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जंगल में अवैध शराब का कारोबार, मांस के लिए वन्यजीव का शिकार
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जंगल से सटे इलाके में बनती अवैध शराब। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज जंगल और उससे सटे इलाके में चल रहा अवैध शराब बनाने का धंधा भी वन्यजीवों के लिए खतरे का सबब बना हुआ है। वन विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद यह धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शराब का धंधा करने वाले लोग मौका पाकर वन्यजीवों का शिकार भी कर लेते हैं।
जंगल के अंदर शराब बनाने वाले पेशेवर शिकारी तो नहीं होतेेे, लेकिन मांस के लिए जंगली सुअर, हिरन आदि वन्यजीवों का शिकार चोरी-छिपे कर लेते हैं। पहले भी ऐसे कुछ मामले प्रकाश में आए हैं। यहीं नहीं जंगल में शराब बनाते समय अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। मैलानी रेंज जंगल से सटे इलाके में हुए बाघिन के शिकार में भी अवैध शराब के धंधेबाजों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। वन विभाग भी इस बिंदु को अपने जांच के दायरे में रखा है।
कठिना नदी किनारे बनाया अड्डा
दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल से सटकर गुजरने वाली कठिना नदी किनारे अवैध शराब बनाने वालों ने अपना अड्डा बना रखा है। यहां बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनती है। यहीं नहीं दक्षिण खीरी वन प्रभाग से होते हुए कठिना नदी शाहजहांपुर जिले तक जाती है। दोनों किनारों पर घने जंगल हैं और यह घने जंगल अवैध शराब बनाने के केंद्र बन चुके हैं। आबकारी विभाग और पुलिस भी इन अवैध शराब बनाने वाले लोगों पर रोक नहीं लगा पा रही है।
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बरौंछा नाला के किनारे भी होता है शराब कारोबार
मैलानी रेंज जंगल से सटे बरौंछा नाला इलाके में भी अवैध शराब बनाने का धंधा जोरों से चलता है। जंगल से निकलकर जंगली सुअर आदि शाकाहारी वन्यजीव खेतों में आ जाते हैं। अवैध शराब के कारोबारी इन वन्यजीवों को पकड़ने के लिए खाबड़, फंदा आदि लगाते हैं। फंदे में कोई शाकाहारी जीव फंस गया तो ये कारोबारी उसे मारकर चोरी-छिपे मांस खा जाते हैं। इससे भी जंगल से सटे इलाके में वन्यजीवों के शिकार का खतरा बना रहता है।
जंगल में शराब बनाने के पूर्व में कई मामले सामने आ चुके हैं। जिनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। अवैध शराब बनाने वाले लोग शिकार जैसे अपराधों में लिप्त हो सकते हैं। वन विभाग इस दृष्टिकोण से नजर बनाए हुए है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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जंगल के अंदर शराब बनाने वाले पेशेवर शिकारी तो नहीं होतेेे, लेकिन मांस के लिए जंगली सुअर, हिरन आदि वन्यजीवों का शिकार चोरी-छिपे कर लेते हैं। पहले भी ऐसे कुछ मामले प्रकाश में आए हैं। यहीं नहीं जंगल में शराब बनाते समय अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। मैलानी रेंज जंगल से सटे इलाके में हुए बाघिन के शिकार में भी अवैध शराब के धंधेबाजों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। वन विभाग भी इस बिंदु को अपने जांच के दायरे में रखा है।
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कठिना नदी किनारे बनाया अड्डा
दक्षिण खीरी वन प्रभाग जंगल से सटकर गुजरने वाली कठिना नदी किनारे अवैध शराब बनाने वालों ने अपना अड्डा बना रखा है। यहां बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनती है। यहीं नहीं दक्षिण खीरी वन प्रभाग से होते हुए कठिना नदी शाहजहांपुर जिले तक जाती है। दोनों किनारों पर घने जंगल हैं और यह घने जंगल अवैध शराब बनाने के केंद्र बन चुके हैं। आबकारी विभाग और पुलिस भी इन अवैध शराब बनाने वाले लोगों पर रोक नहीं लगा पा रही है।
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बरौंछा नाला के किनारे भी होता है शराब कारोबार
मैलानी रेंज जंगल से सटे बरौंछा नाला इलाके में भी अवैध शराब बनाने का धंधा जोरों से चलता है। जंगल से निकलकर जंगली सुअर आदि शाकाहारी वन्यजीव खेतों में आ जाते हैं। अवैध शराब के कारोबारी इन वन्यजीवों को पकड़ने के लिए खाबड़, फंदा आदि लगाते हैं। फंदे में कोई शाकाहारी जीव फंस गया तो ये कारोबारी उसे मारकर चोरी-छिपे मांस खा जाते हैं। इससे भी जंगल से सटे इलाके में वन्यजीवों के शिकार का खतरा बना रहता है।
जंगल में शराब बनाने के पूर्व में कई मामले सामने आ चुके हैं। जिनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। अवैध शराब बनाने वाले लोग शिकार जैसे अपराधों में लिप्त हो सकते हैं। वन विभाग इस दृष्टिकोण से नजर बनाए हुए है।
- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।