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एटीएस नहीं ढूंढ पाई तो हमारे पास कौन सी जादुई छड़ी हैं..कमरू मौज करो
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लखीमपुर खीरी। क्राइस्ट चर्च पर बम हमले के मामले में विवेचक का कहना है कि एटीएस जब मास्टरमाइंड कमरू और गुड्डू का पता नहीं ढूंढ पाई तो उनके पास ऐसी कौन सी जादुई छड़ी है, जिससे वह उसका पता मालूम कर लें। इस बयान से साफ है कि यूपी पुलिस मास्टरमाइंड कमरू और उसके भागे साथियों की गिरफ्तारी फिलहाल तो होने वाली नहीं। इससे हमले के पीछे छुपे कारणों का भी पता चलना मुश्किल है।
पुराने एसपी बंगले के निकट क्राइस्ट चर्च पर 3 साल पहले 17 सितंबर की रात दो बम धमाके हुए थे। यूपी पुलिस शुरुआती दौर से इस बम धमाके की जांच में नाकाम साबित हुई। जब यह हमला हुआ तो सदर कोतवाली पुलिस ने इसे किसी की शरारत माना। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना एसआई मोहम्मद रफी आलम को सौंपी, लेकिन पुलिस घटना को लेकर गंभीर नहीं हुई। विवेचक ने करीब आठ महीने बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इससे धमाके के राज दफन हो गए थे, लेकिन फोरेंसिक जांच में क्लोराइड, नाईट्राइट, सल्फर और क्लोरेट आदि का इस्तेमाल मिलने पर यूपी एटीएस ने स्वत: इसे संज्ञान लिया और जांच तेज की। एटीएस ने लखीमपुर खीरी शहर निवासी अफजल, थाना धौरहरा के गांव सिसैया कलां निवासी जामिन, रामलाल भार्गव और निघासन क्षेत्र के हरसिंगपुर निवासी सज्जन अली, बहराइच निवासी कमरू, उसके साथी गुड्डू का नाम खोला। इनमें एटीएस मास्टरमाइंड कमरू, गुड्डू और शहर निवासी अफजल के पते की जानकारी नहीं कर सकी।
एटीेएस की रिपोर्ट पर सदर कोतवाली पुलिस ने आठ अक्तूबर 19 को रामलाल और सज्जन अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले की दोबारा विवेचना जेल गेट चौकी इंचार्ज जेपी यादव को सौंपी। खुलासा हुए एक महीने से अधिक का समय बीत गया, लेकिन विवेचक गिरफ्तारी तो दूर बहराइच निवासी मास्टर माइंड कमरू, उसका साथी गुड्डू और लखीमपुर शहर निवासी अफजल किस गांव मोहल्ले का रहने वाले हैं। इसका भी पता नहीं लगा सके। धौरहरा निवासी जामिन भी पुलिस के हाथ नहीं आया। विवेचक जेपी यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि एटीएस जब तीनों के घर नहीं तलाश पाई तो हमारे पास कोई जादुई छड़ी तो है नहीं जो हम तलाश लेंगे। इससे साफ है कि यूपी पुलिस की थ्योरी सिर्फ एटीएस के खुलासे तक ही सीमित रह गई।
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नेपाल भागने की बात कह बच रही पुलिस
क्राइस्ट चर्च पर बम धमाके के मास्टर माइंड कमरू और उसके फरार दोनों साथियों के एसपी पूनम सहित अन्य अफसर पहले ही नेपाल भाग जाने का दावा कर चुके हैं। पुलिस अफसर आज भी इस दावे के सहारे अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रही है।
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पुराने एसपी बंगले के निकट क्राइस्ट चर्च पर 3 साल पहले 17 सितंबर की रात दो बम धमाके हुए थे। यूपी पुलिस शुरुआती दौर से इस बम धमाके की जांच में नाकाम साबित हुई। जब यह हमला हुआ तो सदर कोतवाली पुलिस ने इसे किसी की शरारत माना। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना एसआई मोहम्मद रफी आलम को सौंपी, लेकिन पुलिस घटना को लेकर गंभीर नहीं हुई। विवेचक ने करीब आठ महीने बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इससे धमाके के राज दफन हो गए थे, लेकिन फोरेंसिक जांच में क्लोराइड, नाईट्राइट, सल्फर और क्लोरेट आदि का इस्तेमाल मिलने पर यूपी एटीएस ने स्वत: इसे संज्ञान लिया और जांच तेज की। एटीएस ने लखीमपुर खीरी शहर निवासी अफजल, थाना धौरहरा के गांव सिसैया कलां निवासी जामिन, रामलाल भार्गव और निघासन क्षेत्र के हरसिंगपुर निवासी सज्जन अली, बहराइच निवासी कमरू, उसके साथी गुड्डू का नाम खोला। इनमें एटीएस मास्टरमाइंड कमरू, गुड्डू और शहर निवासी अफजल के पते की जानकारी नहीं कर सकी।
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एटीेएस की रिपोर्ट पर सदर कोतवाली पुलिस ने आठ अक्तूबर 19 को रामलाल और सज्जन अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले की दोबारा विवेचना जेल गेट चौकी इंचार्ज जेपी यादव को सौंपी। खुलासा हुए एक महीने से अधिक का समय बीत गया, लेकिन विवेचक गिरफ्तारी तो दूर बहराइच निवासी मास्टर माइंड कमरू, उसका साथी गुड्डू और लखीमपुर शहर निवासी अफजल किस गांव मोहल्ले का रहने वाले हैं। इसका भी पता नहीं लगा सके। धौरहरा निवासी जामिन भी पुलिस के हाथ नहीं आया। विवेचक जेपी यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि एटीएस जब तीनों के घर नहीं तलाश पाई तो हमारे पास कोई जादुई छड़ी तो है नहीं जो हम तलाश लेंगे। इससे साफ है कि यूपी पुलिस की थ्योरी सिर्फ एटीएस के खुलासे तक ही सीमित रह गई।
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नेपाल भागने की बात कह बच रही पुलिस
क्राइस्ट चर्च पर बम धमाके के मास्टर माइंड कमरू और उसके फरार दोनों साथियों के एसपी पूनम सहित अन्य अफसर पहले ही नेपाल भाग जाने का दावा कर चुके हैं। पुलिस अफसर आज भी इस दावे के सहारे अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रही है।