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ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ीं पर खनन माफिया पर कार्रवाई शेष
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लखीमपुर खीरी। प्रभारी मंत्री अशोक कटारिया के कड़े रुख के बाद चार दिन में पुलिस-प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ीं, लेकिन किसी खनन माफिया के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं की। ऐसे में लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है ताकि प्रभारी मंत्री को आंकड़े दिखाकर संतुष्ट किया जा सके।
जनपद में अवैध खनन की जड़ें काफी हद तक गहरी पैठ बना चुकी हैं, क्योंकि इस धंधे में लागत से कई गुना अधिक कमाई है। सूत्रों की माने तो बालू की एक ट्रॉली पर एक हजार की लागत आती है, जिससे आठ से 10 हजार की कमाई होती है। ओवरलोडिंग करके कमाई को और डबल कर लेते हैं। इसलिए सफेदपोश नेताओं के साथ ही पुलिस-प्रशासन के कुछ लोग भी इसमें बड़े हिस्सेदार बने हैं। अवैध खनन के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों की हकीकत को आसानी से समझा जा सकता है कि चार दिनों में बालू खनन में लगी 22 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और दो डंपर पकड़े हैं, जिनके चालकों/वाहन स्वामी के खिलाफ खनन एक्ट के तहत केस काटे गए हैं। एक भी केस में खनन कराने वाले माफिया के नाम शामिल नहीं किया गया हैं और न ही उनका कहीं जिक्र आया है। सिर्फ औपचारिकता निभाने वाली कार्रवाई की जा रही है, जिससे इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जुर्माना लेकर छोड़ दिया जाएगा। खनन माफिया पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें कोई कार्रवाई का भय भी नहीं है। ऐसे में अवैध खनन पर रोक लगाना सिर्फ कुछ दिनों का भ्रम है, क्योंकि जैसे ही मामला ठंडा होगा वैसे ही खनन का कारोबार फिर धड़ल्ले से चालू हो जाएगा।
खनन निरीक्षक अजीत पांडे का कहना है कि अवैध खनन में पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ काटे गए केस की सुनवाई डीएम करेंगे। इसमें ट्रैक्टर चालक/वाहन स्वामी ही आरोपी बनाए गए हैं, जो अपनी गलती मानते हुए दोबारा ऐसी गलती न होने की बात कहेंगे। इसके बाद जुर्माना बोला जाएगा, जिसे वसूलकर वाहनों को छोड़ दिया जाएगा।
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अभी अवैध खनन में लगे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है, जिसमें ओवरलोड पाए जाने वाले वाहनों पर एआरटीओ कार्रवाई करेंगे। अभी खनन कराने वालों का नाम सामने नहीं आया है, जैसे ही इनके नाम सामने आएंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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जनपद में अवैध खनन की जड़ें काफी हद तक गहरी पैठ बना चुकी हैं, क्योंकि इस धंधे में लागत से कई गुना अधिक कमाई है। सूत्रों की माने तो बालू की एक ट्रॉली पर एक हजार की लागत आती है, जिससे आठ से 10 हजार की कमाई होती है। ओवरलोडिंग करके कमाई को और डबल कर लेते हैं। इसलिए सफेदपोश नेताओं के साथ ही पुलिस-प्रशासन के कुछ लोग भी इसमें बड़े हिस्सेदार बने हैं। अवैध खनन के खिलाफ की जा रही कार्रवाइयों की हकीकत को आसानी से समझा जा सकता है कि चार दिनों में बालू खनन में लगी 22 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और दो डंपर पकड़े हैं, जिनके चालकों/वाहन स्वामी के खिलाफ खनन एक्ट के तहत केस काटे गए हैं। एक भी केस में खनन कराने वाले माफिया के नाम शामिल नहीं किया गया हैं और न ही उनका कहीं जिक्र आया है। सिर्फ औपचारिकता निभाने वाली कार्रवाई की जा रही है, जिससे इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जुर्माना लेकर छोड़ दिया जाएगा। खनन माफिया पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें कोई कार्रवाई का भय भी नहीं है। ऐसे में अवैध खनन पर रोक लगाना सिर्फ कुछ दिनों का भ्रम है, क्योंकि जैसे ही मामला ठंडा होगा वैसे ही खनन का कारोबार फिर धड़ल्ले से चालू हो जाएगा।
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खनन निरीक्षक अजीत पांडे का कहना है कि अवैध खनन में पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ काटे गए केस की सुनवाई डीएम करेंगे। इसमें ट्रैक्टर चालक/वाहन स्वामी ही आरोपी बनाए गए हैं, जो अपनी गलती मानते हुए दोबारा ऐसी गलती न होने की बात कहेंगे। इसके बाद जुर्माना बोला जाएगा, जिसे वसूलकर वाहनों को छोड़ दिया जाएगा।
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अभी अवैध खनन में लगे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है, जिसमें ओवरलोड पाए जाने वाले वाहनों पर एआरटीओ कार्रवाई करेंगे। अभी खनन कराने वालों का नाम सामने नहीं आया है, जैसे ही इनके नाम सामने आएंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम