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बारूद के ढेर पर है शहर.. फिर भी अफसर अनजान
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लखीमपुर खीरी। लखीमपुर शहर इन दिनों बारूद के ढेर पर है। नियमों को ताक पर रखकर कई पटाखा व्यापारियों ने घनी आबादी के बीच बिना लाइसेंस लाखों रुपये के पटाखे की दुकानें और उनका भंडारण गोदामों में कर रखा है। पुलिस और प्रशासनिक अफसर सब कुछ जानने के बाद भी अनजान बने हुए हैं। यह जानते हुए भी कि पिछले सालों में पटाखों का अवैध भंडारण और निर्माण जानलेवा साबित हुआ है। इस दौरान धौरहरा में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान भी जा चुकी है।
दिवाली के त्योहार मनाने के 12 दिन ही शेष बचे हैं। त्योहार नजदीक आते ही शहर की घनी आबादी में पटाखों का अवैध निर्माण और भंडारण शुरू कर दिया गया है। शहर के अलावा जिले के धौरहरा, सिंगाही, निघासन, मोहम्मदी, गोला आदि नगरों और कसबों में भी पटाखे बनते और चोरी छिपे भंडारण होता है। लाइसेंसधारी भी नियमों की अनदेखी करते हैं। लाइसेंस की आड़ में घर-घर बारूद पहुंचाकर पटाखे बनवाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग को इसकी जानकारी नहीं रहती है, लेकिन विभाग कार्रवाई का सिर्फ दिखवा करता है। गांवों के छोटे-छोटे दुकानदार चोरी-छिपे पटाखा खरीदकर गांवों में बेचने के लिए ले जाते हैं। पटाखों से संबंधित कोई भी लाइसेंस या मंजूरी विक्रेताओं ने प्रशासन से नहीं ली है। सूत्रों के मुताबिक शहर में एक करोड़ रुपये से अधिक के पटाखों का अलग-अलग स्थानों पर भंडारण किया गया है। वर्ष 2016 में कोतवाली व कसबा धौरहरा के मोहल्ला बाजार निवासी आतिशबाज मोहम्मदी सफी के घर तेज धमाका हुआ था। इस हादसे में एक ही परिवार के मोहम्मदी सफी समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। धमाका इतना तेज था कि इमारत भी ढह गई थी।
यह है लाइसेंस पाने का नियम
. पटाखा फैक्टरी या फिर अन्य दुकानदार को आतिशबाजी का अनुभव प्रमाण पत्र
. अग्निशमन और पुलिस की एनओसी।
. दुकान और फैक्टरी आबादी से एक किलोमीटर दूर होनी चाहिए।
. बिजली सप्लाई के तारों के आसपास की दुकानों को लाइसेंस नहीं मिलेगा।
पटाखा को लेकर पुुलिस काफी सतर्क है। यदि कहीं अवैध भंडारण या बिना लाइसेंस आतिशबाजी कहीं बनती पकड़ी गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-एसएन तिवारी, सीओ सिटी
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दिवाली के त्योहार मनाने के 12 दिन ही शेष बचे हैं। त्योहार नजदीक आते ही शहर की घनी आबादी में पटाखों का अवैध निर्माण और भंडारण शुरू कर दिया गया है। शहर के अलावा जिले के धौरहरा, सिंगाही, निघासन, मोहम्मदी, गोला आदि नगरों और कसबों में भी पटाखे बनते और चोरी छिपे भंडारण होता है। लाइसेंसधारी भी नियमों की अनदेखी करते हैं। लाइसेंस की आड़ में घर-घर बारूद पहुंचाकर पटाखे बनवाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग को इसकी जानकारी नहीं रहती है, लेकिन विभाग कार्रवाई का सिर्फ दिखवा करता है। गांवों के छोटे-छोटे दुकानदार चोरी-छिपे पटाखा खरीदकर गांवों में बेचने के लिए ले जाते हैं। पटाखों से संबंधित कोई भी लाइसेंस या मंजूरी विक्रेताओं ने प्रशासन से नहीं ली है। सूत्रों के मुताबिक शहर में एक करोड़ रुपये से अधिक के पटाखों का अलग-अलग स्थानों पर भंडारण किया गया है। वर्ष 2016 में कोतवाली व कसबा धौरहरा के मोहल्ला बाजार निवासी आतिशबाज मोहम्मदी सफी के घर तेज धमाका हुआ था। इस हादसे में एक ही परिवार के मोहम्मदी सफी समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। धमाका इतना तेज था कि इमारत भी ढह गई थी।
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यह है लाइसेंस पाने का नियम
. पटाखा फैक्टरी या फिर अन्य दुकानदार को आतिशबाजी का अनुभव प्रमाण पत्र
. अग्निशमन और पुलिस की एनओसी।
. दुकान और फैक्टरी आबादी से एक किलोमीटर दूर होनी चाहिए।
. बिजली सप्लाई के तारों के आसपास की दुकानों को लाइसेंस नहीं मिलेगा।
पटाखा को लेकर पुुलिस काफी सतर्क है। यदि कहीं अवैध भंडारण या बिना लाइसेंस आतिशबाजी कहीं बनती पकड़ी गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-एसएन तिवारी, सीओ सिटी