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अपने गांव लौटने की खुशी है तो रोजगार गंवाने की चिंता भी

Sat, 09 May 2020 09:20 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2020 09:20 PM IST
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corona
लखीमपुर खीरी। कोरोना के चलते देश में घोषित लॉकडाउन के बाद से दूसरे राज्यों से मजदूरों के लौटने का सिलसिला लगातार जारी है। शिरडी (महाराष्ट्र) से मजदूरों को जत्था, जिसमें करीब 1391 मजदूर थे शनिवार को लखीमपुर पहुंचा। सरकारी अमले और इंतजाम को देखकर ज्यादातर मजदूरों के चेहरे पर कोरोना का डर साफ नजर आया, तो वहीं उनके मन में घर लौटने की खुशी भी नजर आई, क्योंकि ऐसे मुश्किल समय में वह अपने घर सकुशल लौटने में कामयाब हो सके। मजदूरों के जत्थे में शामिल ज्यादातर लोग परिवार सहित ईंट पथाई का काम करने गए थे। अब रोजगार चला गया है, तो ऐसे में गांव में काम न मिलने की चिंता भी सताने लगी है। हजारों किलोमीटर दूर काम करने की मजबूरी के बारे में मजदूरों ने कहा कि अपने गांव या शहर में रोजगार मिलता, तो दूसरे राज्यों में क्यों जाते। अब वापस आ गए हैं। कोरोना के खौफ के चलते अब दोबारा जाना भी नहीं चाहते। ऐसे में रोजगार कैसे मिलेगा, क्या मिलेगा, इसके बारे में सोचकर परेशान भी हैं।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव गोड़वा पकरिया निवासी अनिल राज ने बताया कि करीब छह माह पहले नवंबर में ईंट पथाई का काम करने शिरड़ी गया था। मार्च में लॉकडाउन से काम बंद हो गया, जिसके बाद एक महीने तक किसी तरह गुजर बसर की। जो पैसे कमाए थे, वह लॉकडाउन में खर्च हो गए।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव गड़ौसा पतरासी निवासी प्रकाश ने बताया कि परिवार के छह सदस्यों के साथ शिरडी में ईंट पाथने गया था। बसें और ट्रेन बंद होने से घर लौटने की बहुत चिंता सता रही थी, क्योंकि वहां काम भी नहीं मिल रहा था। ऐसे में खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था।
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ओदरहना गांव निवासी चंद्रकली भी छह माह पहले परिवार के साथ ईंट पाथने महाराष्ट्र गई थीं। कोरोना और लॉकडाउन जैसे शब्दों के मतलब से अनजान चंद्रकली ने बताया कि वहां बहुत डर लगता था। बाजार बंद, आना-जाना बंद होने से किसी तरह घर पहुंचने की जल्दी थी। उन्होंने कहा कि अब दोबारा काम करने महाराष्ट्र नहीं जाएंगे।

गांव परसिया निवासी सरोज कुमार भी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ईंट पाथने शिरडी गया था। कोरोना के चक्कर में इस बार ठीक से काम भी नहीं कर पाया, जिससे मजदूरी भी आधी रह गई। जो भी तीन महीने में कमाया था, वो लॉकडाउन के एक महीने में बिना काम किए खर्च हो गया।
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