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टेरर फंडिग़ के मामले में दो नाईजीरियाई भी पहुंचे जेल
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लखीमपुर खीरी। नेपाल राष्ट्र बैंक का एकांउट हैक कर 49 लाख रुपये निकालकर आतंकवादियों को आर्थिक मदद पहुंचाने के मामले में मुम्बई से गिरफ्तार नाईजीरिया के दो अभियुक्तों समेत तीन को रविवार को जेल भेज दिया गया। वहां पहले से उनके साथी सिराजुद्दीन और फहीम भी बंद हैं।
टेरर फंडिग के मामले में यूपी एटीएस ने मुंबई से गिरफ्तार किए गए नाइजीरियाई चिनवेउबा एमेका माइकल, पीटर हरमन अस्सेंगा और मुंबई निवासी अर्जुन अशोक खराड़े को सीजेएम विकास श्रीवास्तव के समक्ष पेश किया। सीजेएम कोर्ट में यूपी एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि नाईजीरिया निवासी पीटर हरमन अस्सेंगा ने नेपाल राष्ट्र बैंक की वेबसाइट हैक करके 49 लाख रुपये निकाले थे। पीटर ऐसा पहले भी कर चुका है। वह निकाली गई यह रकम इंटरनेट के जरिए ही नेपाल के लोगों के खातों में भेज देता था। इसके बाद सिराजुददीन और फहीम अपने साथियों की मदद से नेपाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलकर यह रकम अपने साथी की मदद से चिनवेउबा एमेका माइकल को पहुंचाते थे। यही बातें इससे पहले पकड़े जा चुके सिराज और फहीम ने बताई थीं। इन जानकारियों का मिलान करने के बाद यूपी एटीएस ने दोनों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने पेश किए गए तीनों आरोपियों के बारे में मुम्बई कोर्ट से जारी ट्रांजिट रिमांड दिखाया। उसके बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।
पुलिस हिरासत में पेश होने वाले चालान में अधिकतर 14 दिनों के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश अदालतें देती हैं, लेकिन इस मामले में चूंकि पहले जेल भेज गए अन्य आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि छह नवंबर को समाप्त हो रही है, इसलिए 27 अक्तूबर को भी पेश हुए तीन आरोपियों को छह नवंबर तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा को मंजूरी देते हुए छह नवंबर को सभी को पेश करने का आदेश दिया है।
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वैसे तो अवकाश के दिनों रिमांड मजिस्ट्रेट सामान्यत: दोपहर साढ़े तीन और चार बजे के बीच ही सिविल कोर्ट में बैठकर रिमांड के मामले देखते हैं। लेकिन मुंबई कोर्ट से मिले ट्रांजिट रिमांड की अवधि रविवार सुबह 11 बजे पूरी हो रही थी। इसी कारण एटीएस के अनुरोध पर और इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुबह 11 बजे ही तीनों आरोपियों का चालान रिमांड मजिस्ट्रेट के रूप में सीजेएम के सामने पेश हो गया। अन्य मामले दोपहर को ही सुने गए।
सूत्रों के मुताबिक एकाउंट हैक कर हड़पी गई रकम को निकालने के लिए कई गुमनामी बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया गया। चूंकि भारत में आधार आईडी सहित अन्य तमाम दस्तावेज बैंक खातों को खोलने के लिए जरूरी हैं, ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नेपाल बैंक में भी खाते खुलवाने इस जालसाज रैकेट को ज्यादा आसान लगा। यही कारण है कि इस जालसाजी में नेपाल के कई गुमनामी खाते भी पड़ताल में सामने आ रहे है।
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टेरर फंडिग के मामले में यूपी एटीएस ने मुंबई से गिरफ्तार किए गए नाइजीरियाई चिनवेउबा एमेका माइकल, पीटर हरमन अस्सेंगा और मुंबई निवासी अर्जुन अशोक खराड़े को सीजेएम विकास श्रीवास्तव के समक्ष पेश किया। सीजेएम कोर्ट में यूपी एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि नाईजीरिया निवासी पीटर हरमन अस्सेंगा ने नेपाल राष्ट्र बैंक की वेबसाइट हैक करके 49 लाख रुपये निकाले थे। पीटर ऐसा पहले भी कर चुका है। वह निकाली गई यह रकम इंटरनेट के जरिए ही नेपाल के लोगों के खातों में भेज देता था। इसके बाद सिराजुददीन और फहीम अपने साथियों की मदद से नेपाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलकर यह रकम अपने साथी की मदद से चिनवेउबा एमेका माइकल को पहुंचाते थे। यही बातें इससे पहले पकड़े जा चुके सिराज और फहीम ने बताई थीं। इन जानकारियों का मिलान करने के बाद यूपी एटीएस ने दोनों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने पेश किए गए तीनों आरोपियों के बारे में मुम्बई कोर्ट से जारी ट्रांजिट रिमांड दिखाया। उसके बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।
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पुलिस हिरासत में पेश होने वाले चालान में अधिकतर 14 दिनों के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश अदालतें देती हैं, लेकिन इस मामले में चूंकि पहले जेल भेज गए अन्य आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा की अवधि छह नवंबर को समाप्त हो रही है, इसलिए 27 अक्तूबर को भी पेश हुए तीन आरोपियों को छह नवंबर तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा को मंजूरी देते हुए छह नवंबर को सभी को पेश करने का आदेश दिया है।
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वैसे तो अवकाश के दिनों रिमांड मजिस्ट्रेट सामान्यत: दोपहर साढ़े तीन और चार बजे के बीच ही सिविल कोर्ट में बैठकर रिमांड के मामले देखते हैं। लेकिन मुंबई कोर्ट से मिले ट्रांजिट रिमांड की अवधि रविवार सुबह 11 बजे पूरी हो रही थी। इसी कारण एटीएस के अनुरोध पर और इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुबह 11 बजे ही तीनों आरोपियों का चालान रिमांड मजिस्ट्रेट के रूप में सीजेएम के सामने पेश हो गया। अन्य मामले दोपहर को ही सुने गए।
सूत्रों के मुताबिक एकाउंट हैक कर हड़पी गई रकम को निकालने के लिए कई गुमनामी बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया गया। चूंकि भारत में आधार आईडी सहित अन्य तमाम दस्तावेज बैंक खातों को खोलने के लिए जरूरी हैं, ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नेपाल बैंक में भी खाते खुलवाने इस जालसाज रैकेट को ज्यादा आसान लगा। यही कारण है कि इस जालसाजी में नेपाल के कई गुमनामी खाते भी पड़ताल में सामने आ रहे है।