्वाट टीम की मदद से कोतवाली पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चालान भेज दिया है।
छाउछ निवासी जितेंद्र वर्मा उर्फ जीतू एक जनवरी 2016 की शाम करीब पांच बजे कार से निकला था, जिसके बाद वह घर नहीं लौटा। दूसरे दिन हरगांव में एक शराब दुकान के सामने लावारिस हाल में कार बरामद हुई थी, जिसमें उसका मोबाइल भी बरामद हुआ था।
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इस मामले में हरगांव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद परिवार वालों ने एसपी से मिलकर सदर कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। 12 दिन बाद 13 जनवरी 2015 को जीतू का शव सीतापुर जिले के थाना रामपुर कलां क्षेत्र में सहायक शारदा नहर से बरामद हुआ था। इसके बाद सीओ सिटी एमपी सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने घटना के खुलासे के लिए सिलसिलेवार साक्ष्यों को संकलित किया और सर्विलांस की मदद से सुरागरसी कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया। पुलिस ने हत्याकांड में शामिल मुख्य अभियुक्त और जीतू के करीबी दोस्त छाउछ निवासी अनस, खीरी टाउन के अवधी टोला निवासी इनायत और मकसूद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अनस और उसके दोस्त इनायत पर जीतू का करीब एक लाख रुपये बकाया था, क्योंकि यह दोनों जीतू के साथ मिलकर मेंथा ऑयल का कारोबार भी करते थे।
बार-बार तकादा किए जाने और ब्याज की रकम चुकानेे से परेशान होकर आरोपियों ने हत्या का तानाबाना बुना था। अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने जीतू की जैकेट, सोने की चेन, अंगूठी और हत्या में प्रयुक्त रस्सी बरामद कर ली। अपहरण के मुकदमे को हत्या और साक्ष्य मिटाने के प्रयास की धाराओं में मुकदमा तरमीम कर दिया और तीनों अभियुक्तों का चालान भेज दिया हैै। मामले की विवेचना कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव करेंगे।
पहले दारू पिलाई फिर गला घोंटा
जीतू के करीबी दोस्तों में शामिल अनस पेशे से ईदगाह में घड़ी की दुकान करता है। अनस ने करीब 20 दिन पहले ही जीतू को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी, जिसमें खीरी टाउन निवासी इनायत और मकसूद को शामिल कर लिया। एक जनवरी को अनस ने जीतू को अपनी दुकान पर बुलाया, फिर उसके साथ कार में बैठकर रास्ते में इनायत और मकसूद को बैैठाकर रामापुर में शराब खरीदी। इसके बाद सभी ने रवहीं पुल पर शराब पी। इस दौरान जीतू के फोन पर उसकी पत्नी का फोन आया, तो अनस के कहने पर जीतू ने हरगांव में सोनू यहां दावत पर जाने की बात कही। इसके बाद कार को अनस चला रहा था, जबकि पीछे बैठे इनायत और मकसूद ने जीतू के गले में रस्सी कसकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद उसकी जैकेट, सोनू की चेन, अंगूठी उतारकर शव को नहर में फेंक दिया। पुलिस को गुमराह करने के लिए तीनों हत्यारों ने कार को हरगांव में लावारिस छोड़ दिया।
नए मोबाइल और सिम खरीदे
हत्याकांड का खाका तैयार करने के साथ ही शातिर दिमाग अनस ने पुलिस को चकमा देने के लिए दो नए मोबाइल और सिम भी खरीदे थे। जिससे अनस और इनायत आपस में बातचीत करते थे। सीओ सिटी एमपी सिंह ने बताया कि पहले 31 दिसंबर 2015 की रात को जीतू की हत्या करने का इरादा बनाया था, लेकिन उस दिन जीतू के पास दोस्त अमरजीत का मोबाइल छूट गया था। अमरजीत बार बार फोन कर मोबाइल मांग रहा था, जिस पर जीतू ने इनायत को मोबाइल देकर अमरजीत के पास भेजा था। इससे अनस ने उस रात हत्या का इरादा बदल दिया और अगले दिन एक जनवरी की रात को घटना को अंजाम तक पहुंचा दिया।
फोन काल से खुलासा
हत्यारों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए नए मोबाइल और सिम की मदद ली, लेकिन उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आखिरी बार जीतू के नंबर पर आई काल के आधार पर हत्यारों को ट्रेस कर लिया।
टीम में ये रहे शामिल
एलआरपी चौकी इंचार्ज मनोज सिंह, महेवागंज चौकी इंचार्ज समीर जावेद, रामापुर चौकी इंचार्ज शमशेर बहादुर सिंह, स्वाट टीम प्रभारी प्रमोद सिंह, सिपाही शराफत, वसीम, सर्वेंद्र सिंह, यज्ञनरायन मिश्रा, अजेंद्र यादव, शेखर चौहान, दिनेश यादव, वशिष्ठ पांडेय शामिल रहे।
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नए वर्ष की पार्टी मनाने के बहाने हत्यारों ने जीतू को बुलाया था, जिसके बाद कार में ही रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। फिर शव को रवही पुल के नीचे नहर में फेंककर हत्यारों ने कार हरगांव में शराब दुकान के सामने खड़ी कर दी थी। स्वाट टीम की मदद से कोतवाली पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चालान भेज दिया है।
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छाउछ निवासी जितेंद्र वर्मा उर्फ जीतू एक जनवरी 2016 की शाम करीब पांच बजे कार से निकला था, जिसके बाद वह घर नहीं लौटा। दूसरे दिन हरगांव में एक शराब दुकान के सामने लावारिस हाल में कार बरामद हुई थी, जिसमें उसका मोबाइल भी बरामद हुआ था।
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इस मामले में हरगांव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद परिवार वालों ने एसपी से मिलकर सदर कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। 12 दिन बाद 13 जनवरी 2015 को जीतू का शव सीतापुर जिले के थाना रामपुर कलां क्षेत्र में सहायक शारदा नहर से बरामद हुआ था। इसके बाद सीओ सिटी एमपी सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने घटना के खुलासे के लिए सिलसिलेवार साक्ष्यों को संकलित किया और सर्विलांस की मदद से सुरागरसी कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया। पुलिस ने हत्याकांड में शामिल मुख्य अभियुक्त और जीतू के करीबी दोस्त छाउछ निवासी अनस, खीरी टाउन के अवधी टोला निवासी इनायत और मकसूद को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अनस और उसके दोस्त इनायत पर जीतू का करीब एक लाख रुपये बकाया था, क्योंकि यह दोनों जीतू के साथ मिलकर मेंथा ऑयल का कारोबार भी करते थे।
बार-बार तकादा किए जाने और ब्याज की रकम चुकानेे से परेशान होकर आरोपियों ने हत्या का तानाबाना बुना था। अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने जीतू की जैकेट, सोने की चेन, अंगूठी और हत्या में प्रयुक्त रस्सी बरामद कर ली। अपहरण के मुकदमे को हत्या और साक्ष्य मिटाने के प्रयास की धाराओं में मुकदमा तरमीम कर दिया और तीनों अभियुक्तों का चालान भेज दिया हैै। मामले की विवेचना कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव करेंगे।
पहले दारू पिलाई फिर गला घोंटा
जीतू के करीबी दोस्तों में शामिल अनस पेशे से ईदगाह में घड़ी की दुकान करता है। अनस ने करीब 20 दिन पहले ही जीतू को रास्ते से हटाने की योजना बना ली थी, जिसमें खीरी टाउन निवासी इनायत और मकसूद को शामिल कर लिया। एक जनवरी को अनस ने जीतू को अपनी दुकान पर बुलाया, फिर उसके साथ कार में बैठकर रास्ते में इनायत और मकसूद को बैैठाकर रामापुर में शराब खरीदी। इसके बाद सभी ने रवहीं पुल पर शराब पी। इस दौरान जीतू के फोन पर उसकी पत्नी का फोन आया, तो अनस के कहने पर जीतू ने हरगांव में सोनू यहां दावत पर जाने की बात कही। इसके बाद कार को अनस चला रहा था, जबकि पीछे बैठे इनायत और मकसूद ने जीतू के गले में रस्सी कसकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद उसकी जैकेट, सोनू की चेन, अंगूठी उतारकर शव को नहर में फेंक दिया। पुलिस को गुमराह करने के लिए तीनों हत्यारों ने कार को हरगांव में लावारिस छोड़ दिया।
नए मोबाइल और सिम खरीदे
हत्याकांड का खाका तैयार करने के साथ ही शातिर दिमाग अनस ने पुलिस को चकमा देने के लिए दो नए मोबाइल और सिम भी खरीदे थे। जिससे अनस और इनायत आपस में बातचीत करते थे। सीओ सिटी एमपी सिंह ने बताया कि पहले 31 दिसंबर 2015 की रात को जीतू की हत्या करने का इरादा बनाया था, लेकिन उस दिन जीतू के पास दोस्त अमरजीत का मोबाइल छूट गया था। अमरजीत बार बार फोन कर मोबाइल मांग रहा था, जिस पर जीतू ने इनायत को मोबाइल देकर अमरजीत के पास भेजा था। इससे अनस ने उस रात हत्या का इरादा बदल दिया और अगले दिन एक जनवरी की रात को घटना को अंजाम तक पहुंचा दिया।
फोन काल से खुलासा
हत्यारों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए नए मोबाइल और सिम की मदद ली, लेकिन उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आखिरी बार जीतू के नंबर पर आई काल के आधार पर हत्यारों को ट्रेस कर लिया।
टीम में ये रहे शामिल
एलआरपी चौकी इंचार्ज मनोज सिंह, महेवागंज चौकी इंचार्ज समीर जावेद, रामापुर चौकी इंचार्ज शमशेर बहादुर सिंह, स्वाट टीम प्रभारी प्रमोद सिंह, सिपाही शराफत, वसीम, सर्वेंद्र सिंह, यज्ञनरायन मिश्रा, अजेंद्र यादव, शेखर चौहान, दिनेश यादव, वशिष्ठ पांडेय शामिल रहे।