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टेरर फंडिंग: सदाकत को अब छह दिनों में देना होगा एटीएस के सवालों का जवाब
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लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के मामले में बरेली जिला जेल में बंद सदाकत आखिरकार अब एटीएस से आमना-सामना होना तय हो गया है। बुधवार को सीजेएम ने उसे बृहस्पतिवार सुबह से छह दिन के लिए एटीएस को कस्टडी रिमांड पर देने को मंजूरी दे दी।
टेरर फंडिंग के मामले में नामजद सदाकत एटीएस और पुलिस को चकमा देकर 19 अक्तूबर को बरेली जेल चला गया था। उसने इसके लिए प्रेमनगर थाने के एक पुराने मुकदमे में जमानत तुड़वाई थी। इसके बाद से लगातार एटीएस उसे रिमांड पर लेने की कोशिश में थी। नेपाल तक फैले सदाकत के आतंकी नेटवर्क के खुलासा के लिए एटीएस ने सदाकत को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए दस दिन का कस्टडी रिमांड मांगा था। एटीएस के डीएसपी ने अर्जी देते हुए बताया था कि नेपाल सीमा के भारतीय गांव के रहने वाले सरवन और सुमन के साथ रिश्ते खोलने सहित विवेचना के कई अनसुलझे सवालों का जवाब सदाकत ही दे सकता है, इसलिए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। कस्टडी रिमांड पर सदाकत की ओर से वकील हाजिर नहीं हो सके। खुद सदाकत ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि बेवजह परेशान करने के लिए उसे कस्टडी रिमांड पर एटीएस मांग रहा है। वहीं अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने कस्टडी रिमांड अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि टेरर फंडिंग के तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुडे़ हैं, जिनमें पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के भी एजेंट शामिल हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जांच एजेंसी को पूरी सतर्कता से विवेचना आगे बढ़ानी है, जिसके लिए सदाकत की दस दिनों का कस्टडी रिमांड जरूरी है।
सीजेएम ने एटीएस की ओर से दस दिनों के कस्टडी रिमांड अर्जी को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए छह दिनों के लिए पूछताछ को मंजूरी दी है, साथ ही आदेश दिए कि सात नबंवर को सुबह दस बजे जिला जेल बरेली से एटीएस को बंदी मेडिकल कराने के बाद दिया जाएगा। मेडिकल कराने के बाद उसे 13 नबंवर की सुबह दस बजे तक वापस दाखिला करना होगा।
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कैमरा देखते ही सदाकत ने छिपाया मुंह
जिस टेरर फंडिंग के मामले में सदाकत को पूरे एरिया की कमांडिंग अथॉरिटी मिली हुई थी, वही सदाकत आज पुलिस हिरासत में होने के बाद भी तनिक मायूस नहीं दिखा, बल्कि चेहरे पर बेफिक्री के भाव लिए सदाकत ने बताया कुछ दिनों का शोर है, बाद में सब निपट जाएगा। वहीं फोटोग्राफी के लिए जैसे ही मीडिया कर्मियों ने कैमरा निकाला वैसे ही सदाकत ने नाराज होते हुए अपना मुंह कपड़े के भीतर छिपा लिया। बोला- फोटो फेसबुक से उठा लो, वैसे मेरी फोटो की जरूरत क्या है।
आवभगत में रहे सुरक्षा कर्मी
सुरक्षा गारद में आए सिपाही भी सदाकत की सुरक्षा के बजाय आवभगत में दिखे, उससे मिलने वाले लोगों ने उसके लिए पानी की बोतल दी, समोसा और चाय भी उसके संपर्क वालों के पास बैठाकर कोर्ट कैंपस में ही उसे उपलब्ध कराया। इस दृश्य का फोटो खींचने पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने आपत्ति जताते हुए कहा जब तक अदालत उसे दोषी नहीं साबित करती है, तब तक उसके सब अधिकार सुरक्षित हैं, लिहाजा वह बंदी को खाने पीने से नहीं रोक सकते।
बरेली में पहले भी रह चुका बंद
बताते हैं कि परतापुर चौधरी थाना इज्जतनगर के रहने वाले सदाकत के लिए बरेली जेल कोई नई नहीं है। वहां उसके कई मिलने जुलने वाले भी बंद है, स्थानीय बरेली के लोगों के लिए उससे मुलाकात करना बरेली जेल में रहते हुए ज्यादा आसान है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत वह जमानत तुड़वाकर बरेली जिला जेल में गया।
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टेरर फंडिंग के मामले में नामजद सदाकत एटीएस और पुलिस को चकमा देकर 19 अक्तूबर को बरेली जेल चला गया था। उसने इसके लिए प्रेमनगर थाने के एक पुराने मुकदमे में जमानत तुड़वाई थी। इसके बाद से लगातार एटीएस उसे रिमांड पर लेने की कोशिश में थी। नेपाल तक फैले सदाकत के आतंकी नेटवर्क के खुलासा के लिए एटीएस ने सदाकत को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए दस दिन का कस्टडी रिमांड मांगा था। एटीएस के डीएसपी ने अर्जी देते हुए बताया था कि नेपाल सीमा के भारतीय गांव के रहने वाले सरवन और सुमन के साथ रिश्ते खोलने सहित विवेचना के कई अनसुलझे सवालों का जवाब सदाकत ही दे सकता है, इसलिए उसे हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। कस्टडी रिमांड पर सदाकत की ओर से वकील हाजिर नहीं हो सके। खुद सदाकत ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि बेवजह परेशान करने के लिए उसे कस्टडी रिमांड पर एटीएस मांग रहा है। वहीं अभियोजन अधिकारी एसपी यादव ने कस्टडी रिमांड अर्जी पर बहस करते हुए कहा कि टेरर फंडिंग के तार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुडे़ हैं, जिनमें पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के भी एजेंट शामिल हैं। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जांच एजेंसी को पूरी सतर्कता से विवेचना आगे बढ़ानी है, जिसके लिए सदाकत की दस दिनों का कस्टडी रिमांड जरूरी है।
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सीजेएम ने एटीएस की ओर से दस दिनों के कस्टडी रिमांड अर्जी को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए छह दिनों के लिए पूछताछ को मंजूरी दी है, साथ ही आदेश दिए कि सात नबंवर को सुबह दस बजे जिला जेल बरेली से एटीएस को बंदी मेडिकल कराने के बाद दिया जाएगा। मेडिकल कराने के बाद उसे 13 नबंवर की सुबह दस बजे तक वापस दाखिला करना होगा।
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कैमरा देखते ही सदाकत ने छिपाया मुंह
जिस टेरर फंडिंग के मामले में सदाकत को पूरे एरिया की कमांडिंग अथॉरिटी मिली हुई थी, वही सदाकत आज पुलिस हिरासत में होने के बाद भी तनिक मायूस नहीं दिखा, बल्कि चेहरे पर बेफिक्री के भाव लिए सदाकत ने बताया कुछ दिनों का शोर है, बाद में सब निपट जाएगा। वहीं फोटोग्राफी के लिए जैसे ही मीडिया कर्मियों ने कैमरा निकाला वैसे ही सदाकत ने नाराज होते हुए अपना मुंह कपड़े के भीतर छिपा लिया। बोला- फोटो फेसबुक से उठा लो, वैसे मेरी फोटो की जरूरत क्या है।
आवभगत में रहे सुरक्षा कर्मी
सुरक्षा गारद में आए सिपाही भी सदाकत की सुरक्षा के बजाय आवभगत में दिखे, उससे मिलने वाले लोगों ने उसके लिए पानी की बोतल दी, समोसा और चाय भी उसके संपर्क वालों के पास बैठाकर कोर्ट कैंपस में ही उसे उपलब्ध कराया। इस दृश्य का फोटो खींचने पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने आपत्ति जताते हुए कहा जब तक अदालत उसे दोषी नहीं साबित करती है, तब तक उसके सब अधिकार सुरक्षित हैं, लिहाजा वह बंदी को खाने पीने से नहीं रोक सकते।
बरेली में पहले भी रह चुका बंद
बताते हैं कि परतापुर चौधरी थाना इज्जतनगर के रहने वाले सदाकत के लिए बरेली जेल कोई नई नहीं है। वहां उसके कई मिलने जुलने वाले भी बंद है, स्थानीय बरेली के लोगों के लिए उससे मुलाकात करना बरेली जेल में रहते हुए ज्यादा आसान है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत वह जमानत तुड़वाकर बरेली जिला जेल में गया।