{"_id":"5fb6b2a68ebc3e9bf3042928","slug":"crime-lakhimpur-news-bly427375443","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसएसबी ने नेपाल की दो युवतियों को छुड़ाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसएसबी ने नेपाल की दो युवतियों को छुड़ाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौरीफंटा (लखीमपुर खीरी)। गौरीफंटा सीमा पर तैनात एसएसबी के जवानों ने बुधवार की देर शाम दो नेपाली युवतियों को नेपाल के युवकों से मुक्त करवाया। फिलहाल दोनों युवतियों को नेपाल पुलिस और वहां के एक एनजीओ के सुपुर्द कर दिया गया है।
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के कमानडेंट मुन्ना सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम को गौरीफंटा बॉर्डर चेकपोस्ट पर सहायक कमानडेंट खैमराज, हेड कांस्टेबल आशीष पंवार, महिला कांस्टेबल के साथ चेकिंग कर रहे थे। तभी धनगढ़ी-नेपाल की ओर से नेपाल के दो युवक ओर दो युवतियां बॉर्डर पार जाते दिखे। जिन्हें रोक कर पूछताछ की गई तो पता चला कि सभी बंगलुरू जा रहे हैं। सूचना नेपाल पुलिस व नेपाली एनजीओ पुर्नस्थापना को दी गई। जिसके बाद दोनों युवतियों व युवकों को एनजीओ के संयोजक उमेश शिवाकोटी और निर्मला के सुपुर्द कर दिया। बता दें कि मानव तस्करी रोकने को लेकर नेपाल सीमा पर दोनों तरफ एसएसबी, नेपाली एपीएफ और माइती नेपाल तथा शांति पुर्नस्थापना संस्थाएं लगी हुई हैं। इसके बाद भी दलालों के जरिए नेपाल से युवतियों को भारत तथा अन्य देशों के लिए भेजने का धंधा लगातार जारी है। संवाद
विज्ञापन
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी के कमानडेंट मुन्ना सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम को गौरीफंटा बॉर्डर चेकपोस्ट पर सहायक कमानडेंट खैमराज, हेड कांस्टेबल आशीष पंवार, महिला कांस्टेबल के साथ चेकिंग कर रहे थे। तभी धनगढ़ी-नेपाल की ओर से नेपाल के दो युवक ओर दो युवतियां बॉर्डर पार जाते दिखे। जिन्हें रोक कर पूछताछ की गई तो पता चला कि सभी बंगलुरू जा रहे हैं। सूचना नेपाल पुलिस व नेपाली एनजीओ पुर्नस्थापना को दी गई। जिसके बाद दोनों युवतियों व युवकों को एनजीओ के संयोजक उमेश शिवाकोटी और निर्मला के सुपुर्द कर दिया। बता दें कि मानव तस्करी रोकने को लेकर नेपाल सीमा पर दोनों तरफ एसएसबी, नेपाली एपीएफ और माइती नेपाल तथा शांति पुर्नस्थापना संस्थाएं लगी हुई हैं। इसके बाद भी दलालों के जरिए नेपाल से युवतियों को भारत तथा अन्य देशों के लिए भेजने का धंधा लगातार जारी है। संवाद
विज्ञापन